Election Commission 12 सितंबर को Ritabrata Banerjee गुट के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से करेगा बैठक
नयी दिल्ली, नौ सितंबर निर्वाचन आयोग 12 सितंबर को तृणमूल कांग्रेस के ऋतब्रत बनर्जी नीत गुट के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करेगा। यह बैठक 22 जून को निर्वाचन आयोग को सौंपे गए प्रतिवेदन के संबंध में होगी, जिसमें इस गुट ने खुद को “असली” तृणमूल कांग्रेस बताते हुए पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा किया है। बुधवार को जारी एक आधिकारिक पत्र के अनुसार, यह बैठक पूर्वाह्न 11 बजे दिल्ली के द्वारका स्थित इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (आईआईआईडीईएम) में होगी।
ऋतब्रत बनर्जी को संबोधित पत्र में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस से जुड़े उनके 22 जून के पत्र का उल्लेख किया गया है। तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल, मेघालय और त्रिपुरा में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है। निर्वाचन आयोग के सचिव अश्विनी कुमार मोहल की ओर से जारी पत्र में कहा गया, ‘‘मुझे आपके 22.06.2026 के पत्र के संदर्भ में यह बताने का निर्देश दिया गया है कि आयोग ने आपके पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को 12.09.2026 (शनिवार) को पूर्वाह्न 11 बजे बैठक के लिए समय देने का निर्णय लिया है।’’ यह घटनाक्रम तृणमूल कांग्रेस में ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के उभरने के बाद से चल रहे लंबे संगठनात्मक विवाद के बीच आया है।
ऋतब्रत गुट ने जून में निर्वाचन आयोग का रुख करते हुए दावा किया था कि उन्हें तृणमूल के अधिकतर विधायकों का समर्थन हासिल है और वह ‘असली’ तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस गुट ने अपने संगठनात्मक अभियान से जुड़े दस्तावेज भी आयोग को सौंपे थे। इसके बाद जुलाई में ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने पूर्ण निर्वाच आयोग से मुलाकात की थी और पार्टी की संगठनात्मक संरचना, कोष तथा चुनाव चिह्न से जुड़े मुद्दे उठाए थे।
बागी गुट पहले ही यह दिखाने का प्रयास कर चुका है कि उसे पार्टी के निर्वाचित प्रतिनिधियों का पर्याप्त समर्थन प्राप्त है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल के 80 विधायकों में से 65 विधायकों ने नेता प्रतिपक्ष पद के लिए ऋतब्रत बनर्जी के दावे का समर्थन किया था और ममता बनर्जी गुट के उम्मीदवार को समर्थन नहीं दिया था।
कहीं उफनती नदी, कहीं निर्माणाधीन पुल पार करते बच्चे:स्कूल के रास्ते जान जोखिम में डालते स्कूली बच्चों के वीडियो वायरल
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्थित कोडार डैम से होकर स्कूल जाते बच्चे हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचते हैं। एक वायरल वीडियो में स्कूली बच्चे लोहार्डी स्कूल से वापिस कोडार बस्ती की तरफ आ रहे हैं। इन दिनों तेज बारिश के बीच डैम में पानी का लेवल ज्यादा है। यहां स्कूल आने - जाने का बस यही रास्ता है, जहां से गुजरकर स्कूली छात्राएं रोज जाने का मजबूर हैं। एक तरफ इन नन्हे बच्चों के हाथों में किताबें हैं, तो दूसरी तरफ रास्ते में गहरा खतरा। बच्चे स्कूल पहुंचने के लिए बांध के खतरनाक रास्ते और पानी को पार करने को मजबूर हैं। स्थानीय प्रशासन और सरकार की लगातार अनदेखी के कारण इन बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे बनी हुई है। ग्रामीणों और सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि यह लापरवाही कभी भी किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। एमपी में भी निर्माणाधीन पुल से जाते बच्चों का वीडियो वायरल इससे पहले मध्य प्रदेश के विदिशा जिले का भी एक ऐसा ही वीडियो वायरल हुआ है। तेज बहाव वाली नदी पर बने स्टॉप डैम को पार करते हुए बच्चों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो है। इसमें दिखाई दे रहा है कि बच्चे किस परेशानी के साथ स्कूल बैग हाथ में लिए स्टॉप डेम पार कर रहे हैं। वीडियो में स्कूली बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर बेतवा नदी पर बने स्टॉप डैम के संकरे पिलरों पर चलते और बीच के गैप को छलांग लगाकर पार करते दिखाई दे रहे हैं। पिछले 5 साल से इसी रास्ते से जा रहे हैं स्कूल यह वीडियो विदिशा जिले के पालोह गांव का है। वीडियो में दिख रहे बच्चे करुआ गांव के रहने वाले हैं और पालोह के हाई स्कूल में पढ़ते हैं। अगर ये बच्चे सड़क वाले रास्ते से स्कूल जाएं, तो उन्हें रोज करीब 8 से 10 किलोमीटर का सफर तय करना होगा। इसी वजह से वे रोज स्टॉप डैम पार कर स्कूल पहुंचते हैं। वे पिछले 5 साल से इसी रास्ते से स्कूल जा रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद जागा प्रशासन वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने मामले की जानकारी ली। विदिशा के एसडीएम क्षितिज शर्मा ने बताया कि बच्चों को सुरक्षित रास्ते से स्कूल आने-जाने के लिए साइकिल उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि नदी पर अस्थायी पुल बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है। साथ ही प्रभावित गांवों के पास नया स्कूल खोलने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि बच्चों को जान जोखिम में डालकर नदी पार न करना पड़े। देश भर के लोगों ने जताई चिंता वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने प्रशासन और शिक्षा विभाग से सवाल पूछने शुरू कर दिए हैं। देशभर के लोगों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। कई यूजर्स ने कहा कि अगर बच्चे इतने सालों से इसी तरह स्कूल जा रहे थे, तो कार्रवाई पहले क्यों नहीं हुई? बेरखेड़ी कलां के बच्चे उफनती नदी पार करने को मजबूर मध्य प्रदेश के सागर जिले के रहली जनपद के अंतर्गत ग्राम पंचायत बेरखेड़ी कलां (बरखेड़ा कला) से वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यहां स्कूली छात्र-छात्राएं उफनती हुई कोपरा नदी को पार कर स्कूल जाने को मजबूर हैं। कोपरा नदी पर बनी पुलिया पूरी तरह टूट चुकी है। बच्चे बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के एक-दूसरे का हाथ पकड़कर और ग्रामीणों के सहारे इस खतरनाक उफनती नदी को पार कर रहे हैं। कई बार भीगने की वजह से बीमार हो जाते हैं बच्चे मरम्मत नहीं होने से अब थोड़ी बारिश में ही नदी उफान पर आ जाती है। सुबह स्कूल जाने के समय छात्राओं को यूनिफॉर्म संभालते हुए घुटनो तक पानी में उतरना पड़ता है। जहां मिट्टी, कीचड़ और फिसलन मे स्कूली ड्रेस खराब हो जाती है। यहां फिसलन और तेज बहाव के कारण हादसे का डर बना रहता है। कई बार बच्चे देर से स्कूल पहुंचते हैं और भीगने की वजह से बीमार हो जाते हैं। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, हर साल मानसून के मौसम में बच्चों को इसी तरह जान दांव पर लगाकर पढ़ाई करने जाना पड़ता है। स्थानीय ग्रामीणों ने सरकार से लंबे समय से पुल या सुरक्षित मार्ग की मांग की है। यहां बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने के साथ-साथ दुर्घटना का भी जोखिम बना रहता है। ------------------------------------------------------------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें टीचर दो, टीचर दो-आज दो, अभी दो:इंटर लेवल में टीचर के सभी 9 पद खाली, गेस्ट और PTR टीचर के बल पर चल रही कक्षाएं नैनीताल के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज बेतालघाट में टीचर की कमी से छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। 3 सितंबर को कक्षा 10वीं, 11वीं और 12वीं की छात्राओं ने टीचर्स की पोस्टिंग की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। पूरी खबर यहां पढ़ें
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi







