Sagar Liquor Case: इरशाद वली सागर के नए IG, दिलीप कुमार ने संभागायुक्त का पद संभाला; जहरीली शराब मामले की होगी न्यायिक जांच
सागर। जहरीली शराब मामले के बाद सागर में प्रशासन और पुलिस की कमान नए अधिकारियों के हाथ में आ गई है। इरशाद वली को सागर संभाग का नया IG बनाया गया है, जबकि दिलीप कुमार ने संभागायुक्त का पद संभाल लिया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूरे मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को नई दिल्ली से सीधे सागर पहुंचकर जहरीली शराब से प्रभावित लोगों से जिला अस्पताल में मुलाकात की थी। डॉक्टरों से मरीजों की स्थिति जानने के बाद उन्होंने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इसी दौरान मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया था कि मामले में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।
जहरीली शराब मामले की होगी न्यायिक जांच
अब मुख्यमंत्री ने मामले की न्यायिक जांच कराने के आदेश दिए हैं। जांच में पूरे घटनाक्रम के साथ लापरवाही और अनियमितता के पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। मुख्यमंत्री ने जवाबदेही तय करने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
इससे पहले सागर में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कार्रवाई के लिए फ्री-हैंड देने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि जरूरत पड़ने पर अवैध गतिविधियों से जुड़े अतिक्रमण पर भी कार्रवाई की जाए। सीमावर्ती क्षेत्रों को देखते हुए पड़ोसी राज्यों के अधिकारियों से समन्वय बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
इरशाद वली को पुलिस की कमान, दिलीप कुमार संभागायुक्त
मामले के बीच सागर संभाग में दो महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर नए अधिकारी आ गए हैं। इरशाद वली अब सागर संभाग के IG होंगे। वहीं दिलीप कुमार ने सागर संभागायुक्त के रूप में पदभार संभाल लिया है।
मुख्यमंत्री ने जहरीली शराब जैसे मामलों को लेकर पूरे प्रदेश में सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि आम लोगों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
CM ने कहा था- दोबारा कोई ऐसी हिम्मत नहीं करेगा
सागर दौरे के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कड़ा संदेश देते हुए कहा था कि दोषियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई की जाएगी कि दोबारा कोई इस तरह का काम करने की हिम्मत नहीं करेगा। उन्होंने शराब से जुड़े अवैध कारोबार पर कार्रवाई के साथ प्रशासनिक जवाबदेही तय करने पर भी जोर दिया था।
युवा अन्नदूत योजना के ट्रांसपोर्टरों का भोपाल में प्रदर्शन, लंबित भुगतानों का जल्द निपटारा करने की रखी मांग
मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना के तहत खाद्यान्न परिवहन कर रहे पंजीकृत ट्रांसपोर्टर अब अपनी समस्याओं को लेकर खुलकर सामने आ गए हैं। दरअसल भोपाल में आयोजित बैठक में प्रदेशभर से आए परिवहनकर्ताओं ने कहा कि लंबे समय से भुगतान में देरी और बढ़ते खर्च के कारण उनका काम प्रभावित हो रहा है।
वहीं बैठक के बाद ट्रांसपोर्टर संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने उपमुख्यमंत्री एवं वित्त व वाणिज्यिक कर मंत्री जगदीश देवड़ा, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और विभाग के आयुक्त से मुलाकात कर अपनी मांगों का विस्तृत ज्ञापन सौंपा। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र मौर्य ने कहा कि समय पर भुगतान और परिवहन दरों में संशोधन उनकी प्रमुख मांग है।
ट्रांसपोर्टरों ने उठाए भुगतान और डीजल दरों के मुद्दे
दरअसल भोपाल में हुई बैठक में ट्रांसपोर्टरों ने कहा कि पिछले एक साल से SNS पोर्टल की तकनीकी दिक्कतों के कारण कई जिलों में दो-दो महीने का भुगतान अटका हुआ है। उनका कहना है कि समय पर राशि नहीं मिलने से वाहन मालिकों को बैंक की EMI चुकाने में परेशानी हो रही है, जबकि वाहन नियमित रूप से चलाने का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। संगठन ने यह भी बताया कि पिछले तीन वर्षों से परिवहन दरों में कोई संशोधन नहीं हुआ है। इस दौरान डीजल, टायर, बीमा और वाहन रखरखाव की लागत पहले के मुकाबले काफी बढ़ चुकी है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि मौजूदा दरों पर काम करना आर्थिक रूप से मुश्किल होता जा रहा है।
वहीं ज्ञापन में टोल भुगतान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। संगठन के मुताबिक शासन के आदेश होने के बावजूद कई परिवहनकर्ताओं को अब तक टोल का भुगतान नहीं मिला है। इसके अलावा ICDS, MDM और KKY जैसी योजनाओं के तहत किए गए परिवहन का भुगतान भी तय समय पर करने की मांग रखी गई।
रखीं ये प्रमुख मांगें
दरअसल बैठक के बाद संगठन का प्रतिनिधिमंडल सीधे शासन स्तर पर पहुंचा और अपनी समस्याओं को विस्तार से रखा। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि यदि भुगतान समय पर नहीं हुआ और बढ़ती लागत के हिसाब से दरों की समीक्षा नहीं की गई, तो परिवहन व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
ट्रांसपोर्टरों ने ज्ञापन में प्रमुख रूप से ये मांगें रखीं –
- SNS पोर्टल से जुड़े लंबित भुगतानों का जल्द निपटारा किया जाए।
- बढ़ती डीजल और रखरखाव लागत के अनुसार परिवहन दरों का पुनरीक्षण किया जाए।
- टोल भुगतान की लंबित राशि जारी की जाए।
- ICDS, MDM और KKY जैसी योजनाओं के परिवहन भुगतान समय-सीमा में किए जाएं।
- भविष्य में भुगतान प्रक्रिया को तकनीकी अड़चनों से मुक्त और नियमित बनाया जाए।
कमलेश सारडा, नीमच
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