छत्तीसगढ़ कैबिनेट बैठक के अहम फैसले, मुख्यमंत्री स्टार्टअप एवं NIPUN मिशन को मंजूरी, सरकारी कर्मचारियों को भी बड़ी राहत
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज, 9 सितंबर को मंत्रालय, महानदी भवन में कैबिनेट बैठक हुई। इसमें प्रदेश के विकास, सरकारी कर्मचारियों और युवाओं के रोजगार से जुड़े अहम फैसले लिए गए। कैबिनेट बैठक में सरकार ने अन्य शासकीय सेवाओं और उच्च पदों पर आवेदन करने के लिए अधिकतम आयु सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस फैसले से स्थायी-अस्थायी शासकीय कर्मचारियों, निगम-मंडल और स्वायत्त संस्थाओं के कर्मियों, संविदाकर्मियों तथा नगर सैनिकों को 7 साल की सीधी अतिरिक्त छूट मिलेगी।
दरअसल, साय कैबिनेट बैठक में राज्य शासन के अधीन कार्यरत स्थायी और अस्थायी शासकीय सेवकों, निगम-मंडल व स्वशासी संस्थाओं के कर्मचारियों, संविदाकर्मियों तथा नगर सैनिकों को अन्य शासकीय सेवाओं और उच्च पदों के लिए आवेदन करने में बड़ी राहत देते हुए निर्धारित अधिकतम आयु सीमा 38 वर्ष से बढ़ाकर 45 वर्ष करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस निर्णय से शासकीय एवं संबद्ध संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारियों को उच्च पदों एवं अन्य सेवाओं में आगे बढ़ने के अधिक और समान अवसर प्राप्त होंगे। इस संबंध में राज्य शासन द्वारा एकीकृत स्थायी दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री स्टार्टअप एवं NIPUN मिशन को मंजूरी
- प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास, उद्यमिता और नवाचार के नए अवसर सृजित करने के लिए ‘मुख्यमंत्री स्टार्टअप एवं NIPUN मिशन’ को मंजूरी दी गई है।
- मिशन के लिए आगामी 5 वर्षों के लिए 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
- इसके अंतर्गत सभी 33 जिलों में उद्यमिता विकास केंद्र, 100 इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब और 5 इंडस्ट्री एक्सीलेंस सेंटर स्थापित किए जाएंगे।
- NIPUN JOB Engine के माध्यम से उद्योगों की जरूरत के अनुरूप कौशल विकास और औपचारिक रोजगार को बढ़ावा दिया जाएगा।
छत्तीसगढ़ निर्यात प्रोत्साहन नीति 2026-30 पर भी मुहर
- राज्य को देश के प्रमुख निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से ‘छत्तीसगढ़ निर्यात प्रोत्साहन नीति 2026-30’ को मंजूरी दी है।
- नई नीति के माध्यम से प्रदेश में मजबूत निर्यात इकोसिस्टम और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने, निर्यातकों को बेहतर बाजार पहुंच एवं व्यापार सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही कृषि एवं औद्योगिक क्षेत्रों में मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा दिया जाएगा।
- इस नीति के तहत ई-कॉमर्स, व्यापार मेलों एवं प्रदर्शनियों के माध्यम से प्रदेश के उद्यमियों और निर्यातकों की अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक सीधी पहुंच बढ़ाई जाएगी।
छत्तीसगढ़ कैबिनेट में ये भी हुए फैसले
- नवा रायपुर अटल नगर में नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (NSTI) की स्थापना के लिए भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमशीलता निदेशालय को ग्राम तेंदुवा में 10 एकड़ भूमि निःशुल्क आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। लगभग 200 करोड़ रुपए की लागत से विकसित होने वाले इस संस्थान में आधुनिक शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं छात्रावास सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यहां दीर्घकालिक पाठ्यक्रमों में प्रतिवर्ष 1,000 तथा अल्पकालीन कार्यक्रमों में 3,000 प्रशिक्षुओं को आज के उद्योगों की जरूरत के अनुरूप आधुनिक तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा सकेगा। नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना से प्रदेश के युवाओं के लिए उन्नत कौशल प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
- दुर्ग जिला न्यायालय के नवीन भवन निर्माण के लिए ग्राम तितुरडीह में बीआईटी कॉलेज के समीप 4 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके लिए भिलाई इस्पात संयंत्र के नाम दर्ज उक्त भूमि के बदले ग्राम पाहंदा, तहसील पाटन में 5.024 हेक्टेयर शासकीय भूमि भिलाई इस्पात संयंत्र को दी जाएगी। दोनों भूखंडों का वर्तमान मूल्य लगभग समान है।
मंत्रिपरिषद ने राज्य को देश के प्रमुख निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से ‘छत्तीसगढ़ निर्यात प्रोत्साहन नीति 2026-30’ को मंजूरी दी है।
नई नीति के माध्यम से प्रदेश में मजबूत निर्यात इकोसिस्टम और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने, निर्यातकों को बेहतर बाजार… pic.twitter.com/TTpHJqOqpb
— CMO Chhattisgarh (@ChhattisgarhCMO) September 9, 2026
नीमच में हायर सेकेंडरी मैदान बचाने के लिए छात्रों का अनूठा मौन प्रदर्शन, मुंह पर काली पट्टी बांधकर जताया विरोध
नीमच शहर के हायर सेकेंडरी मैदान को बचाने की चल रही मुहिम के तहत मंगलवार को एक अनोखा और मार्मिक दृश्य देखने को मिला। रोजाना मैदान पर खेल अभ्यास करने वाले बच्चों ने मुंह पर काली पट्टी बांधकर मूकबधिर छात्रावास के सामने सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया। सरकार से मैदान को बचाने की मांग की। का यह मौन प्रदर्शन शहर में चर्चा का विषय बन गया है।
मूक बधिर छात्रावास के सामने कतारबद्ध खड़े होकर छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि, “छात्रावास के बच्चों को कुदरत ने मूक बधिर बनाया है, लेकिन मैदान पर प्रैक्टिस करने वाले इन बच्चों को व्यवस्था की अनदेखी ने चुप रहने पर मजबूर किया है।” उनका कहना है कि वे लगातार अपनी आवाज उठा रहे हैं, लेकिन उनकी मांग को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा है।
भ्रम फैलाने वालों को मिला कड़ा जवाब
मैदान बचाओ आंदोलन को लेकर शहर में विभिन्न प्रकार की चर्चाएं हो रही हैं। इसे प्राइवेट स्कूलों और अकादमियों से जोड़ा गया तो कभी इसे कुछ ही खिलाड़ियों का आंदोलन बताया गया। हालांकि, मंगलवार को बड़ी संख्या में बच्चों के मैदान पर उतरकर किए गए इस मौन प्रतिरोध ने ऐसे तमाम भ्रमों को खारिज कर दिया है। छात्रों का इस मैदान से सीधा जुड़ाव उनके खेल, अभ्यास और भविष्य के सपनों से है।
18वें दिन भी जारी रहा धरना
एक तरफ जहां बच्चों ने अनोखे तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया, वहीं मैदान बचाओ समिति का क्रमिक धरना 18वें दिन भी जारी रहा। इस दौरान मुफद्दल टाइगर क्रिकेट टीम के मूर्तुजा डेरकी की अगुआई में कई खेल प्रेमियों और नागरिकों ने धरना स्थल पर बैठकर मैदान बचाने की मांग का समर्थन किया।
समर्थन देने वालों में अली शेख, मोहम्मद लाइटवेल, मोहसिन कुरैशी, विमल शर्मा, समीर कुरैशी, आदित्य शर्मा, सोनू शर्मा, मोहसिन राज, मुस्तफा पानवाला, कुतुब नम्बरदार, हसन डेरकी, शब्बीर मिठाईवाला और पप्पू सिंग सहित कई लोग शामिल रहे। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि यह मैदान केवल मिट्टी का टुकड़ा नहीं, बल्कि शहर की खेल संस्कृति और युवाओं के भविष्य की धुरी है। अब देखना यह है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस मामले को कब गंभीरता से लेंगे।
कमलेश सारडा की रिपोर्ट
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