12 तारीख से दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन शुरू होने जा रहा है। जिसमें शामिल होने के लिए रूस, चीन समेत दुनिया के कई देशों के राष्ट्र प्रमुख यहां पर आ रहे हैं। लेकिन समिट शुरू होने से पहले ब्रिक्स समिट को लेकर पी चिदंबरम ने कहा कि हालिया बैठकों से कोई बड़ा नतीजा नहीं निकला। बीजेपी ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि जरा 1947 से लेकर के 2014 तक का हिसाब भी देख लीजिए। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी ब्रिक्स समिट में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं और 7 साल के बाद यह शी जिनपिंग का भारत दौरा होगा।
7 साल बाद जिनपिंग का भारत आना क्या पुराने विवादों को खत्म कर देगा, सुलझा देगा?
शी जिनपिंग का यह दौरा भारत और चीन के रिश्तों में आई तल्खी के बाद काफी अहम माना जा रहा है। 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया था। इसके बाद सीमा पर सैन्य तैनाती के साथ-साथ दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्तों में भी खिंचाव देखने को मिला। अगर 12 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक होती है, तो गलवान की घटना के बाद दोनों नेताओं की यह पहली आमने-सामने द्विपक्षीय बातचीत होगी। इसके अलावा शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत आएंगे। 2020 के सीमा विवाद के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा।
डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए ब्रिक्स समिट में क्या कोई बड़ा फैसला लिया जाएगा?
भारत इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में सम्मेलन की मेजबानी भारत की जिम्मेदारी है। यही वजह है कि वाशिंगटन की नजर भी दिल्ली पर टिकी हुई है। इसमें डर की बात है कि दिल्ली में ईरान की एंट्री और क्या यही अमेरिका की बेचैनी बढ़ा रही है। दरअसल दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाली जो ब्रिक्स समिट है पूरी दुनिया की नजर जरूर है। लेकिन सबसे ज्यादा नजर अगर किसी की है तो अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की। वजह साफ है ब्रिक्स का बढ़ता दायरा, डॉलर से दूरी की कोशिश और भारत की मेजबानी में रूस, चीन और ईरान जैसे देशों का एक मंच पर आना।
ईरान की मौजूदगी क्या अमेरिका की टेंशन को बढ़ा रही है?
हालांकि उसमें करीब 11 देश हैं। लेकिन ये जो तीन चार नाम है भारत को छोड़कर रूस, चीन, ईरान यहीं पर तो फंसी है ट्रंप की जान। ट्रंप पहले ही ब्रिक्स को लेकर कई बार नाराजगी जता चुके हैं। 100% तक टेरिफ की धमकी दे चुके हैं। दिल्ली में इस बार मंच पर ग्लोबल साउथ की बड़ी उभरती इकॉनमीज़ एक साथ होंगी। भारत इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। 12 13 सितंबर को नई दिल्ली में सम्मेलन की मेजबानी भी वो करेगा और यही वजह है कि वाशिंगटन की नजर भी दिल्ली पर टिकी हुई है। ब्रिक्स अब सिर्फ ब्राजील, रशिया, इंडिया, चाइना और साउथ अफ्रीका तक सीमित नहीं है। ईरान समेत कई देश इसका एक हिस्सा बन चुके हैं। यानी एक ऐसा मंच जिसकी आर्थिक और राजनीतिक पहुंच लगातार बढ़ती जा रही है, स्प्रेड हो रही है। विस्तार उसका हो रहा है। यही विस्तार अमेरिका के लिए चिंता का कारण है। खासकर इसलिए भी क्योंकि ब्रिक्स के भीतर कुछ देश दुनिया को मौजूदा आर्थिक व्यवस्था जो है तो कुछ देश ऐसे हैं जो उसमें व्यवस्था में बदलाव की बात करते हैं।
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भारतीय सेना और अमेरिकी सेना अपनी रक्षा साझेदारी को और मजबूत करते हुए 'एक्सरसाइज युद्ध अभ्यास 2026' का 22वां संस्करण शुरू करेंगी। जारी जानकारी के अनुसार, इस साल की ट्रेनिंग में अलास्का के फोर्ट वेनराइट में तैनात अमेरिकी सेना के 11वें एयरबोर्न डिवीजन के आर्कटिक-ट्रेन्ड सैनिकों को भारत के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में तैनात किया जाएगा। इस एक्सरसाइज में 3rd मल्टी-डोमेन टास्क फोर्स (3MDTF) की भागीदारी से इसे और मजबूती मिलेगी, जो इस द्विपक्षीय ढांचे में एडवांस्ड लॉन्ग-रेंज प्रिसिजन फायर और इंटीग्रेटेड कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम को शामिल करेगी। यह संयुक्त एक्सरसाइज 28 सितंबर को समाप्त होगी। बताया गया है कि भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और अमेरिकी सेना प्रशांत के डिप्टी कमांडिंग जनरल लेफ्टिनेंट जनरल जोएल "जेबी" वोवेल प्रमुख ट्रेनिंग कार्यक्रमों में शामिल होंगे, जो भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी की मजबूती को दर्शाता है।
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा युद्ध अभ्यास दिखाता है कि अमेरिका-भारत रक्षा साझेदारी कितनी मजबूत हो गई है। हमारे सैनिक साथ मिलकर ट्रेनिंग कर रहे हैं, एक-दूसरे से सीख रहे हैं और ऐसा भरोसा और क्षमताएं बना रहे हैं जो हमारे दोनों देशों को और मजबूत और सुरक्षित बनाती हैं।" जहां राजदूत ने रणनीतिक संबंधों पर जोर दिया, वहीं वोवेल ने उस ऑपरेशनल पहुंच और व्यावहारिक तैयारी पर जोर दिया जो यह सालाना द्विपक्षीय अभ्यास संयुक्त सेना को देता है। वोवेल ने कहा, "युद्ध अभ्यास का मकसद भरोसा बनाना, जानकारी साझा करना और एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक के प्रति हमारी प्रतिबद्धता दिखाना है। हर साल भारतीय सेना के साथ हमारी साझेदारी मजबूत होती जा रही है और हम मिलकर किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं।
इस रिलीज़ में बताया गया है कि इस साल की एक्सरसाइज़ में 'कमांड पोस्ट एक्सरसाइज़' और 'फ़ील्ड ट्रेनिंग एक्सरसाइज़' शामिल हैं, जो आखिर में एक जॉइंट 'लाइव-फ़ायर डेमोंस्ट्रेशन' के साथ खत्म होंगी। इस इवेंट में अमेरिका और भारत के कई लंबी दूरी और सटीक निशाना लगाने वाले फ़ायर और रॉकेट सिस्टम के डिजिटल इंटीग्रेशन को दिखाया जाएगा। 'ऑपरेशन पाथवेज़' के रणनीतिक फ़्रेमवर्क के तहत काम करते हुए, यह एक्सरसाइज़ एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगी, क्योंकि इसमें भारत में पहली बार एडवांस्ड काउंटर-ड्रोन सिस्टम तैनात किए जा रहे हैं।
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