रोहित-कोहली के 2027 वर्ल्ड कप खेलने पर नेहरा बोले:अभी कुछ भी कहना मुश्किल, 13 महीने लंबा समय होता है
रोहित शर्मा और विराट कोहली के 2027 वनडे वर्ल्ड कप खेलने को लेकर पूर्व भारतीय गेंदबाज आशीष नेहरा ने कहा कि वर्ल्ड कप करीब 13 महीने दूर है। इस समय यह कहना बहुत मुश्किल है कि दोनों खिलाड़ी टूर्नामेंट में होंगे या नहीं। भारत वर्ल्ड कप से पहले वनडे फॉर्मेट में कम मैच खेलेगा। ऐसे में हर सीरीज के बीच लंबे अंतराल की वजह से रोहित और कोहली के वनडे भविष्य पर चर्चा हो रही है। 2027 का वर्ल्ड कप साउथ अफ्रीका में होना है। नेहरा ने कहा- बड़े खिलाड़ी भी अपनी जगह पक्की नहीं मान सकते नेहरा ने कोलकाता में क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल के सालाना पुरस्कार समारोह में कहा कि भारतीय क्रिकेट तेजी से बदल रहा है। इसलिए बड़े खिलाड़ी भी अपनी जगह को पक्का नहीं मान सकते। नेहरा ने शुभमन गिल का उदाहरण दिया नेहरा ने अपनी बात समझाने के लिए गुजरात टाइटन्स के कप्तान शुभमन गिल का उदाहरण दिया। गिल टेस्ट और वनडे में भारतीय टीम की योजनाओं का अहम हिस्सा हैं, लेकिन मौजूदा टी-20 टीम में उन्हें जगह नहीं मिली है। नेहरा ने कहा- ‘हम गिल और बुमराह की बात करते हैं, लेकिन शुभमन भी टी-20 टीम में नहीं हैं। जिस तरह क्रिकेट आगे बढ़ रहा है, वह तेज रफ्तार वाला है और कई फॉर्मेट आ रहे हैं।’ उन्होंने कहा- ‘अगर दोनों लगातार रन बनाते हैं तो उन्हें वर्ल्ड कप की दौड़ से बाहर नहीं किया जा सकता। लेकिन अगर आप या मैं कोच होते, तो भी यह सिर्फ मेरा फैसला नहीं होता। BCCI में सिलेक्टर्स और दूसरे लोग भी निर्णय में शामिल होते हैं।' सैकिया ने रोहित को लेकर कहा था- वे अच्छा खेल रहे BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने हाल ही में रोहित के टीम में जगह को लेकर उठ रहे सवालों पर कहा था- ‘रोहित शर्मा लगातार अच्छा खेल रहे हैं। आखिरी मैच में उन्होंने शतक लगाया, अब आप और क्या चाहते हैं? अफवाह क्यों है? मैं अफवाहों को हवा नहीं दूंगा।’ पूरी खबर पढ़ें… रोहित और विराट साथ में 400 इंटरनेशनल मैच खेल चुके रोहित और विराट ने अपना आखिरी वनडे मैच इसी साल जुलाई में इंग्लैंड के खिलाफ खेला था। इस मैच में दोनों 400वीं बार इंटरनेशनल मुकाबले में उतरे। वे यह उपलब्धि हासिल करने वाली भारत की पहली जोड़ी बनी थी। सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ 391 मैच के साथ दूसरे नंबर पर है। ओवरऑल श्रीलंका के कुमार संगकारा और महेला जयवर्धने ने एकसाथ सबसे ज्यादा सबसे ज्यादा इंटरनेशनल मैच खेले हैं। दोनों ने साथ में 550 इंटरनेशनल मुकाबले खेले हैं। ------------------------------ स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें भारत 35 महीने से ICC वनडे रैकिंग में टॉप पर:सितंबर 2023 में पाकिस्तान को पीछे छोड़ा, तब से नंबर-1; न्यूजीलैंड दूसरे स्थान पर भारतीय टीम ने ICC वनडे टीम रैंकिंग में नंबर-1 की पोजिशन बरकरार रखी है। ताजा रैंकिंग में उसके 116 रेटिंग पॉइंट्स हैं। न्यूजीलैंड 109 रेटिंग के साथ दूसरे और ऑस्ट्रेलिया 102 रेटिंग के साथ तीसरे नंबर पर है। पूरी खबर पढ़ें…
स्वच्छ उत्तराखंड की दिशा में नई पहल, कचरा प्रबंधन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर
Uttarakhand Waste Management: स्वच्छ और कचरा-मुक्त उत्तराखंड की दिशा में राज्य सरकार ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत करने की तैयारी तेज कर दी है. ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों में व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं.
बुधवार को सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने नियमों को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल 2026 से देशभर में लागू हुए इन नियमों के तहत कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. डॉ. धकाते ने कहा कि नए नियमों में स्रोत पर ही कचरे को अलग करने, रिसाइक्लिंग और संसाधनों के दोबारा इस्तेमाल पर जोर दिया गया है. इसके साथ ही सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम किया जा रहा है. बैठक में पीआईबी देहरादून के सहायक निदेशक संजीव सुन्दिरयाल और शहरी विकास निदेशक प्रवीण कुमार भी मौजूद रहे.
उन्होंने बताया कि कचरा प्रबंधन में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए जिलों में विशेष सेल गठित किए जाएंगे. इन सेल के जरिए कचरा प्रबंधन से जुड़े कार्यों की निगरानी और नियमों के पालन को सुनिश्चित करने पर जोर रहेगा.
क्या है नई व्यवस्था?
नई व्यवस्था के तहत कचरे को घर और संस्थानों के स्तर पर ही अलग करने से लेकर उसके वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण तक की प्रक्रिया को मजबूत किया जाएगा. इससे कचरे के दोबारा उपयोग और रिसाइक्लिंग को बढ़ावा मिलने के साथ पर्यावरण पर पड़ने वाले इसके नकारात्मक प्रभाव को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है. डॉ. धकाते ने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में स्थानीय निकायों की भूमिका महत्वपूर्ण है. नियमों को जमीन पर लागू करने के लिए संबंधित विभागों और स्थानीय निकायों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया जा रहा है.
व्यवस्थित और पारदर्शी व्यवस्था पर जोर
नए नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन से उत्तराखंड में कचरा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है. सरकार का फोकस कचरे को समस्या के बजाय संसाधन के रूप में इस्तेमाल करने और वैज्ञानिक तरीके से इसके निस्तारण की व्यवस्था विकसित करने पर है.
तीन श्रेणियां निर्धारित
डॉ. धकाते ने बताया कि वर्ष 2016 के नियमों में कचरा पृथक्करण की तीन श्रेणियां निर्धारित थीं, वहीं नए नियमों में चार श्रेणियों यथा गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनिटरी कचरा और विशेष देखभाल वाला कचरा में कचरा पृथक्करण का प्रावधान किया गया है. वहीं 2,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल, प्रतिदिन 40 हजार लीटर से अधिक जल खपत अथवा प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक ठोस कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों में से किसी एक मानक को पूरा करने वाले प्रतिष्ठान बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी में आएंगे. ऐसे संस्थानों का पंजीकरण तथा कचरे के प्रसंस्करण और रिसाइक्लिंग की जिम्मेदारी निर्धारित की गई है.
प्रत्येक जनपद में डिस्ट्रिक्ट स्पेशल सेल
डॉ. धकाते ने बताया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा 19 फरवरी 2026 को ठीवचंस डनदपबपचंस ब्वतचवतंजपवद बनाम डॉ. सुभाष चंद्र पांडे मामले में दिये गये निर्देशों के क्रम में प्रदेश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रत्येक जनपद में डिस्ट्रिक्ट स्पेशल सेल गठित किए गए हैं. इन सेल के माध्यम से शहरी एवं ग्रामीण स्थानीय निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, डंपिंग साइट और लीगेसी वेस्ट के निस्तारण की लगातार निगरानी की जा रही है। लीगेसी वेस्ट के निस्तारण को दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
वर्तमान में राज्य में लगभग शत प्रतिशत डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण किया जा रहा है. चार श्रेणियों में कचरा पृथक्करण को ध्यान में रखते हुए लगभग 500 वाहनों में चार कम्पार्टमेंट की व्यवस्था की जा रही है. साथ ही डिजिटल व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम लागू किया गया है, जिससे कचरा संग्रहण वाहनों की निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकेगी.
रोज 1,930 मीट्रिक टन कचरा निकल रहा
बताया गया कि राज्य में प्रतिदिन लगभग 1,930 मीट्रिक टन ठोस कचरा उत्पन्न हो रहा है, जबकि करीब 1,800 मीट्रिक टन कचरे का प्रतिदिन प्रसंस्करण किया जा रहा है. प्लास्टिक कचरे का भी पृथक रूप से प्रसंस्करण किया जा रहा है. कचरा संग्रहण व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए 657 नए वाहन खरीदे जा रहे हैं, जिनमें लगभग 480 ई-वाहन भी शामिल हैं. राज्य में वर्तमान में 22 इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट, लगभग 50 मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी तथा 600 से अधिक वेस्ट कम्पोस्टर संचालित हैं. इस दौरान अधिकारियों ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के सफल क्रियान्वयन के लिए नगरीय निकायों, ग्राम पंचायतों, जिला प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा आमजन की सामूहिक भागीदारी को आवश्यक बताया.
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