बार-बार शिकायतें करने से अपने भी दूर हो सकते हैं:मन हल्का करें, लेकिन सामने वाले को भी बोलने दें
ऑफिस या जिंदगी की परेशानियां किसी करीबी से शेयर करने पर मन हल्का होता है। लेकिन अगर हर बातचीत में सिर्फ अपनी शिकायतें और परेशानियां बताई जाएं, तो सामने वाला भी थकने लगता है। मनोवैज्ञानिक जेनी मार्टिन के मुताबिक, अपनी बात कहने की एक सीमा होनी चाहिए। लगातार शिकायतें रिश्ते में कड़वाहट और दूरी ला सकती हैं। थेरेपिस्ट स्टेफनी महलेक के मुताबिक, अच्छी बातचीत दोनों तरफ से होती है। अगर आप लगातार बोलते रहें, सामने वाले के सवाल आपको दखल लगें और उसकी सलाह भी न सुनें, तो बातचीत एकतरफा हो जाती है। अपनी बात कहने के बाद रुकें और पूछें- “तुम इस बारे में क्या सोचते हो?” इससे सामने वाले को भी अपनी बात कहने का मौका मिलेगा। 10 मिनट शिकायत के लिए काफी मनोवैज्ञानिक जेनी मार्टिन के मुताबिक, परेशानी बताने की बातचीत की शुरुआत और अंत होना चाहिए। इसके लिए करीब 10 मिनट की सीमा तय कर सकते हैं। समय पूरा होने के बाद विषय बदलें और सामने वाले की बातें भी सुनें। अगर वह बातचीत को सामान्य करने की कोशिश कर रहा है और आप बार-बार नई शिकायत शुरू कर देते हैं, तो यह रिश्ते के लिए ठीक नहीं है। बात के बाद तनाव बढ़े तो रुकें थेरेपिस्ट मैट कार्टराइट के मुताबिक, भड़ास निकालने का मकसद मन हल्का करना है। अगर बात करने के बाद गुस्सा और बेचैनी कम होने के बजाय बढ़ जाए, तो दोनों लोग मिलकर नकारात्मक सोच में फंस रहे हो सकते हैं। ऐसा लगे तो बातचीत रोकें, गहरी सांस लें और कुछ देर टहलने निकल जाएं। हर किसी से निजी बातें शेयर न करें रिश्ता जितना करीबी हो, निजी बातें भी उतनी ही साझा करें। किसी नए सहकर्मी या परिचित से बहुत निजी विवाद और गहरी शिकायतें साझा करना उसे असहज कर सकता है। बात शुरू करने से पहले सोचें कि सामने वाला आपके कितना करीब है और उस पर कितना भरोसा है। दोस्त दूरी बनाने लगे तो संकेत समझें अगर दोस्त अब गहरी बातें करने के बजाय सिर्फ काम या मौसम की बात करने लगे, अकेले मिलने के बजाय ग्रुप में मिलना पसंद करे या फोन टालने लगे, तो यह संकेत हो सकता है कि वह लगातार शिकायतों से बच रहा है। अगली बार मिलें तो बिना शिकायत के उसकी जिंदगी, खुशियों और हालचाल के बारे में पूछें। रिश्ते में सिर्फ अपनी परेशानी सुनाने के बजाय सामने वाले को सुनना भी उतना ही जरूरी है। ---------------------------- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिकी अरबपतियों में 100 साल पुराने पेड़ लगवाने का क्रेज:बड़े पेड़ बने नया स्टेटस सिंबल, नर्सरी में ग्राहकों के लिए हेलीपैड तक अमेरिका में अरबपतियों के बीच अब 100 साल पुराने और पूरी तरह विकसित पेड़ लगवाने का क्रेज बढ़ रहा है। महंगी घड़ियां, प्राइवेट जेट और सुपरकार के बाद बड़े पेड़ नया स्टेटस सिंबल बन रहे हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार:अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने का असर, पेट्रोल-डीजल और LPG महंगी हो सकती है
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ने कारण कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। अगर कच्चे तेल के दाम ऐसे ही बढ़ते रहे तो, इससे पेट्रोल-डीजल और LPG के दाम बढ़ सकते हैं। आज यानी 9 सितंबर को एशियाई और यूरोप में शुरुआती कारोबार के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 2.25% उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। 24 जुलाई के बाद यह पहला मौका है जब ब्रेंट क्रूड इस स्तर पर पहुंचा है। अमेरिका ने ईरान के 5 क्रूड ऑयल टैंकर तबाह किए तेल की कीमतों में इस ताजा उछाल की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुई नई सैन्य झड़पें हैं। यूएस सेंट्रल कमांड ने मंगलवार देर रात बयान जारी कर बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के 5 तेल टैंकरों को नष्ट कर दिया है। अमेरिका का दावा है कि उसने यह कार्रवाई ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स द्वारा अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत पर बैलिस्टिक मिसाइल से किए गए हमले के जवाब में की है। 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' का बंद होना बड़ा कारण क्रूड ऑयल बढ़ने की सबसे बड़ी वजह 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' का बंद होना है। ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। ईरान खुद इसी रूट से एक्सपोर्ट करता है। 1 महीने में कच्चा तेल 22% महंगा हुआ बीते 1 महीने में कच्चे तेल के दाम में 22% की तेजी देखने को मिली है। 10 अगस्त को ब्रेंट क्रूड यानी कच्चा तेल 82 डॉलर प्रति बैरल पर था जो अब 100 डॉलर पर है। सरकारी कंपनियों ने मई में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए थे मई में IOC, BPCL और HPCL ने महंगे अंतरराष्ट्रीय क्रूड का हवाला देते हुए किस्तों में पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में कुल ₹7.50-₹7.50 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। देश के 1 लाख से ज्यादा पेट्रोल पंपों में से 90% से अधिक पर इन तीनों सरकारी कंपनियों का नियंत्रण है।
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