दमोह पुलिस का एक्शन, बाइक के मॉडिफाइड साइलेंसर-हूटर और प्रेशर हॉर्न पर रोड रोलर चलाकर किए नष्ट
दमोह: सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने और ध्वनि प्रदूषण पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से दमोह पुलिस द्वारा लगातार सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में पुलिस ने नियम विरुद्ध वाहनों में लगाए गए मॉडिफाइड साइलेंसर, हूटर और प्रेशर हॉर्न के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है।
बता दें कि गुरुवार को पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी के निर्देशन और मार्गदर्शन में की गई कार्रवाई के दौरान जब्त किए गए 150 से अधिक अवैध मॉडिफाइड साइलेंसर, हूटर एवं प्रेशर हॉर्न को रोड रोलर चलाकर नष्ट किया गया। पुलिस ने इस कार्यवाई के जरिए संदेश दिया कि नियमों का उल्लंघन कर वाहनों में अवैध रूप से मॉडिफाइड साइलेंसर, हूटर एवं प्रेशर हॉर्न लगाने वालों के खिलाफ सख्त एक्शन जारी रहेगा।
यातायात पुलिस ने मॉडिफाइड साइलेंसर और हूटर पर कसा शिकंजा
दरअसल, लंबे समय से बुलेट सहित दूसरी गाड़ियों में नई पीढ़ी के नौजवान आवाज बदलने और तेज करने के लिए साइलेंसर को मॉडिफाइड कर के लगा रहे है। इन साइलेंसर की आवाज इतनी तेज होती है कि लोगों के कानों में चुभती ही नहीं बल्कि ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ाती है। इसके साथ ही सरकार के आदेश के बाद भी रसूखदार लोगों की गाड़ियों पर नियमों के विरुद्ध हूटर्स लगाए गए है जिसे लेकर दमोह SP आनंद कलादगी के निर्देश पर यातायात पुलिस ने कार्रवाई को अंजाम दिया।
150 से ज्यादा मॉडिफाइड साइलेंसर जब्त कर किए गए नष्ट
बता दें कि पुलिस द्वारा कार्रवाई के दौरान 150 से अधिक मॉडिफाइड साइलेंसर, करीब दो दर्जन हूटर और 100 से ज्यादा प्रेशर हॉर्न जब्त किए गए थे। इसके बाद VIP रोड पर SP समेत पुलिस के आला अधिकारियों की मौजूदगी में जब्त किए गए साइलेंसर, हूटर और प्रेशर हॉर्न को सड़क पर रखकर उन पर रोड रोलर चलाया गया और सभी को नष्ट कर दिया गया।
इस मौके पर पुलिस अधीक्षक ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि यातायात नियमों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सीधे तौर पर स्पष्ट कहा कि नियम विरुद्ध मॉडिफिकेशन और ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले उपकरणों के खिलाफ आगे भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
लद्दाख मुद्दे पर सोनम वांगचुक की चेतावनी:कहा- सरकार से आश्वासन नहीं मिला तो 19 से 24 सितंबर तक आंदोलन करेंगे
लद्दाख के एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने लेह और कारगिल के नेताओं की बुधवार को दिल्ली में हुई बैठक पर निराशा जताई। वांगचुक ने कहा कि अगर लद्दाख के मुद्दे पर सरकार से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला तो 19 से 24 सितंबर तक फिर आंदोलन करेंगे। उन्होंने दैनिक भास्कर से कहा- हमें सरकार पर भरोसा है इसलिए हर बार सरकार के साथ बातचीत करने आते हैं। उम्मीद है कि ये भरोसा न टूटे। वांगचुक ने कहा कि दिल्ली में बैठक बहुत अच्छे माहौल में हुई लेकिन उसमें कुछ निकला नहीं। चार महीने पहले जो फैसले हुए थे, उन्हें ही दोहराया गया। कोई नया प्रस्ताव नहीं आया और लद्दाख की मांगों पर भी सरकार ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। सरकार ने स्थानीय शासन और जमीन से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव न करने का आश्वासन भी नहीं दिया। इससे पहले उन्होंने X पर लिखा- आज हमें मशहूर कॉमेडियन जसपाल भट्टी की मीटिंग्स की याद आ रही है। जैसा कि हमने अंदाजा लगाया था, 9 सितंबर को हुई यह मीटिंग लद्दाख का ध्यान 10 सितंबर से शुरू होने वाले बड़े लेह से कारगिल पदयात्रा मार्च से हटाने के लिए बस एक गुमराह करने वाली बात लग रही है। दुर्भाग्य से भरोसा कम हो रहा है और अविश्वास बढ़ रहा है। सितंबर 2025 में आंदोलन के दौरान हिंसा भड़की लद्दाख को राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर सोनम वांगचुक ने सितंबर 2025 में आंदोलन किया था। इस दौरान 24 सितंबर को लेह में हिंसा हो गई थी। इन प्रदर्शनों में 4 लोगों की मौत हो गई थी और 90 लोग घायल हुए थे। हिंसा के दो दिन बाद 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत वांगचुक को हिरासत में लिया गया था। इसके बाद उन्हें फौरन जोधपुर शिफ्ट कर दिया था। 170 दिन से वे जोधपुर जेल में थे। उन्हें 14 मार्च को रिहा किया गया था। वांगचुक का लद्दाख में जन्म, श्रीनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की वांगचुक का जन्म 1966 में लेह जिले के अल्ची के पास, लद्दाख में हुआ था। उनके गांव में स्कूल न होने के कारण 9 साल की उम्र तक उनका किसी स्कूल में दाखिला नहीं हुआ। इस दौरान उनकी मां ने उन्हें बुनियादी शिक्षा दी। 9 साल की उम्र में उन्हें श्रीनगर ले जाया गया और वहां एक स्कूल में दाखिला दिलाया गया। बाद में दिल्ली के विशेष केंद्रीय स्कूल में भी उन्होंने पढ़ाई की। फिर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी NIT, श्रीनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में BTech किया। छठी अनुसूची की मांग का उद्देश्य लद्दाख के स्थानीय लोग और नागरिक संगठन, जैसे लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस, संविधान की छठी अनुसूची को लागू करने की मांग कर रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य लद्दाख की 97% से ज्यादा जनजातीय आबादी की पहचान, उनकी अनूठी संस्कृति, भाषा और पर्यावरण को बाहरी हस्तक्षेप से बचाना है।
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