बसपा में आकाश आनंद का रास्ता साफ, ससुर अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से लिया संन्यास, मायावती के लिए लिखी ये बात
Ashok Siddharth Renunciation: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में बड़ी हलचल हुई है. कई दिनों से आकाश आनंद और उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ को लेकर विवाद चल रहा था. अब अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने का एलान कर दिया है. अशोक सिद्धार्थ ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी शेयर की.
बसपा के पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान किया है. वह बसपा नेता आकाश आनंद के ससुर भी हैं. अशोक सिद्धार्थ का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब एक दिन पहले ही बुधवार को बसपा प्रमुख मायावती ने आकाश आनंद को लेकर उन्हें राजनीति से दूर रहने की नसीहत दी थी. संन्यास का ऐलान करते हुए अशोक सिद्धार्थ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मायावती को लेकर एक लंबी पोस्ट भी लिखी. उनके इस फैसले को बसपा में आकाश आनंद की आगे की भूमिका से जोड़कर देखा जा रहा है.
परम आदरणीय बहन जी सादर चरण स्पर्श!
— Ashok Siddharth BSP (@MP_SiddharthBSP) September 10, 2026
माननीया बहन जी आपको अवगत कराना है कि, मेरे लिए आपका आदेश दुनिया की किसी भी चीज़ से बढ़ कर है। आपके आदेश के आगे मेरे रिश्ते नाते, परिवार सभी बेहद छोटे हैं। आपके मार्गदर्शन में, मैं बीते पैंतीस वर्षों से बीएसपी और मान्यवार साहेब श्री…
मायावती के लिए लिखी पोस्ट
अशोक सिद्धार्थ ने एक्स पर लंबी पोस्ट लिखी. इसमें उन्होंने मायावती को संबोधित करते हुए लिखा कि माननीया बहन जी आपको अवगत कराना है कि मेरे लिए आपका आदेश दुनिया की किसी भी चीज से बढ़ कर है. आपके आदेश के आगे मेरे रिश्ते नाते, परिवार सभी बेहद छोटे हैं. आपके मार्गदर्शन में, मैं बीते पैंतीस वर्षों से बीएसपी और मान्यवार साहेब श्री कांशीराम जी और बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर के मिशन के लिए समर्पित रहा हूं.
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सिद्धार्थ ने आगे लिखा कि आपने आज तक जो भी जिम्मेदारी दी है उसे अपने पूरे सामर्थ्य के साथ निभाने की कोशिश की है. आप मेरी राजनैतिक गुरू हैं, मेरी बड़ी बहन हैं, आपने मुझ जैसे अदने से व्यक्ति को क्या कुछ नहीं दिया, आपकी वजह से ही मैं विधान परिषद और राज्य सभा तक का सदस्य रहा हूं. आपने मुझे इस लायक समझा कि आपने मुझ जैसे मामूली से कार्यकर्ता को अपने परिवार का सदस्य बनाया. ये आपका ऋण है, जो मैं इस जीवन में चुका भी नहीं सकता.
3 सितंबर को पद से मायावती ने हटाया था, रखी थी ये शर्त
बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती ने हाल ही में 3 सितम्बर 2026 को एक राष्ट्रीय बैठक के दौरान आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक (National Convener) के पद से हटा दिया था. मायावती ने उन्हें एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में काम करने का निर्देश दिया है. साथ ही वापसी के लिए मायावती की शर्त रखी थी. मायावती ने 9 सितम्बर 2026 को साफ संदेश दिया कि आकाश आनंद की पार्टी के नेतृत्व में वापसी तभी संभव है, जब उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ पूरी तरह से राजनीति से संन्यास ले लें और अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं छोड़ दें. तभी आकाश आनंद बिना किसी बाहरी दबाव के स्वतंत्र रूप से काम कर सकेंगे.
आकाश आनंद विवाद पर रखा अपना पक्ष
पोस्ट में अशोक सिद्धार्थ ने आकाश आनंद पर बात की. मायावती को संबोधित करते हुए लिखा कि आदरणीय बहन जी, माननीय आकाश जी को सलाह देना तो दूर बीते कई महीनों से मेरी उनसे मुलाकात भी कुछ एक अवसर पर तब हुई जब उनके कार्यक्रम उन राज्यों में लगे जिनकी जिम्मेदारी आपने मुझे दी हुई थी. बहन जी हमारी पार्टी के ही कुछ साथी मुझे आपसे मिले सम्मान के कारण मुझ पर ये आरोप लगाते हैं कि मैं पार्टी पर कब्जा करना चाहता हूं, मैं माननीय आकाश आनंद जी को गुमराह करने की कोशिश कर रहा हूं. इसमें लेशमात्र भी सच्चायी नहीं है. आदरणीय बहन जी मैं आपसे विनम्र निवेदन के साथ कहा रहा हूं कि ये मेरे राजनैतिक विरोधियों की साजिश है ,जो पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं, जिसकी सच्चाई एक न एक दिन आपके सामने जरूर आ जाएगी.
आकाश के लिए साफ किया रास्ता
सिद्धार्थ ने अपनी पोस्ट में दामाद आकाश आनंद के लिए रास्ता साफ करने का प्रयास किया है, सिद्धार्थ ने लिखा कि आदरणीय बहन जी, मेरी आपसे हाथ जोड़ कर विनती है कि मेरे सन्यास लेने को आप आकाश की वापसी से मत जोड़िए. आकाश आनंद मेरे दामाद से पहले आपके भतीजे हैं, और आदरणीय आनंद भाईसाहब के बेटे हैं. उनके अंदर आपका खून बहता है, उन्होने जीवन के दो दशक आपकी छत्र छाया और देख-रेख में बिताए हैं, मेरे जैसा मामूली सा कार्यकर्ता भला उनको क्या ही गुमराह कर पाएगा. कहा कि उनका अच्छा-बुरा आप किसी और से ज्यादा बेहतर समझती हैं, उनको वापस जिम्मेदारी देना या ना देना ये आपका फैसला है. इसे मेरे सन्यास लेने से जोड़ कर आप मुझ जैसे मामूली कार्यकर्ता को उसकी हैसियत से ज्यादा महत्त्व दे रही हैं.
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डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने की भारत के स्वास्थ्य मॉडल की तारीफ, बोले-आशा कार्यकर्ता इन सेवाओं की मजबूत कड़ी
दिली (तिमोर-लेस्ते), 10 सितंबर (आईएएनएस)। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय प्रगति की सराहना की है। उन्होंने खास तौर पर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार और गैर-संचारी रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए किए जा रहे प्रयासों की तारीफ की।
टेड्रोस ने एशियाई देश तिमोर-लेस्ते की राजधानी दिली में आयोजित डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय समिति के 79वें सत्र के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत की स्वास्थ्य क्षेत्र की उपलब्धियों और डब्ल्यूएचओ के साथ उसके जारी सहयोग पर चर्चा की।
गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर टेड्रोस ने लिखा, मैंने भारत के स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की और उन्हें देश की स्वास्थ्य सेवाओं में हुई प्रभावशाली प्रगति के लिए बधाई दी। खास तौर पर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य और गैर-संचारी रोगों के खिलाफ लड़ाई में भारत ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।
उन्होंने आयुष्मान आरोग्य मंदिर पहल की भी सराहना की, जिसके जरिए देशभर में लोगों की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं और जांच सुविधाओं तक पहुंच बढ़ी है।
टेड्रोस ने कहा कि लगभग 1.6 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से भारत हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह और आम प्रकार के कैंसर की जांच की सुविधा लोगों के घरों के करीब पहुंचा रहा है। साथ ही जिन मरीजों को आगे इलाज की जरूरत होती है, उनके लिए रेफरल की व्यवस्था भी उपलब्ध है।
डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने भारत की आशा कार्यकर्ताओं के विशाल नेटवर्क की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ये कार्यकर्ता स्वास्थ्य सेवाओं को सीधे लोगों तक पहुंचाने में, खासकर महिलाओं, माताओं और बच्चों की विभिन्न चरणों में मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
टेड्रोस ने कहा, भारत की आशा कार्यकर्ता इस बात का एक बेहतरीन उदाहरण हैं कि स्वास्थ्य सेवाएं लोगों तक उनके समुदायों में कैसे पहुंचाई जा सकती हैं। वे गर्भधारण से लेकर किशोरावस्था तक माताओं और बच्चों को सहयोग देती हैं।
उन्होंने कहा कि टीकाकरण के दायरे के विस्तार और अस्पतालों या स्वास्थ्य केंद्रों में होने वाले प्रसव की दर 78 से बढ़कर 93 प्रतिशत होने से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में लगातार सुधार देखने को मिला है।
बैठक के दौरान टेड्रोस और नड्डा ने भारत के टीबी उन्मूलन के प्रयासों पर भी चर्चा की। इस क्षेत्र में भारत व्यापक जांच, बेहतर पहचान, उपचार और जनस्वास्थ्य संबंधी कदमों के जरिए प्रयासों को तेज कर रहा है।
दोनों नेताओं ने चिकित्सा उत्पादों की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए उनके नियमन को और मजबूत बनाने के विषय पर भी विचार-विमर्श किया। इसके साथ ही डब्ल्यूएचओ के साथ वैश्विक स्वास्थ्य प्राथमिकताओं पर भारत के लगातार सहयोग की भी समीक्षा की गई।
टेड्रोस ने डब्ल्यूएचओ को भारत की ओर से दिए जा रहे महत्वपूर्ण सहयोग और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य पहलों में उसकी भूमिका की भी सराहना की। इसमें पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में सहयोग के साथ-साथ डब्ल्यूएचओ महामारी समझौते के तहत पैथोजन एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग प्रणाली पर चल रही बातचीत भी शामिल है।
टेड्रोस और नड्डा की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के देशों के स्वास्थ्य मंत्री और प्रतिनिधि दिली में क्षेत्रीय समिति के 79वें सत्र में हिस्सा लेने के लिए एकत्र हुए हैं। इस बातचीत के दौरान भारत की स्वास्थ्य क्षेत्र में हुई प्रगति, उसकी प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत व्यवस्था और वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग में उसकी भूमिका प्रमुख विषयों में शामिल रहे।
--आईएएनएस
एवाई/वीसी
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