पश्चिम बंगाल: नाबालिग गर्भधारण मामलों के लिए बनेगी एसओपी, स्वास्थ्य विभाग ने बनाई विशेषज्ञ समिति
कोलकाता, 10 सितंबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार कर रहा है कि 18 साल से कम उम्र की लड़कियों (शादीशुदा होने पर भी) के गर्भवती होने के मामलों को कैसे संभाला जाए।
यह पहल मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की इस घोषणा के बाद की गई है कि अब से 18 साल की उम्र से पहले मां बनने वाली लड़कियों के पतियों पर प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज (पॉक्सो) एक्ट के तहत मुकदमा चलाया जाएगा और राज्य सरकार उनके खिलाफ खुद (सूमो-मोटो) मामले दर्ज करेगी।
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि इस मामले में एसओपी तैयार करने के लिए नौ सदस्यों की एक एक्सपर्ट कमेटी पहले ही बना दी गई है।
इस एक्सपर्ट कमेटी में कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के प्रमुख देबाशीष दास और पांच प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ उलुबेरिया मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के डॉ. संजय भट्टाचार्य, एनआरएस मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के डॉ. सौरव चटर्जी, रायगंज मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की डॉ. तुलिका झा, रामपुरहाट मेडिकल एंड हॉस्पिटल की डॉ. शैली सेठ और अपोलो हॉस्पिटल के डॉ. भास्कर पाल शामिल हैं।
कमेटी में स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि मातृ स्वास्थ्य की डिप्टी डायरेक्टर श्यामली रुद्र, परिवार नियोजन अधिकारी शाश्वती नाग और पूर्वी मेदिनीपुर जिले की पब्लिक हेल्थ एंड नर्सिंग ऑफिसर सीमा माइती भी शामिल हैं। कमेटी की पहली बैठक 18 सितंबर को होगी।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. सरदवत मुखोपाध्याय के अनुसार पश्चिम बंगाल में 18 साल से कम उम्र की लड़कियों के गर्भवती होने की घटनाएं बहुत ज्यादा हैं।
उन्होंने कहा, अगर कोई नाबालिग लड़की 18 साल से कम उम्र में गर्भवती हो जाती है तो इस बात की बहुत ज्यादा संभावना होती है कि गर्भावस्था के दौरान उसकी मौत हो सकती है, इसलिए ऐसे मामलों को कैसे संभाला जाए, इस पर एक एसओपी होना जरूरी है।
पता चला है कि प्रस्तावित एसओपी में कई अहम मुद्दों की जानकारी जैसे कि मां को होने वाले जोखिमों की पहचान, नियमित एंटीनेटल चेकअप (गर्भावस्था के दौरान जांच), एनीमिया और कुपोषण का इलाज, जरूरत पड़ने पर बड़े मेडिकल सेंटरों में रेफर करना, सुरक्षित डिलीवरी और डिलीवरी के बाद मां और बच्चे की निगरानी शामिल होगी।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने कहा, नई एसओपी में यह बताया जाएगा कि प्रेग्नेंसी की पुष्टि होने के तुरंत बाद किशोर लड़की को स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायनेकोलॉजिस्ट) और प्रसूति रोग विशेषज्ञ (ऑब्स्टेट्रिशियन) के पास ले जाया जाए और उसे प्रसव-पूर्व देखभाल (एंटीनेटल केयर) के दायरे में लाया जाए।
--आईएएनएस
एएसएच/डीकेपी
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