मेहंदी का रंग लाल क्यों होता है, इसे दही-नींबू के साथ क्यों लगाते हैं? दिलचस्प है वजह
Unknown Fact : मेहंदी लगाते वक्त आपने दही और नींबू का इस्तेमाल जरूर देखा होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं इसके पीछे की वजह क्या है? मेहंदी का रंग लाल क्यों होता है और दही-नींबू इसे गहरा करने में कैसे मदद कर सकते हैं? जानिए मेहंदी के खूबसूरत रंग का दिलचस्प विज्ञान इस खबर में..
JLR ब्रिटेन में 4,000 कर्मचारियों की छंटनी करेगी:खर्च में ₹21,700 करोड़ की कटौती का प्लान; सरकार फंड देने से पीछे हटी
तमाम दबावों के बीच टाटा मोटर्स के स्वामित्व वाली जगुआर लैंड रोवर यूके में 4,000 कर्मचारियों को निकालने की योजना बना रही है। द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन सरकार ने इन नौकरियों को बचाने के लिए कोई आर्थिक मदद देने से इनकार कर दिया है। JLR के ब्रिटेन में 34,000 कर्मचारी काम करते हैं। प्रस्तावित छंटनी कुल यूके वर्कफोर्स का लगभग 12% है। कंपनी का कहना है कि उसे बदलते हालातों के हिसाब से ढलने की जरूरत है। कंपनी पर दबाव की 2 बड़ी वजहें वॉलिंटरी रिटायरमेंट और ₹21,700 करोड़ की बचत कंपनी ने 4 सितंबर को कर्मचारियों से कहा है कि वे वॉलिंटरी रिडंडेंसी प्रोग्राम के लिए तैयार रहें। इस प्रोग्राम के तहत कर्मचारी खुद अपनी मर्जी से नौकरी छोड़ सकते हैं। JLR का लक्ष्य दो सालों के भीतर लागत में 1.7 बिलियन पाउंड यानी करीब ₹21,700 करोड़ की कमी करना है। सीनियर मैनेजमेंट और RD में सबसे ज्यादा कटौती जल्द ही इस मामले में और विस्तृत जानकारी मिलने की उम्मीद है, जिसमें यह भी साफ होगा कि क्या अनिवार्य छंटनी की गुंजाइश बचती है या नहीं। सूत्रों के मुताबिक, सीनियर मैनेजमेंट और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (RD) से जुड़े पदों पर सबसे ज्यादा छंटनी दिख सकती है। यूके सरकार बोली- कंपनी चलाने की जिम्मेदारी हमारी नहीं यूके के बिजनेस सेक्रेटरी जोनाथन रेनॉल्ड्स ने कहा है कि कंपनियों को चलाना उनकी जिम्मेदारी नहीं है और किसी भी राहत पैकेज के लिए सरकारी फंड उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। 8 सितंबर की बैठक तय करेगी कर्मचारियों का भविष्य जेएलआर के सीईओ पीबी बालाजी 8 सितंबर को ब्रिटिश सरकार के अधिकारियों और ट्रेड यूनियन के नेताओं के साथ अहम बैठक करेंगे। ब्रिटेन की प्रमुख यूनियन 'यूनाइट' की जनरल सेक्रेटरी शेरोन ग्राहम सरकार पर मदद के लिए दबाव बनाएंगी। यूनियन का कहना है कि किसी भी कर्मचारी को जबरन नौकरी से न निकाला जाए। उन्हें फिर से ट्रेनिंग मिले या अपनी मर्जी से जाने यानी वॉलंटरी एग्जिट का विकल्प दिया जाए। ऑटो सेक्टर में यह संकट सिर्फ जेएलआर तक सीमित नहीं है। जर्मनी की बड़ी कार कंपनी फॉक्सवैगन भी अमेरिकी टैरिफ और चीनी कंपनियों से मिल रही टक्कर के चलते छंटनी करने की तैयारी में है। पूरी ग्लोबल ऑटो इंडस्ट्री इस दबाव से जूझ रही है।
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