सहारनपुर में 90 दिवसीय मौनपालन प्रशिक्षण 16 सितंबर से शुरू, युवा 10 रुपये में सीखें शहद उत्पादन, पाएं स्वरोजगार के अवसर
सहारनपुर में मौन पालन लंबे समय से किसानों और युवाओं के लिए आय का सशक्त साधन बना हुआ है. यहां की भौगोलिक परिस्थितियां और कृषि आधारित वातावरण मधुमक्खी पालन के लिए बेहद अनुकूल माने जाते हैं. यही वजह है कि जिले में शहद उत्पादन की यूनिट लगातार बढ़ रही हैं और स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं. इस मौन पालन प्रशिक्षण के लिए इच्छुक अभ्यर्थियों को केवल 10 रुपये पंजीकरण शुल्क देना होगा.
बांस से बनाते हैं 200 से ज्यादा सामान, ₹30 से ₹3,000 तक कीमत, प्रशिक्षण लेकर बदली किस्मत
Purvi Champaran Arvind Kumar Bamboo Items: बिहार के गांवों में बांस से बनने वाली पारंपरिक वस्तुओं की कला आज नए रूप में रोजगार और कमाई का जरिया बन रही है. पूर्वी चंपारण के ढाका प्रखंड के दलपत विशुनपुर गांव निवासी अरविंद कुमार ने इसी हुनर को आधुनिक डिजाइन और प्रशिक्षण के साथ आगे बढ़ाया है. कभी डगरा और झाड़ू बनाने से शुरुआत करने वाले अरविंद अब बांस और बेंत से 200 से अधिक तरह की वस्तुएं तैयार करते हैं, जिनमें पेन स्टैंड, ट्रे, चूड़ी, हेयर क्लिप, बास्केट और रिलैक्स चेयर शामिल हैं. उनके बनाए उत्पादों की कीमत 30 रुपये से लेकर 3,000 रुपये तक है और अब वे नए शिल्पकारों को प्रशिक्षण देकर इस कला को आगे बढ़ा रहे हैं.
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