मेमोरी की बढ़ती लागत के चलते एप्पल ने भारत में आईफोन की कीमतों को 40 प्रतिशत तक बढ़ाया
नई दिल्ली, 10 सितंबर (आईएएनएस)। एप्पल ने भारत में अपने आईफोन लाइनअप की कीमतों में 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है। इसकी वजह मेमोरी की बढ़ती लागत है। वहीं, कंपनी ने अपने स्मार्टफोन की नई पीढ़ी लॉन्च करने के साथ आईफोन डुओ के साथ फोल्डेबल सेगमेंट में भी प्रवेश किया है, जिसकी कीमत 2.99 लाख रुपए निर्धारित की गई है।
एप्पल ने आईफोन 17 के 256जीबी वेरिएंट की कीमत को 82,900 रुपए से बढ़ाकर 99,900 रुपए कर दिया है, जो कीमत में 17,000 रुपए या 20.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है। वहीं, 512जीबी वेरिएंट की कीमत 1,24,900 रुपए हो गई है, जो पहले 1,02,900 रुपए थी। इससे कीमत में 22,000 रुपए या 21.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
आईफोन 18 प्रो की शुरुआती कीमत 1,64,900 रुपए है, जो आईफोन 17 प्रो की तुलना में 22 प्रतिशत अधिक है। वहीं, आईफोन 18 प्रो मैक्स की शुरुआती कीमत 1,79,900 रुपए है, जो 20 प्रतिशत अधिक है।
इसके अलावा, सबसे बड़ी बढ़ोतरी 1टीबी वाले आईफोन एयर की कीमत में हुई है। इसकी कीमत 40.6 प्रतिशत बढ़कर 2,24,900 रुपए हो गई है, जो पहले 1,59,900 रुपए थी।
आईफोन एयर के 256जीबी और 512जीबी वेरिएंट भी 25 प्रतिशत महंगे हो गए हैं।
इसके अलावा, आईफोन 17ई की शुरुआती कीमत अब 79,900 रुपए है, जो 23.1 प्रतिशत अधिक है। वहीं, 128जीबी वाले आईफोन 16 की कीमत 28.6 प्रतिशत बढ़कर 89,900 रुपए हो गई है।
भारत में एप्पल के प्रो मॉडल्स की कीमतों में हुई बढ़ोतरी कई प्रमुख बाजारों की तुलना में काफी अधिक है। अमेरिका में आईफोन 18 प्रो और प्रो मैक्स की कीमतों में क्रमशः 9 प्रतिशत और 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
काउंटरपॉइंट रिसर्च के रिसर्च डायरेक्टर तरुण पाठक के अनुसार, भारत में आईफोन की कीमतें 20–30 प्रतिशत बढ़ी हैं, जो 8–10 प्रतिशत के वैश्विक औसत से काफी अधिक है।
उन्होंने कीमतों में इस बढ़ोतरी के लिए मेमोरी की लागत, रुपए की कमजोरी और घरेलू उत्पादन की बढ़ी हुई लागत को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि आईफोन डुओ पर 20 प्रतिशत तक का आयात शुल्क लग सकता है, क्योंकि इसका स्थानीय स्तर पर असेंबल नहीं किया जाता है।
साइबरमीडिया रिसर्च के इंडस्ट्री इंटेलिजेंस ग्रुप के प्रमुख प्रभु राम ने कहा कि 2,99,900 रुपए की कीमत वाला आईफोन डुओ प्रो सीरीज से ऊपर एक अल्ट्रा-प्रीमियम श्रेणी स्थापित करता है। उनके अनुसार, निकट अवधि में यह बड़े पैमाने पर बिक्री बढ़ाने वाले उत्पाद के बजाय मुख्य रूप से ब्रांड की प्रतिष्ठा बढ़ाने वाले उत्पाद के रूप में काम कर सकता है।
राम ने कहा कि फाइनेंसिंग विकल्प प्रो मैक्स यूजर्स को आकर्षित करने में मदद कर सकते हैं, जबकि निकट अवधि में आईफोन डुओ की शिपमेंट सीमित और सप्लाई की कमी से प्रभावित रहने की संभावना है। उन्होंने कहा कि फिलहाल फोल्डेबल स्मार्टफोन कुल स्मार्टफोन शिपमेंट का 1 प्रतिशत से भी कम हैं, लेकिन एप्पल के इस सेगमेंट में प्रवेश से इसके विकास को गति मिल सकती है।
--आईएएनएस
एबीएस
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BRICS मेहमानों के लिए दिल्ली में लग्जरी कारों की भारी डिमांड, दूसरे राज्यों से मंगाई जा रहीं 500 गाड़ियां
BRICS Summit 2026: दिल्ली में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन होने जा रहा है. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारियों के बीच विदेशी मेहमानों के लिए लग्जरी वाहनों की मांग अचानक काफी बढ़ गई है. राष्ट्राध्यक्षों, राजनयिकों और विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के आने-जाने के लिए मर्सिडीज-बेंज, बीएमडब्ल्यू, ऑडी, रेंज रोवर और रोल्स-रॉयस जैसी गाड़ियों की बड़े पैमाने पर जरूरत पड़ रही है. दिल्ली में पर्याप्त संख्या में ऐसी व्यावसायिक गाड़ियां उपलब्ध नहीं होने के कारण अब दूसरे शहरों से वाहन मंगाए जा रहे हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टूर एंड ट्रैवल क्षेत्र से जुड़े लोगों के पता चला कि ब्रिक्स सम्मेलन के लिए लग्जरी वाहनों की मांग 500 से ज्यादा पहुंच गई है. इसमें सुपर-लग्जरी कारों के साथ इनोवा क्रिस्टा और फॉर्च्यूनर जैसी गाड़ियों की भी बड़ी संख्या में जरूरत है. अलग-अलग दूतावासों के माध्यम से वाहन उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है. एक दूतावास से करीब पांच से 10 लग्जरी वाहनों की मांग आ रही है.
दिल्ली से पूरी नहीं हो रही जरूरत
इंडियन टूरिस्ट ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश सेहरावत के अनुसार, सम्मेलन के लिए आई भारी मांग को पूरा करने में दिल्ली का मौजूदा लग्जरी टैक्सी बेड़ा पर्याप्त नहीं है. यही वजह है कि टूर ऑपरेटर अब आगरा, जयपुर, चंडीगढ़ और देहरादून जैसे शहरों से गाड़ियां दिल्ली ला रहे हैं. इन शहरों में उपलब्ध हाई-एंड वाहनों को सम्मेलन के दौरान विदेशी मेहमानों और उनके काफिलों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. इनमें रोल्स-रॉयस, रेंज रोवर और मर्सिडीज की महंगी सीरीज की गाड़ियां भी शामिल हैं.
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80 किमी की सीमा बनी बड़ी वजह
दिल्ली में लग्जरी टैक्सियों की उपलब्धता कम होने की एक बड़ी वजह व्यावसायिक वाहनों पर लागू गति सीमा भी बताई जा रही है. सेहरावत के मुताबिक, दिल्ली में कमर्शियल टैक्सी और कैब में स्पीड गवर्नर लगाना अनिवार्य है. इससे इन वाहनों की अधिकतम गति 80 किलोमीटर प्रति घंटा तक सीमित हो जाती है.
वहीं, वीवीआईपी और राष्ट्राध्यक्षों के सुरक्षा काफिले के लिए अलग तरह की परिवहन व्यवस्था की जरूरत होती है. सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार काफिलों को कई मौकों पर तेज गति से भी आगे बढ़ना पड़ सकता है. ऐसे में दिल्ली में पंजीकृत कुछ लग्जरी टैक्सियां इन जरूरतों के अनुरूप नहीं बैठतीं. इसके अलावा सुपर-लग्जरी वाहनों के व्यावसायिक पंजीकरण से जुड़ी तकनीकी और प्रशासनिक शर्तें भी राजधानी में इनकी संख्या सीमित करती हैं.
पड़ोसी राज्यों के ऑपरेटरों की बढ़ी भूमिका
मांग बढ़ने के बाद दिल्ली के टूर एंड ट्रैवल ऑपरेटरों ने आसपास के प्रमुख शहरों में संपर्क बढ़ा दिया है. आगरा, जयपुर, चंडीगढ़ और देहरादून से लग्जरी वाहनों की बुकिंग की जा रही है. इससे सम्मेलन के दौरान वाहनों की जरूरत पूरी करने में दूसरे शहरों की कंपनियों और ऑपरेटरों की भूमिका भी बढ़ गई है. ऑपरेटरों के मुताबिक, विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के लिए समय पर वाहनों की व्यवस्था करना प्राथमिकता है. इसलिए सम्मेलन से पहले ही गाड़ियों और चालकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है.
चालकों का भी होगा सख्त सत्यापन
विदेशी मेहमानों की सुरक्षा को देखते हुए सिर्फ वाहन उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है. गाड़ियों के साथ उनके चालकों का भी पुलिस सत्यापन किया जा रहा है. सुरक्षा एजेंसियां वाहन और चालक से जुड़ी जानकारी की जांच के बाद ही उन्हें वीवीआईपी ड्यूटी में लगाएंगी. चालकों को भी विशेष निर्देश दिए गए हैं. उन्हें विदेशी प्रतिनिधियों से अनावश्यक बातचीत नहीं करने और किसी भी जरूरी जानकारी या समस्या के लिए सीधे संबंधित कोऑर्डिनेटर से संपर्क करने को कहा गया है.
इस तरह ब्रिक्स सम्मेलन ने दिल्ली के परिवहन और टूरिज्म सेक्टर के सामने बड़ी मांग खड़ी कर दी है. राजधानी में उपलब्ध संसाधनों के साथ अब आसपास के शहरों से लग्जरी वाहनों को जोड़कर विदेशी मेहमानों के लिए परिवहन व्यवस्था तैयार की जा रही है.
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