Dal Soaking Tips: कौन सी दाल कितनी देर भिगोएं? मूंग से चना और उड़द तक जानें सही समय
Dal Soaking Tips: दाल को पकाने से पहले पानी में भिगोने से वह नरम हो जाती है और इसे पकने में कम समय लग सकता है। खासकर चना और उड़द जैसी दालों को पकाने से पहले भिगोना ज्यादा उपयोगी रहता है। हालांकि, सभी दालों को एक ही समय के लिए भिगोने की जरूरत नहीं होती।
दाल के प्रकार और उसके आकार के हिसाब से समय अलग-अलग हो सकता है। जानें मूंग, मसूर, चना और उड़द दाल को भिगोने का सही समय और आसान किचन टिप्स।
1. मूंग दाल
मूंग दाल बाकी कई दालों की तुलना में जल्दी नरम हो जाती है। इसे करीब 30 मिनट से 1 घंटे तक भिगोना काफी हो सकता है। अगर आप इसे जल्दी पकाना चाहते हैं, तो भिगोने के बाद पानी निकालकर साफ पानी में पकाएं।
2. मसूर दाल
मसूर दाल को पकाने से पहले लंबे समय तक भिगोना जरूरी नहीं होता। इसे करीब 30 मिनट पानी में रखने के बाद पकाया जा सकता है। समय कम हो तो मसूर दाल को बिना भिगोए भी पकाया जा सकता है, हालांकि भिगोने से पकने का समय कम हो सकता है।
3. चना दाल
चना दाल थोड़ी सख्त होती है, इसलिए इसे बाकी दालों की तुलना में ज्यादा समय तक भिगोना बेहतर रहता है। इसे करीब 2 से 4 घंटे पानी में भिगो सकते हैं। अगर पहले से तैयारी करनी हो, तो इसे कुछ घंटे पहले भिगोकर रखना सुविधाजनक रहता है।
4. उड़द दाल
उड़द दाल को भिगोने का समय इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप इसे किस डिश के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। साबुत उड़द को आमतौर पर कई घंटों तक भिगोना पड़ सकता है, जबकि धुली उड़द जल्दी नरम हो जाती है। इडली, डोसा या वड़ा जैसे व्यंजन बनाने के लिए दाल को पर्याप्त समय तक भिगोना जरूरी होता है, ताकि इसे आसानी से पीसा जा सके।
दाल भिगोते समय इन बातों का रखें ध्यान
- दाल को भिगोने से पहले अच्छी तरह साफ करके धो लें।
- भिगोने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी इस्तेमाल करें।
- गर्म मौसम में दाल को बहुत लंबे समय तक कमरे के तापमान पर न छोड़ें।
- भिगोने के बाद पानी निकालकर दाल को एक बार साफ पानी से धो सकते हैं।
- दाल की किस्म और डिश के हिसाब से भिगोने का समय थोड़ा कम-ज्यादा हो सकता है।
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Parenting Tips: बच्चे की गलती पर डांटना सही नहीं, अपनाएं ये 5 तरीके; व्यवहार सुधारने में मिलेगी मदद
Child Discipline Tips: बच्चों की शरारत या जिद देखकर कई बार माता-पिता गुस्से में डांटने या सजा देने लगते हैं। लेकिन अनुशासन सिखाने का तरीका ऐसा होना चाहिए, जिससे बच्चा डरने के बजाय अपनी गलती समझे और धीरे-धीरे सही व्यवहार करना सीखे। बच्चों से गलती होना उनके सीखने और बढ़ने का हिस्सा है।
ऐसे में हर छोटी गलती पर तेज आवाज में डांटना, डराना या शारीरिक सजा देना बच्चे के व्यवहार को सुधारने के बजाय उसे और जिद्दी या डरा हुआ बना सकता है। जानें बच्चे की गलती सुधारने और अच्छे व्यवहार को बढ़ावा देने के 5 आसान तरीके।
1. मारने या शारीरिक सजा देने से बचें
बच्चे को गलती पर मारना अनुशासन सिखाने का सही तरीका नहीं है। इससे बच्चा कुछ समय के लिए शांत हो सकता है, लेकिन उसे अपनी गलती की वजह समझ नहीं आती। इसके बजाय उसे बताएं कि उसने क्या गलत किया और अगली बार क्या करना चाहिए।
2. हर बात पर चिल्लाने से बचें
बच्चे की गलती पर बार-बार चिल्लाने से वह डर सकता है या माता-पिता से अपनी बात छिपाने लग सकता है। शांत आवाज में बात करके उसे अपनी गलती समझाने की कोशिश करें।
3. डर दिखाकर बात मनवाना छोड़ें
डर दिखाकर बच्चे को चुप कराना आसान लग सकता है, लेकिन इससे उसके मन में डर बैठ सकता है। बेहतर है कि उसे नियम और उसके पीछे की वजह सरल शब्दों में समझाई जाए।
4. अच्छे व्यवहार की तारीफ करें
बच्चा जब कोई अच्छा काम करे या अपनी गलती सुधारने की कोशिश करे, तो उसकी तारीफ जरूर करें। छोटी-सी शाबाशी भी बच्चे को सही व्यवहार दोहराने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है।
5. प्यार से समझाएं और नियम तय करें
बच्चे को अनुशासन सिखाने का सबसे अच्छा तरीका सिर्फ डांटना नहीं, बल्कि उसे समझाना भी है। घर में कुछ आसान और स्पष्ट नियम बनाएं और उन्हें लगातार एक जैसे तरीके से लागू करें। इससे बच्चे को पता रहता है कि उससे क्या उम्मीद की जा रही है।
बच्चे को अनुशासन सिखाने का मकसद क्या हो?
अनुशासन का मतलब बच्चे को डराकर चुप कराना नहीं है। इसका मकसद उसे सही और गलत के बीच अंतर समझाना, अपनी भावनाओं को संभालना और जिम्मेदारी लेना सिखाना है। इसलिए गलती होने पर पहले बच्चे को शांत करें, फिर उसकी बात सुनें और उसके बाद सही व्यवहार के बारे में समझाएं।
(Disclaimer): यह लेख सामान्य पैरेंटिंग जानकारी के लिए है। हर बच्चा अलग होता है, इसलिए गंभीर व्यवहार संबंधी परेशानी होने पर बाल विशेषज्ञ या काउंसलर की सलाह लेना बेहतर है।
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