चांदी ₹3,307 बढ़कर ₹2.39 लाख किलो पर पहुंची:सोना ₹542 महंगा होकर 1.54 लाख का 10 ग्राम हुआ, इस साल दाम ₹21 हजार बढ़े
सोने-चांदी के दाम में आज यानी 10 सितंबर को बढ़त रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत 542 रुपए बढ़कर 1.54 लाख रुपए पर पहुंच गई है। वहीं एक किलो चांदी की कीमत आज 3,307 रुपए बढ़कर 2.39 लाख रुपए हो गई है। इस साल सोना ₹21 हजार महंगा हो चुका इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 20 हजार रुपए महंगा हो चुका है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए पर था, जो अब 1.54 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं चांदी 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.39 लाख रुपए पर पहुंच गई है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। दिसंबर तक सोना 1.70 लाख और चांदी 3 लाख रुपए तक पहुंच सकती है कोटक सिक्युरिटीज के सीनियर वीपी एंड कमोडिटी रिसर्च हेड अनिंद्य बनर्जी कहते हैं कि सोने को आम निवेशकों के साथ ही दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों जैसे आरबीआई का भी सपोर्ट हासिल है, जो लगातार सोना खरीद रहे हैं। आगे मुश्किल हालात में भी सोने में तेजी बनी रहेगी। यदि हालात सुधरे तो चांदी में भी उछाल दिख सकता है। अभी जो भावी हालात नजर आ रहे हैं, उसके मुताबिक दिसंबर तक सोने की कीमत 1.70 लाख रुपए तक पहुंच सकती है। चांदी की कीमत भी 3 लाख रुपए तक जा सकती है। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 3 बातों का रखें ध्यान
2027 चुनाव से पहले बीजेपी में बड़ा फेरबदल, सात मोर्चों की कमान नए हाथों में सौंपी
बीजेपी ने संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए अपने सभी प्रमुख मोर्चों के प्रभारियों के नाम तय कर दिए हैं. पार्टी ने यह कदम 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए उठाया है. बता दें सबसे ज्यादा चर्चा युवा मोर्चा को लेकर है, जिसकी जिम्मेदारी सांसद हरीश द्विवेदी को दी गई है. हालांकि पार्टी ने अभी इसकी आधारिक घोषणा नहीं की है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक युवा वर्ग में पार्टी की पकड़ मजबूत करने के लिए हरिश की यह नियुक्ति अहम मानी जा रही है.
किस नेता को मिली किस मोर्चे की जिम्मेदारी?
सूत्रों के मुताबिक पार्टी ने कुल सात मोर्चों के लिए प्रभारी तय किए हैं. बताया जा रहा है कि युवा मोर्चा की कमान हरीश द्विवेदी को सौंपी गई है, जबकि महिला मोर्चा की जिम्मेदारी वरिष्ठ नेता डी. पुरंदेश्वरी को दी गई है. इसी तरह एससी मोर्चा के लिए संजय भाटिया को प्रभारी बनाए जाने की चर्चा है. तो ओबीसी मोर्चा की बागडोर वैजयंत पांडा के हाथ में रहने की खबर है. इसी तरह किसान मोर्चा का जिम्मा लाल सिंह आर्या को दिया जा रहा है. इसके अलावा एसटी मोर्चा के प्रभारी सतीश पूनिया के बनाए जाने की खबर है, वहीं अल्पसंख्यक मोर्चा की जिम्मेदारी गजेंद्र पटेल को सौंपी गई है.
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री @NitinNabin ने आज हल्द्वानी, उत्तराखंड के प्रसिद्ध महालक्ष्मी मंदिर में पूजा-अर्चना कर माता का आशीर्वाद प्राप्त किया। ????
— BJP (@BJP4India) September 10, 2026
इस अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री श्री @pushkardhami एवं पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता भी उपस्थित रहे। pic.twitter.com/nc4Jei1eUr
बीजेपी में यह फेरबदल अभी क्यों किया गया?
बता दें पार्टी संगठन में यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब कई राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. बताया जा रहा है कि इन मोर्चा प्रभारियों की नियुक्ति के जरिए पार्टी अलग-अलग सामाजिक वर्गों तक अपनी पहुंच मजबूत करने की कोशिश में जुटी है. बीजेपी ने अपनी नई नियुक्तिओं में युवा, महिला, किसान, दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग से जुड़े ये सातों मोर्चे पार्टी के जमीनी संगठन की रीढ़ माने जाते हैं, इसलिए इनकी कमान सौंपते वक्त अनुभव और सामाजिक समीकरण दोनों का ध्यान रखा गया है.
हमारी विरासत और संस्कृति पूरी दुनिया में स्थापित है। अगर कोई भारतीय संस्कृति की छाप देखना चाहता है, तो उसे इस देवभूमि को देखना चाहिए।
— BJP (@BJP4India) September 10, 2026
ये पवित्र भूमि इसी प्रकार ऊर्जावान रहे, ऐसी मेरी कामना है, ये शहीदों की भूमि है, हमारे शहीदों का पराक्रम इस भूमि के तेज से हमेशा दिखता है।
हम… pic.twitter.com/19FY9zDToO
बीजेपी में मोर्चा प्रभारी की भूमिका क्या होती है?
बीजेपी में मोर्चा प्रभारी उस वर्ग विशेष से जुड़े संगठन की गतिविधियों की निगरानी करते हैं. वह राज्य इकाइयों के साथ तालमेल बिठाते हैं और पार्टी की योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने का काम देखते हैं. राजनीतिक जानकारों की मानें तो चुनाव के दौरान इन मोर्चों की भूमिका और बड़ी हो जाती है क्योंकि यही मोर्चे बूथ स्तर तक पार्टी का संदेश पहुंचाते हैं.
UP Election 2027: BJP का 100+ विधायकों के टिकट काटने का प्लान! अखिलेश के PDA दांव से मुकाबला...
2027 चुनाव से पहले बीजेपी में बड़ा फेरबदल
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इन नियुक्तियों के बाद अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि नए प्रभारी अपने-अपने मोर्चों में किस तरह की रणनीति अपनाते हैं. खासकर युवा और महिला मोर्चा को लेकर पार्टी काफी सक्रियता दिखा सकती है क्योंकि आने वाले चुनावों में इन दोनों वर्गों का वोट निर्णायक भूमिका निभा सकता है.
ये भी जानें, नितिन नबीन की नई टीम का यूपी चुनाव पर क्या असर?
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी संगठन को चुनावी जरूरतों के हिसाब से मजबूत करने की तैयारी में जुटी है. पार्टी के प्रदेश प्रभारी नितिन नबीन की अपनी नई टीम में संगठन के अनुभवी नेताओं के साथ ऐसे चेहरों को भी जगह देने पर काम कर रहे हैं जिनकी पकड़ अलग-अलग सामाजिक वर्गों और क्षेत्रों में मजबूत है. इसके अलावा बता दें नई टीम के जरिए पार्टी का लक्ष्य संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाना, बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना और चुनावी रणनीति को तेजी से जमीन पर उतारना है.
2027 में बीजेपी को लगातार तीसरी बार सत्ता तक पहुंचाने की चुनौती
नितिन नबीन की टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती 2027 में बीजेपी को लगातार तीसरी बार सत्ता तक पहुंचाने की है. इसके लिए पार्टी संगठन में समन्वय, कार्यकर्ता प्रबंधन, जातीय समीकरण और उम्मीदवार चयन जैसे मुद्दों पर खास फोकस कर रही है. नई टीम को सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने के साथ-साथ कमजोर सीटों पर संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी भी दी जा रही है. ऐसे में नबीन की नई टीम आने वाले महीनों में बीजेपी की चुनावी तैयारियों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी.
UP Election 2027: वाराणसी की की 8 सीटों पर बिछी चुनावी बिसात...
UP Election 2027: आगरा की 9 सीटों...
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation






