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बांग्लादेश को हराकर महिला एशिया कप 2026 के फाइनल में पहुंची भारतीय टीम, दीप्ति शर्मा की घातक गेंदबाजी

IND W vs BAN W Womens Asia Cup 2026 Semi-Final: महिला एशिया कप 2026 के पहले सेमीफाइनल मैच में भारत ने बांग्लादेश को 40 रनों से हराकर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है. भारत के दिए 150 रनों की लक्ष्य का पीछा करने उतरी बांग्लादेश की टीम 6 विकेट पर 109 रन ही बना सकी. बांग्लादेश के लिए कोई बल्लेबाज 30 रनों के आंकड़े को नहीं छू सकीं. वहीं भारत की ओर से घातक गेंदबाजी करते हुए दीप्ति शर्मा ने 3 विकेट चटकाए. 

श्री चरणी और दीप्ति शर्मा ने बांग्लादेश को दिए शुरुआती झटके

भारत द्वारा दिए गए 150 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी बांग्लादेश की पारी का आगाज दिलारा अख्तर और जुएरिया फिरदौस ने किया. भारत के मुकाबले बांग्लादेश की शुरुआत थोड़ी ठीक-ठाक रही, लेकिन फिर श्री चरणी ने 6वें ओवर में 26 रन के स्कोर पर जुएरिया फिरदौस को आउट कर बांग्लादेश को पहला झटका दिया. जुएरिया फिरदौस 18 गेंदों में 14 रन बनाकर आउट हुईं. इसके बाद बांग्लादेश के 35 रन के स्कोर पर दीप्ति शर्मा ने दिलारा अख्तर को पवेलियन का रास्ता दिखाया. दिलारा 26 गेंदों पर 21 रन बनाकर आउट हुईं, जिसमें 4 चौके शामिल थे.

इसके बाद सोभना मोस्टोरी और कप्तान निगार सुल्ताना ने पारी को संभाला और आगे बढ़ाया, लेकिन फिर दीप्ति शर्मा ने सोभना मोस्टोरी को आउट कर बांग्लादेश को तीसरा झटका दिया. सोभना मोस्टोरी 24 गेंद पर एक चौके की मदद से 18 रन बनाकर आउट हुईं. फिर प्रेमा रावत ने कप्तान निगार सुल्तान को आउट कर बांग्लादेश को चौथा झटका दिया है. निगार सुल्तान 17 गेंद पर 19 रन बनाकर आउट हुए, जिसमें 1 चौका और एक छक्का शामिल रहा. 

ऐसी रही भारतीय महिला टीम की बल्लेबाजी, शैफाली वर्मा ने लगाई फिफ्टी

महिला एशिया कप 2026 के सेमीफाइनल मैच में बांग्लादेश के खिलाफ टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय महिला टीम ने 6 विकेट पर 149 रन बनाए थे. भारत की ओर से ओपनर शैफाली वर्मा ने सबसे ज्यादा 64 रनों की पारी खेली, जबकि कप्तान हरमनप्रीत कौर ने नाबाद 24 रन बनाए. वहीं ऋचा घोष ने 21 रन और प्रतिका रावल ने 20 रनों का योगदान दिया. इसके साथ ही, दीप्ति शर्मा ने आखिरी में 6 गेंदों पर 13 रनों की पारी खेलकर टीम इंडिया के स्कोर को 140 के पार पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई. बांग्लादेश के लिए सुल्ताना खातुन ने 2 विकेट लिए, जबकि नाहिदा अख्तर और राबेया खान ने 1-1 विकेट चटकाया.

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बच्चियों के आत्मसम्मान को समझने के लिए शिक्षकों को तैयार कर रही योगी सरकार

यूपी सरकार बालिकाओं की शिक्षा को उनके आत्मसम्मान, सुरक्षा, गरिमा और नेतृत्व क्षमता से जोड़ते हुए विद्यालयी वातावरण को अधिक संवेदनशील बनाने की दिशा में काम कर रही है. इसी क्रम में बच्चों के आत्मसम्मान को प्रभावित करने वाले संवेदनशील मुद्दों पर शिक्षकों की समझ विकसित की जा रही है. रूप-रंग अथवा शारीरिक बनावट को लेकर चिढ़ाना, स्वयं और दूसरों को केवल शरीर या रूप-रंग के आधार पर देखना, अपने शरीर और उसकी क्षमताओं को पहचानना, सोशल मीडिया का प्रभाव तथा लैंगिक रूढ़ियां प्रशिक्षण के प्रमुख विषय हैं. 

मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण शुरू हो गया

विशेष परियोजना फॉर इक्विटी के अंतर्गत मीना मंच कार्यक्रम एवं सेल्फ-एस्टीम परियोजना के लिए आज से दो बैच में 100 प्रतिभागियों का दो दिवसीय मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण शुरू हो गया है. व्यापक प्रशिक्षण रूपरेखा में कुल 450 मास्टर ट्रेनर्स को तैयार करने का लक्ष्य है. इस पहल का उद्देश्य शिक्षकों को बच्चों के संवेदनशील अनुभवों को समझने और उनके साथ प्रभावी संवाद के लिए तैयार करना है, ताकि विद्यालयों में सुरक्षित, सहभागी और सम्मानजनक वातावरण मजबूत हो तथा हर बालिका आत्मविश्वास के साथ अपनी शिक्षा और भविष्य की ओर आगे बढ़ सके.

शारीरिक बनावट के आधार 

प्रशिक्षण में नव-विकसित चार कॉमिक पुस्तकों को शिक्षण संसाधन के रूप में शामिल किया गया है. इनके माध्यम से रूप-रंग और शारीरिक बनावट के आधार पर चिढ़ाने एवं परेशान करने, शरीर को लेकर बच्चों की धारणाओं, अपने शरीर से जुड़ाव एवं उसकी क्षमताओं तथा सोशल मीडिया के प्रभाव जैसे विषयों को समझाया जा रहा है. इन संसाधनों के उपयोग से बच्चों के नामांकन, नियमित उपस्थिति और विद्यालयी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी बढ़ाने के तरीकों का भी प्रदर्शन होगा. प्रशिक्षण में मीना मंच के गठन, ‘पॉवर एंजिल’ की भूमिका और सहभागितापूर्ण सहजीकरण की प्रक्रिया पर काम हो रहा है.

विषयों पर संवाद का भी अभ्यास 

एसटीएआरएस सिद्धांत के माध्यम से सुरक्षित वातावरण में बच्चों की बात सुनने, बिना पूर्वधारणा के संवाद करने, सभी आवाजों को महत्व देने और अनुभवों से सीखने की प्रक्रिया समझाई जा रही है. लैंगिक रूढ़ियों की पहचान तथा कॉमिक्स और कक्षा गतिविधियों के माध्यम से इन विषयों पर संवाद का भी अभ्यास हो रहा है. प्रशिक्षण के पहले दिन लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो अधिनियम) पर चर्चा के माध्यम से बाल सुरक्षा के प्रमुख संदेशों को स्पष्ट किया गया. मॉक प्रदर्शन और रचनात्मक प्रतिक्रिया के माध्यम से प्रतिभागियों के सहजीकरण कौशल को मजबूत करने का प्रयास हुआ. बच्चों और शिक्षकों की कहानियों को एकत्रित, दस्तावेजीकृत और प्रस्तुत करने की प्रक्रिया पर भी काम होगा.

जीवन से जोड़ने का अभ्यास होगा

दूसरे दिन संशोधित ‘प्रगति के पंख’ मॉड्यूल के चार नए अध्यायों, 13 सत्रों और शिक्षक मार्गदर्शिका की समझ विकसित की जाएगी. समूह अभ्यास और मॉक सत्रों के माध्यम से इसके सत्रों को पाठ्यक्रम तथा किशोर-किशोरियों के जीवन से जोड़ने का अभ्यास होगा. ‘अरमान’ मॉड्यूल और अभिभावक सत्रों की जानकारी भी दी जाएगी. उच्चतम न्यायालय के डॉ. जया ठाकुर बनाम भारत सरकार एवं अन्य (2026) निर्णय के प्रमुख निहितार्थों पर भी चर्चा होगी. मासिक धर्म स्वास्थ्य, गरिमा और विद्यालय की जिम्मेदारियों के अंतर्गत सुरक्षित शौचालय, पानी, आवश्यक उत्पाद, निस्तारण, गोपनीयता और जागरूकता जैसे विषयों पर विद्यालयी स्तर पर व्यावहारिक कदम तय करने का अभ्यास कराया जाएगा.

राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा संदीप सिंह ने कहा कि सरकार बालिकाओं को शिक्षा के साथ आत्मसम्मान, सुरक्षा और नेतृत्व का वातावरण देने के लिए प्रतिबद्ध है. रूप-रंग, शारीरिक बनावट, सोशल मीडिया और लैंगिक रूढ़ियों जैसे संवेदनशील विषयों को समझना शिक्षकों के लिए बेहद आवश्यक है. मीना मंच के माध्यम से शिक्षकों को तैयार करने से विद्यालयों में बच्चों के साथ अधिक संवेदनशील और प्रभावी संवाद को मजबूती मिलेगी.

शिक्षकों का संवेदनशील होना महत्वपूर्ण 

महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि बच्चों के आत्मसम्मान और सुरक्षित वातावरण के लिए शिक्षकों का संवेदनशील होना महत्वपूर्ण है. प्रशिक्षण में बॉडी इमेज, सोशल मीडिया के प्रभाव, लैंगिक रूढ़ियों, बाल सुरक्षा और मासिक धर्म स्वास्थ्य जैसे विषयों को व्यावहारिक गतिविधियों से जोड़कर समझाया जा रहा है. प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स के माध्यम से यह समझ विद्यालय स्तर तक प्रभावी रूप से पहुंचाई जाएगी.

 

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  Sports

लगातार सबसे ज्यादा टेस्ट हारने वाली 5 टीमें, एक टीम गंवा चुकी है 21 मैच, जीत को वर्षों तरसती रहीं

5 team Most consecutive defeats in Test: टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में लगातार सबसे ज्यादा मैच हारने का शर्मनाक रिकॉर्ड बांग्लादेश के नाम दर्ज है, जिसने 2001 से 2004 के दौरान लगातार पराजय का सामना किया. इसके अलावा जिम्बाब्वे दो अलग-अलग दौरों में लगातार 11 और 10 मुकाबले हारा. शुरुआती दौर (1889-1899) में दक्षिण अफ्रीका भी लगातार 8 टेस्ट हार चुका है. सबसे ज्यादा टेस्ट हारने वाली 5 टीमें इस प्रकार हैं. Fri, 11 Sep 2026 07:01:02 +0530

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