Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी पर बप्पा को भोग में लगाएं ये 5 तरह के मोदक, जानें आसान विधि
Ganesh Chaturthi 2026: इस साल गणेश चतुर्थी का त्योहार 14 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा. यानी कि अब सिर्फ कुछ ही दिनों में बप्पा का पावन पर्व शुरू हो जाएगा. गणेश चतुर्थी पर गणपति बप्पा का जन्मोत्सव मनाया जाता है. कहा जाता है भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर पार्वती माता ने उनका निर्माण किया था. भगवान गणेश का मुख्य भोग मोदक है. यह उन्हें अत्यंत प्रिय प्रसाद माना जाता है. महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी का त्योहार बहुत खास होता है. इसलिए, वहां लोग आमतौर पर पारंपरिक उगड़ीचे मोदक बनाते हैं. ये मोदक चावल के आटे, गुड़ और नारियल के बुरादे से बनाएं जाते हैं. मगर इस साल आप गणेश चतुर्थी पर कुछ अलग-अलग फ्लेवर्स के मोदक बना सकते हैं. चलिए जानते हैं कुछ टेस्टी और फ्यूजन वाले मोदक की आसान रेसिपी. आइए जानते हैं कम समय में तैयार होने वाले टेस्टी मोदक की आसान विधि.
गणेश चतुर्थी स्पेशल मोदक रेसिपी
1.पान मोदक
सामग्रियां
- खोया- 250 ग्राम
- पिसी चीनी- 100 ग्राम
- पान के पत्ते- 3-4 पीस
- गुलकंद- 2 बड़े चम्मच
- नारियल बुरादा- 2 बड़े चम्मच
- इलायची पाउडर- ½ चम्मच
- थोड़े कटे हुए ड्राई फ्रूट्स
पान मोदक की विधि
पान फ्लेवर मोदक बनाने के लिए आपको सबसे पहले पान के पत्तों को धोकर बारीक काट लेना है. पैन में खोया डालकर धीमी आंच पर हल्का भूनें. अब इसमें पिसी चीनी, पान के पत्ते और इलायची पाउडर डालकर अच्छी तरह मिलाएं. मिश्रण के गाढ़ा होने पर गैस बंद कर दें और इसे ठंडा होने के लिए रख दें. अब गुलकंद, नारियल का बुरादा और कटे हुए ड्राई फ्रूट्स को मिलाकर फिलिंग तैयार कर लें. खोये के मिश्रण की छोटी लोई लेकर उसमें गुलकंद की फिलिंग भर सकते हैं और मोदक के सांचे में दबाकर आकार दें. तैयार है स्वादिष्ट और यूनिक पान मोदक, जिसे गणेश चतुर्थी पर बप्पा को भोग लगा सकते हैं.
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2.चॉकलेट मोदक
सामग्रियां
- मिल्क चॉकलेट
- खोया
- दूध पाउडर
- कटे हुए ड्राई फ्रूट्स
चॉकलेट मोदक बनाने की रेसिपी
इस मोदक को बनाने के लिए आपको चॉकलेट को पिघलाकर अलग रखना है. इसके बाद पैन में खोया और मिल्क पाउडर डालकर उसे धीमी आंच पर भून लें. अब इस मिश्रण के ठंडा होने पर इसमें पिघली हुई चॉकलेट और ड्राई फ्रूट्स मिलाएं. अब मोदक के सांचे में मिश्रण भरकर अच्छी तरह दबाएं और 20 से 30 मिनट के लिए फ्रिज में रख दें. आसान से चॉकलेट मोदक तैयार है.
3.ड्राई फ्रूट मोदक
सामग्रियां
- काजू
- बादाम
- पिस्ता
- अखरोट
- खजूर
- देसी घी
विधि नोट करें
इसके लिए सबसे पहले आपको सभी ड्राई फ्रूट्स को हल्का भूनकर दरदरा पीस लेना चाहिए. अब खजूर को मिक्सी में पीसकर इसका पेस्ट बना लें. अब पैन में थोड़ा घी डालकर खजूर का पेस्ट भूनें और इसमें ड्राई फ्रूट्स मिलाएं. अब मोदक के मिश्रण को ठंडा करके हाथों से मोदक का आकार दें या सांचे की मदद से मोदक बना सकते हैं. ड्राई फ्रूट्स मोदक तैयार है, इन्हें बप्पा को भोग लगाएं और फिर दूसरों को बांटे.
4.केसर मावा मोदक
सामग्रियां
- मावा
- चीनी
- केसर
- इलायची
- कटे हुए पिस्ता-बादाम
केसर-मावा मोदक बनाने की विधि
केसर-मावे के मोदक बनाने के लिए आपको सबसे पहले आपको कढ़ाई में मावा डालकर धीमी आंच पर भूनना है. इसमें चीनी, केसर और इलायची डालकर अच्छी तरह मिला लें. मिश्रण गाढ़ा होने पर गैस बंद कर दें. ठंडा होने के बाद मोदक के सांचे में मिश्रण भरें और ऊपर से पिस्ता-बादाम से सजाएं. मोदक के ऊपर केसर की पत्तियां रखें.
5.नारियल-तिल मोदक
सामग्रियां
- कद्दूकस किया हुआ ताजा नारियल
- सफेद तिल
- गुड़
- इलायची
- देसी घी
नारियल-तिल मोदक बनाने की सिंपल विधि
नारियल-तिल के मोदक बनाने के लिए सबसे पहले सफेद तिल को हल्का भूनकर अलग रखें. अब पैन में थोड़ा घी डालकर नारियल भूनें और इसमें गुड़ मिलाएं. गुड़ पिघलने के बाद भुने हुए तिल और इलायची पाउडर डालकर मिश्रण तैयार कर लें. इसे थोड़ा ठंडा करके मोदक के सांचे में भरें और आकार दें.
जरूरी टिप
गणेश चतुर्थी पर भोग के लिए मोदक बनाते समय ताजी और सात्विक सामग्रियों का इस्तेमाल करें. भोग लगाने के बाद ही इनकों ग्रहण करें.
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ग्रामीण ऋण व्यवस्था में एआई का इस्तेमाल बढ़ाएगा नाबार्ड, ऑन-डिमांड किसान क्रेडिट लोन मॉडल कर रहा विकसित: चेयरमैन
मुंबई, 10 सितंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ग्रामीण वित्तीय सेवाओं को अधिक तेज, सुलभ और तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। नाबार्ड के चेयरमैन शाजी कृष्णन वी ने गुरुवार को कहा कि संस्था ऑन-डिमांड किसान क्रेडिट लोन उपलब्ध कराने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित मॉडल विकसित कर रही है, जिसका उद्देश्य किसानों और ग्रामीण परिवारों तक समय पर ऋण पहुंचाना तथा ग्रामीण वित्तीय प्रणाली को अधिक डिजिटल और प्रभावी बनाना है।
मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 के दूसरे दिन अपने संबोधन में कृष्णन ने कहा कि कृषि, मत्स्य पालन, डेयरी और अन्य संबद्ध क्षेत्रों में तेजी से डिजिटलीकरण हो रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण वितरण और वित्तीय समावेशन को मजबूत करने के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण वित्तीय संस्थान अब डिजिटल ऋण प्रक्रियाओं में अधिक सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं, ताकि किसानों को जरूरत के समय आसानी से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा विकसित की गई डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर ने ग्रामीण और शहरी भारत के बीच की दूरी कम करने की मजबूत नींव तैयार की है। कृष्णन के अनुसार, भारत की लगभग 45 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, इसलिए देश की तेज आर्थिक वृद्धि के लिए समावेशी विकास बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा, यदि भारत को तेजी से आगे बढ़ना है तो समाज के हर वर्ग का विकास जरूरी है।
नाबार्ड के चेयरमैन ने आगे कहा कि अब अगला कदम आधार जैसी पहचान प्रणालियों को आर्थिक गतिविधियों के साथ बेहतर तरीके से जोड़ना है, ताकि किसानों और ग्रामीण नागरिकों को अधिक आसानी से वित्तीय सेवाएं मिल सकें।
उन्होंने कृषि क्षेत्र के लिए विकसित किए जा रहे एग्री स्टैक की भी चर्चा की। एग्री स्टैक में पहचान संबंधी जानकारी, भूमि रिकॉर्ड और फसल संबंधी डेटा जैसे विभिन्न स्तर शामिल हैं, जो कृषि क्षेत्र के लिए मजबूत डिजिटल आधार तैयार कर रहे हैं।
कृष्णन ने कहा कि एग्री स्टैक के साथ एक सशक्त वित्तीय ढांचे की भी आवश्यकता है, ताकि सही समय और सही स्थान पर किसानों को उपयुक्त वित्तीय उत्पाद उपलब्ध कराए जा सकें।
अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि बागवानी, मत्स्य पालन और डेयरी जैसे क्षेत्रों में भी डिजिटलीकरण की गति बढ़ रही है। बागवानी क्षेत्र में जलवायु अनुकूलता और उत्पादों की ट्रेसबिलिटी यानी स्रोत की पहचान महत्वपूर्ण होती जा रही है, जबकि मत्स्य क्षेत्र में भी ट्रेसबिलिटी अब एक प्रमुख आवश्यकता बनकर उभर रही है।
हालांकि, उन्होंने माना कि ग्रामीण वित्त क्षेत्र के सामने अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं, जिनमें ऋण संवर्धन व्यवस्था, ऋण गारंटी और बीमा कवरेज से जुड़ी कमियां प्रमुख हैं। उन्होंने बताया कि भारत में अभी भी कृषि क्षेत्र में लगभग 1.3 लाख करोड़ रुपए का ऋण अंतर (क्रेडिट गैप) बना हुआ है, जिसे भरना जरूरी है।
कृष्णन ने आगे कहा कि कृषि ऋण स्वाभाविक रूप से अधिक जोखिम वाले होते हैं क्योंकि उनकी वापसी केवल उधारकर्ता की क्षमता पर नहीं, बल्कि मौसम, उत्पादन, प्राकृतिक आपदाओं और बाजार परिस्थितियों जैसे बाहरी कारकों पर भी निर्भर करती है। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कृषि क्षेत्र के गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) स्तर में कमी आई है और इसमें आगे भी सुधार की पर्याप्त गुंजाइश है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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