Palghar Hospital Attack: बॉम्बे HC ने फरार आरोपियों पर पुलिस की ढिलाई को फटकारा
मुंबई, नौ सितंबर मुंबई उच्च न्यायालय ने पालघर जिले में एक निजी अस्पताल के चिकित्साकर्मियों पर हमले और तोड़फोड़ के मामले में शिवसेना कार्यकर्ताओं के खिलाफ जांच में ढिलाई को लेकर बुधवार को पुलिस को फटकार लगाई। न्यायमूर्ति ए.एस. गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की पीठ ने कहा कि पुलिस ने इस मामले में कोई जांच नहीं की है, जो ‘‘अस्वीकार्य’’ है। अदालत ने कहा कि पुलिस ने जुलाई में ठाणे ज़िले के एक सरकारी अस्पताल में चिकित्सकों पर हुए हमले की घटना से कोई सबक नहीं सीखा है; जिसमें शिवसेना के पार्षद रमेश म्हात्रे आरोपी हैं।
पीठ ने सवाल किया, ‘‘क्या पुलिस के लिए एक घटना (ठाणे अस्पताल) काफी नहीं है? क्या पुलिस ने ठाणे मामले से कोई सबक नहीं सीखा है?’’ अदालत ने कहा कि अगर पालघर पुलिस मामले की जांच करने में दिलचस्पी नहीं रखती है, तो वह मामले को मुंबई पुलिस की अपराध शाखा को सौंप देगी। पालघर के पुलिस अधीक्षक यतीश देशमुख ने उच्च न्यायालय को बताया कि प्राथमिकी में नामजद दस लोगों में से एक व्यक्ति - शिवसेना के शहर प्रमुख राहुल घरात को गिरफ़्तार कर लिया गया है और वह पुलिस हिरासत में हैं।
देशमुख ने कहा कि शेष नौ आरोपी फरार हैं। पीठ ने पूछा कि पुलिस ने आरोपियों को गिरफ़्तार करने के लिए तुरंत कदम क्यों नहीं उठाए। उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘फरार नौ आरोपियों का पता क्यों नहीं लगाया जा सका?
ऐसा लगता है कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद कोई जांच ही नहीं की गई। आपकी (पुलिस की) लापरवाही के कारण ही आरोपी फरार हैं।’’ इसने सवाल किया कि पुलिस के खिलाफ़ प्रतिकूल निष्कर्ष क्यों न निकाला जाए। अदालत ने कहा, “यह आपकी नाकामी को दिखाता है।
आपने ठाणे मामले से कोई सबक नहीं सीखा। यह मंज़ूर नहीं है। यह एक संवेदनशील मामला है जिसमें अस्पताल में तोड़फोड़ की गई, कर्मचारियों के साथ मारपीट हुई और चिकित्सकों को धमकाया गया।
पुलिस ने इस मामले में बहुत ही लापरवाही भरा रवैया अपनाया है।” इसने मामले की अगली सुनवाई के लिए बुधवार शाम का समय तय किया। पालघर के रिलीफ अस्पताल में पांच और छह सितंबर की रात कथित तौर पर शिवसेना के कई कार्यकर्ता घुस गए, जहाँ दही-हांडी समारोह में हिस्सा लेने वाले कुछ घायल ‘गोविंदा’ भर्ती थे। कार्यकर्ताओं ने अधिक पैसे वसूलने का आरोप लगाते हुए अस्पताल में कथित तौर पर तोड़फोड़ की, चिकित्सकों को धमकाया, कर्मचारियों के साथ मारपीट की और गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में भर्ती घायल लोगों को जबरदस्ती ले गए।
पीठ जुलाई में ठाणे के नगर निकाय अस्पताल में हुई मारपीट की घटना पर स्वतः संज्ञान याचिका पर सुनवाई कर रही थी कि तभी वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक मुंडार्गी ने इसे पालघर की घटना के बारे में जानकारी दी।
Supreme Court ने Rahul Gandhi मानहानि मामले में कहा- सभी के साथ होता है समान व्यवहार
नयी दिल्ली, नौ सितंबर उच्चतम न्यायालय ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि मामले की सुनवाई में देरी की शिकायत पर कहा कि ‘सभी के साथ समान व्यवहार किया जाता है’। न्यायालय ने यह टिप्पणी तब की जब मानहानि मामले में शिकायतकर्ता की ओर से पेश वकील ने दावा किया कि राहुल गांधी के खिलाफ दायर मामले को लंबे समय से शीर्ष अदालत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया गया है। उच्चतम न्यायालय राहुल गांधी की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पिछले साल 29 मई के आदेश को चुनौती दी है।
उच्च न्यायालय ने गांधी की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने अधीनस्थ अदालत के समन आदेश को चुनौती दी थी। यह मामला 2022 की उनकी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान भारतीय सेना के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा है। शीर्ष अदालत ने पिछले साल चार अगस्त को लखनऊ की अदालत में लंबित इस मामले में आगे की कार्यवाही पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी थी।
चार दिसंबर को उच्चतम न्यायालय ने गांधी की ओर से दायर अपील को स्वीकार करते हुए कहा था कि वह मामले पर विस्तार से सुनवाई करेगा। इसके बाद मामले को 22 अप्रैल के लिए सूचीबद्ध किया गया था। बुधवार को एक अन्य मानहानि मामले से जुड़ी दो अलग-अलग लंबित याचिकाओं में जल्द सुनवाई की मांग वाली अर्जियां प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध थीं।
इन दोनों याचिकाओं को इसके पहले गांधी की याचिका के साथ जोड़ दिया गया था। शिकायतकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि मामले पर सुनवाई की जाए और इसे उन दो अलग-अलग याचिकाओं से अलग किया जाए। पीठ ने भाटिया से इस संबंध में उचित आवेदन दाखिल करने को कहा।
भाटिया ने पीठ से आग्रह किया कि गांधी की याचिका पर सुनवाई के लिए कोई निश्चित तारीख तय की जाए। उन्होंने कहा, ‘‘पिछले आदेश में कहा गया है कि इसे 22 अप्रैल को सूचीबद्ध किया जाए। सिर्फ इसलिए कि एक व्यक्ति (गांधी) इसमें शामिल हैं, मामले को सूचीबद्ध नहीं किया जा रहा है।
मैं केवल इतना कह रहा हूं कि मामले की सुनवाई की जाए और इसे अलग कर दिया जाए।’’ पीठ ने कहा, ‘‘आप प्रक्रिया का पालन करें और जल्द सुनवाई के लिए अर्ज़ी दाखिल करें। सभी के साथ समान व्यवहार किया जाता है। आप अलग अर्ज़ी दाखिल करें।
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