मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला, 7 रेलवे प्रोजेक्ट्स को मिली मंजूरी, अब लेट नहीं होंगी ट्रेनें
मोदी कैबिनेट ने एक बड़ा निर्णय लिया है. अब ट्रेनों की संख्या के साथ आवागमन को बेहतर बनाने को लेकर कैबिनेट ने 4 लेन रूट बिछाने की मंजूरी दे दी है. कैबिनेट ने इसके तहत 7 नए प्रोजक्ट को हरि झंडी दिखा दी है. यह सात प्रोजेक्ट्स अलग-अलग रूटों पर काम करेंगे यानी कि सात रूटों को 4-लेन करने का किया गया है.
दिल्ली-मुंबई को फोर लेन करने की मंज की भी मंजूरी दी गई है. रेलवे का कहना है कि इन रूटों पर ज्यादा भीड़ होने के कारण इन्हें फोर-लेन किया जा रहा है. इससे यात्रियों का आवागमन तो बेहतर होगा ही. साथ ही कनेक्टिविटी ज्यादा फास्ट होगी. 4 लेन होने से ट्रेनों के लेट होने की संभावना कम हो जाएगी. साथ पहले से ज्यादा ट्रेनें चलाई जा सकती है. त्योहारों में घर जाने वाले यात्रियों के लिए भी एक बड़ी राहत होगी.
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, अगर हम सबसे अहम रेलवे कॉरिडोर पर गौर करें तो यह 11,000 किलोमीटर लंबे, 7 हाई-डेंसिटी कॉरिडोर हैं. इन हाई-डेंसिटी कॉरिडोर को 4-लेन का बनाने की तैयार है। कई दूसरे कॉरिडोर पर भी काम जारी है। आने वाले वक्त में काफी अधिक ट्रैफिक संभालेंगे.
कठुआ में एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल, लंबित मांगों पर सरकार से हस्तक्षेप की अपील
कठुआ, 9 सितंबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के कठुआ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर 72 घंटे की हड़ताल शुरू कर दी है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से सेवाएं देने के बावजूद उन्हें समय पर वेतन, नियमित इंक्रीमेंट और नौकरी की सुरक्षा जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों ने सरकार से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है।
स्टाफ नर्स भावना पठानी ने कहा कि एनएचएम के तहत कई कर्मचारी करीब 17 वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं। कर्मचारियों ने पहले भी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन किया है। 2017 के बाद अप्रैल में भी 48 घंटे की हड़ताल की गई थी। उस दौरान स्वास्थ्य मंत्री से कर्मचारियों की बातचीत हुई थी और उनकी समस्याओं पर विचार करने का आश्वासन दिया गया था। सरकार की ओर से यह कहा गया था कि एनएचएम केंद्रीय प्रायोजित योजना है और संबंधित मुद्दों का समाधान केंद्र स्तर पर होना चाहिए।
भावना ने कहा कि कर्मचारियों ने केंद्र के समक्ष भी अपनी बात रखी, जहां से उन्हें लिखित रूप में बताया गया कि यह मामला राज्य के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से कर्मचारियों की समस्याओं पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि 72 घंटे का शांतिपूर्ण प्रदर्शन मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
डॉ. नितिन शर्मा ने कहा कि एनएचएम कर्मचारी लंबे समय से लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं और अपनी पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं। कर्मचारियों को कई बार समय पर वेतन नहीं मिलता और इंक्रीमेंट भी निर्धारित समय पर नहीं लगती। कुछ कर्मचारियों को तीन-चार महीने की देरी के बाद वेतन मिलने की समस्या का सामना करना पड़ता है। उन्होंने नौकरी की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया और कहा कि कई कर्मचारी लंबे समय तक अस्थायी व्यवस्था में काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कर्मचारी स्वास्थ्य विभाग के तहत समान जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन वेतन और सुविधाओं में समानता नहीं है। कई कर्मचारियों के परिवार उनकी आय पर निर्भर हैं और वेतन में देरी से घरेलू खर्च चलाना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने सरकार से अपील की कि कर्मचारियों की आर्थिक परेशानियों और सेवा शर्तों को गंभीरता से देखा जाए।
डॉ. शर्मा ने आगे कहा कि पिछले चार-पांच महीनों में अधिकारियों और मंत्रियों के बीच कई बैठकें होने की जानकारी कर्मचारियों को दी गई, लेकिन अभी तक समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। वे काम करना चाहते हैं और स्वास्थ्य सेवाएं जारी रखना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए सरकार से समय पर वेतन, इंक्रीमेंट और सेवा सुरक्षा सहित बुनियादी सहयोग की जरूरत है।
--आईएएनएस
पीएसके
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation








