UPI यूजर्स के लिए बड़ी अपडेट, अब मिलेंगी ये 2 नई सुविधाएं, RBI गवर्नर ने किया लॉन्च, जानें डिटेल
गुरुवार को मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) से जुड़े फीचर में दो नए फीचर्स लॉन्च किए हैं। जिसका उद्देश्य ग्राहकों के लिए प्लेटफॉर्म को भी बेहतर बनाना है। इसमें पॉइंट ऑन सेल (POS) टर्मिनल्स पर “Tap एंड Pay” और AI आधारित कस्टमर सपोर्ट सॉल्यूशन “MyUPI” शामिल है।
टैप एंड पे एक ऐसी सर्विस है, जिससे यूजर अपने एनएफसी इनेब्लड स्मार्टफोन को अनलॉक करके और उसे एनएफसी इनेबल्ड पॉइंट ऑफ सेल टर्मिनल पर टैप करके तेजी से भुगतान कर सकते हैं। यह फीचर उपयोगकर्ताओं के मोबाइल इंटरनेट कनेक्टिविटी पर निर्भर नहीं करता। ट्रांजेक्शन पीओएस मशीन के इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल करके ही पूरा किया जा सकता है।
बिना पिन भेज पाएंगे 5 हजार रुपये
Tap एंड Pay फीचर यूपीआई पर रूपे क्रेडिट कार्ड सहित कई तरह के अकाउंट में सुरक्षित पेमेंट को सपोर्ट करता है। यूजर 5,000 रुपये तक का लेनदेन बिना किसी पिन कर सकते हैं। इससे हालांकि अमाउंट होने पर इसके POS टर्मिनल पर यूपीआई पिन डालना होगा।
NPCI ने बताया कि GFF 2025 में यूपीआई बायोमैट्रिक ऑथेंटिकेशन लॉन्च किया था। जिसके कारण लेनदेन आसान हुआ और सुरक्षा भी बढ़ी। इस नए फीचर से भी पेमेंट फास्ट होने की उम्मीद है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक 31 अगस्त 2026 तक बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेटेड यूपीआई ट्रांजेक्शन 6 बिलियन भी ज्यादा देखा गया।
MyUPI में कई फीचर्स शामिल
आरबीआई गवर्नर द्वारा लॉन्च किया गया दूसरा फीचर “माय यूपीआई” है जो यूजर्स को अलग-अलग बैंकों और यूपीआई ऐप्स में यूपीआई ट्रांजेक्शन और ऑटोपेमेंडेट का एक सिंगल व्यू देता है। पेमेंट के लिए सिक्योरिटी नेट के देने के लिए यूजर कंट्रोल जैसे फीचर्स पेश किए गए हैं। सेफ्टी स्विच के जरिए होने पर यूपीआई डेबिट ट्रांजेक्शन को रिजेक्ट करने का रिक्वेस्ट किया जा सकता है।
नंबर Delink फीचर के जरिए पेमेंट के लिए अपना नंबर डीलिंक कर सकते हैं। पेई कॉन्टेक्ट्स-बेस्ड इनफॉरमेशन, जो यूजर्स को पेमेंट करने के लिए फायदेमंद के बारे में ज्यादा जानकारी देती है। ऑटोमेटेड चार्जबैक प्रोसेसिंग जो योग्य ट्रांजेक्शन के लिए रियल टाइम चार्जबैक क्रिएशन को उपलब्ध करवाती है, जिससे कंप्लेंट सॉल्यूशन टाइम काफी कम हो जाता है। यह सर्विस विभिन्न भाषाओं में 24×7 उपलब्ध रहेगी। साथ ही सेल्फ सर्विस सुविधा मिलेगी।
Dabra News: जिस उम्र में अपनों का सहारा चाहिए, उस उम्र में सड़क पर बेसहारा मिली ‘मां’; अपना घर आश्रम बना परिवार
डबरा: उम्र के इस पड़ाव पर जब कदम लड़खड़ाने लगें तो किसी अपने का हाथ सबसे बड़ी ताकत होता है। लेकिन हर किसी के हिस्से में यह साथ नहीं आता। डबरा की सड़क पर लाचार हालत में भटक रही एक बुजुर्ग माताजी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। न साथ में कोई अपना था, न सिर पर छत और न यह पता कि अगला ठिकाना कहां होगा।
राह चलते शायद कई लोगों की नजर उन पर पड़ी होगी, लेकिन गोविंद गुप्ता ने उन्हें देखकर नजरें नहीं फेरीं। उन्होंने ‘अपना घर आश्रम’ की टीम को सूचना दी। टीम मौके पर पहुंची और बुजुर्ग महिला को रेस्क्यू कर आश्रम ले आई।
यहां सबसे पहले उनके स्वास्थ्य और जरूरी देखभाल की व्यवस्था की गई। उन्हें नहलाया गया, साफ कपड़े पहनाए गए और भोजन कराया गया। इन जरूरतों के साथ उन्हें वह एहसास भी मिला, जिसकी शायद उस वक्त सबसे ज्यादा जरूरत थी-अब वे अकेली नहीं हैं।
एक घटना, लेकिन सवाल पूरे समाज से
जिस उम्र में मां-बाप को अपने बच्चों और परिवार की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उस उम्र में किसी बुजुर्ग का सड़क पर इस हालत में मिलना केवल एक घटना भर नहीं है। यह समाज के सामने भी सवाल छोड़ता है कि जिंदगी भर दूसरों को संभालने वाले हाथ आखिर उम्र के आखिरी पड़ाव पर अकेले कैसे छूट जाते हैं? इस माताजी को अब सुरक्षित ठिकाना मिल गया है, लेकिन ऐसी परिस्थितियों से गुजरने वाली वे अकेली नहीं हैं।
अपना घर आश्रम में रह रहे करीब 125 ‘प्रभुजी’
डबरा का अपना घर आश्रम ऐसे ही जरूरतमंद लोगों की देखभाल कर रहा है। यहां आश्रय लेने वालों को ‘प्रभुजी’ कहकर संबोधित किया जाता है। दतिया, भिंड, मुरैना, ग्वालियर सहित आसपास के क्षेत्रों से भी जरूरतमंदों को रेस्क्यू कर यहां लाया जाता है। वर्तमान में करीब 125 प्रभुजी यहां रह रहे हैं। उनके भोजन, रहने और स्वास्थ्य जैसी जरूरतों का ध्यान रखने के साथ उन्हें सम्मान के साथ जीवन जीने का माहौल देने का प्रयास किया जाता है।
रिश्तों की एक अलग परिभाषा
आश्रम के संस्थापक मनीष पांडे और उनकी टीम ऐसे लोगों की सेवा में जुटी है, जिनके मुश्किल वक्त में कई बार कोई अपना साथ नहीं होता। शायद इसीलिए यहां रिश्तों की परिभाषा भी थोड़ी अलग दिखाई देती है- रिश्ते केवल खून से नहीं, किसी अनजान के लिए रुक जाने और उसका हाथ थाम लेने से भी बनते हैं।
गोविंद गुप्ता ने भी यही किया। उन्होंने कोई बड़ा दावा नहीं किया, बस सड़क पर मिली एक बुजुर्ग महिला को देखकर सही जगह सूचना पहुंचाई। बाकी जिम्मेदारी आश्रम की टीम ने संभाल ली। यह घटना एक छोटी-सी बात याद दिलाती है- हर मदद के लिए बड़ा साधन जरूरी नहीं होता। कभी-कभी किसी अनजान के लिए रुक जाना ही काफी होता है।
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