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Mumbai-Goa Project में देरी पर Nitin Gadkari शर्मिंदा, बोले- उद्घाटन में नहीं आऊंगा!

मुंबई-गोवा हाईवे को चौड़ा करने का काम बहुत धीमी गति से चल रहा है, जिसे देखते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने चेतावनी दी है कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में देरी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अपनी चेतावनी पर अमल करते हुए, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री ने घोषणा की कि वे अक्टूबर में मुंबई-गोवा सड़क निर्माण कार्य का पूरा निरीक्षण करेंगे। इसके अलावा, गडकरी ने ठेकेदारों को एक कड़ा संदेश दिया: वे इस प्रोजेक्ट के उद्घाटन समारोह में शामिल नहीं होंगे।
 

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गोवा की राजधानी पणजी के पास पोरवोरिम में छह-लेन वाले एलिवेटेड रोड कॉरिडोर का उद्घाटन करने के बाद गडकरी ने कहा कि मैंने घोषणा की थी कि मैं मुंबई-गोवा हाईवे के उद्घाटन के लिए नहीं आऊंगा क्योंकि मुझे इस बात पर शर्मिंदगी महसूस हो रही थी कि इसमें इतनी देरी हो गई है। यह हाईवे महाराष्ट्र के तटीय कोंकण इलाके से होकर गुज़रता है। उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा कि मैं अक्टूबर में मुंबई एयरपोर्ट पहुँचूँगा और सड़क मार्ग से गोवा जाऊँगा ताकि खुद हाईवे का निरीक्षण कर सकूँ और यह देख सकूँ कि यात्रियों के लिए यात्रा सुविधाजनक हुई है या नहीं। इस कार्यक्रम में गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, केंद्रीय मंत्री श्रीपद नाइक, राज्य के लोक निर्माण विभाग के मंत्री दिगंबर कामत और पर्यटन मंत्री रोहन खौंटे शामिल हुए।

गडकरी ने कहा कि साथ ही, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में देरी और खराब काम के लिए ज़िम्मेदार ठेकेदारों और अधिकारियों के खिलाफ़ सख़्त कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि अब मैं एक साल के अंदर सबसे ज़्यादा ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने और उनके खिलाफ़ कार्रवाई करने, साथ ही अधिकारियों को सस्पेंड करने का रिकॉर्ड बनाना चाहता हूँ। मैं अब ऐसा करना बंद नहीं करने वाला हूँ। अप्रैल 2015 में, गडकरी ने कहा था कि लंबे समय से अटके मुंबई-गोवा हाईवे का काम उस साल जून तक पूरा होने की उम्मीद है। इस हाईवे से रोज़ाना सफ़र करने वालों और कोंकण जाने वाले यात्रियों को राहत मिलेगी, जिन्हें सालों से गड्ढों वाली सड़कों से गुज़रना पड़ा है।
 

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गडकरी ने ज़मीन अधिग्रहण से जुड़े कानूनी विवादों और अंदरूनी झगड़ों को देरी की मुख्य वजह बताया था। एक और चुनौती निचले इलाकों में पानी का जमाव रही है, खासकर मॉनसून के दौरान, जिससे निर्माण कार्य और सड़क के इस्तेमाल पर असर पड़ा। हालांकि, गडकरी ने कहा था कि ये समस्याएं सीमित दायरे तक ही थीं। इस साल मार्च में, उन्होंने बताया था कि वन विभाग से मंज़ूरी न मिलने के कारण हाईवे के कुछ हिस्सों पर काम में देरी हुई है। केंद्रीय मंत्री ने कहा था कि कुछ हिस्से ऐसे हैं जहां सड़कें अधूरी हैं क्योंकि वे वन क्षेत्रों से होकर गुज़रती हैं। हम सीधे तौर पर स्पष्टीकरण ले रहे हैं और संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर इन मुद्दों को सुलझा रहे हैं।
 
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Balaghat में 30 से अधिक बच्चों की मौत पर High Court सख्त, सरकार से मांगा जवाब

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य के बालाघाट जिले में संक्रामक बीमारियों से 30 से अधिक बच्चों की मौत के मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया तथा न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने सुनवाई के बाद राज्य सरकार के स्वास्थ विभाग, महिला एव बाल विकास विभाग और बालाघाट के जिलाधिकारी कलेक्टर सहित सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। गौरतलब है कि नरसिंहपुर जिले के निवासी अंशुल तिवारी ने समाचार पत्रों में प्रकशित खबरों के आधार पर बालाघाट में संक्रामक बीमारियों के कारण 30 से अधिक बच्चों की मौत के संबंध में जनहित याचिका दायर की थी।

याचिका में कहा गया था कि बच्चों को पर्याप्त उपचार नही मिल रहा है और 50 बिस्तरों की क्षमता वाले अस्पताल में करीब 400 बच्चों का इलाज किया जा रहा है। पिछले दिनों खंडपीठ ने याचिका की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए अपने आदेश में कहा था कि महज समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के आधार पर जनहित याचिका दाखिल करना उचित नहीं है। खंडपीठ ने कहा कि ऐसे गंभीर मामले में पहले मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का पता लगाना आवश्यक है।

इसके बाद अदालत ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया था कि वह बालाघाट के प्रभावित क्षेत्रों में जाकर वास्तविक स्थिति का प्रत्यक्ष जायजा लें, तथ्यों की पड़ताल करें और अपनी रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करें। अधिवक्ता अभिषेक पांडे और अधिवक्ता अतुल शुक्ला ने बुधवार को सुनवाई के दौरान खंडपीठ को बताया कि अदालत के आदेश पर याचिकाकर्ता ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया था। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से तैयार की गयी रिपोर्ट भी हलफनामे के साथ खंडपीठ के समक्ष पेश की गई।

याचिकाकर्ता ने रिपोर्ट में दावा किया कि प्रभावित क्षेत्र में लगे हैंडपंप से पीला पानी आ रहा है, बच्चों तथा महिलाओं को कई महीनों से समय पर पोषक आहार नही दिया जा रहा है और क्षेत्र में व्यापक स्तर पर गंदगी थी। रिपोर्ट में कहा गया है इन्हीं कारणों से संक्रमण फैल रहा है और बीमारियों से बच्चों की मौत का सिलसिला जारी है। रिपोर्ट में कहा गया कि 30 से अधिक मौतों के बाद अब जाकर प्रशासन जागा है और अस्पतालों में बिस्तर की संख्या बढाई गई है तथा क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं सुधारी गईं एवं साफ-सफाई की व्यवस्था की गई है।

रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका पर अगली सुनवाई 18 सितम्बर को निर्धारित की गई है।

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  Sports

इधर ब्रिक्स उधर IND vs AFG T20I, दिल्ली में ट्रैफिक का डबल झटका, इन रास्तों से दूर ही रहें आप

india vs afghanistan t20i delhi traffic advisory: भारत और अफगानिस्तान के बीच रविवार को होने वाले टी20 क्रिकेट मैच के कारण अरुण जेटली स्टेडियम और उसके आसपास यातायात पाबंदियां लगाई जाएंगी और मार्ग परिवर्तित किया जाएगा. दिल्ली यातायात पुलिस ने यह जानकारी दी. मैच 13 सितंबर को शाम सात बजे से रात 11.30 बजे तक खेला जाएगा. Sat, 12 Sep 2026 18:21:00 +0530

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BRICS 2026 | Rashtravad: एक मंच पर Modi-Putin-Jinping फिर कांग्रेस प्रवक्ता को क्यों लगी मिर्ची ? #tmktech #vivo #v29pro
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