SC Slams Greater Noida Magistrate: 'मजिस्ट्रेट की इतनी हिम्मत कैसे हुई?'; CJP विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्र को नोटिस भेजने पर SC सख्त
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ग्रेटर नोएडा प्रशासन और स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। मामला गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी के सेकेंड ईयर के छात्र अक्षत त्रिपाठी से जुड़ा है, जिसे दिल्ली में जंतर-मंतर पर हुए CJP के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए 5 लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड भरने का नोटिस थमा दिया गया था। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस पर नाराजगी जताते हुए स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मजिस्ट्रेट की इतनी हिम्मत कैसे हुई?: CJI सूर्यकांत का कड़ा रुख
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, "किसी मजिस्ट्रेट की हमारे आदेश के खिलाफ जाकर नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे हुई? हमने पहले ही साफ कर दिया था कि किसी भी छात्र के खिलाफ दंडात्मक या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। कोई भी मजिस्ट्रेट इस आदेश का उल्लंघन नहीं कर सकता।" शीर्ष अदालत ने कहा कि देश के युवाओं और छात्रों को इस तरह प्रताड़ित करने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
ग्रेटर नोएडा पुलिस का आरोप और 5 लाख के बॉन्ड का नोटिस
ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 4 सितंबर को पुलिस रिपोर्ट के आधार पर अक्षत त्रिपाठी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। पुलिस का आरोप था कि अक्षत यूनिवर्सिटी के छात्रों के बीच 'सरकार विरोधी और भ्रामक बातें' फैला रहा था और उन्हें आंदोलन में शामिल होने के लिए उकसा रहा था, जिससे शांति भंग होने की आशंका थी। इस आधार पर उससे 5 लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड और इतनी ही राशि की दो जमानतें मांगी गई थीं। हालांकि, मामले के तूल पकड़ते ही पुलिस ने इस नोटिस को वापस ले लिया था।
छात्रों के साथ 'प्रयोग' और कोर्ट की अवमानना का उठा मुद्दा
वरिष्ठ वकील बिश्वजीत भट्टाचार्य ने मौखिक उल्लेख के जरिए इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा। उन्होंने कोर्ट से कहा कि नोएडा और यूपी प्रशासन छात्रों के बीच 'खौफ का माहौल' पैदा नहीं कर सकता। वकील ने तर्क दिया कि केवल नोटिस वापस लेने से कोर्ट के आदेश का उल्लंघन और अवमानना खत्म नहीं हो जाती। उन्होंने इसे सीधे तौर पर 'अवमानना' करार दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी से मांगा जवाब, रिकॉर्ड में लिए जाएंगे तथ्य
पीठ ने वरिष्ठ वकील को निर्देश दिया कि वे इस नोटिस और पूरे घटनाक्रम से जुड़े तथ्य लिखित में रिकॉर्ड पर रखें। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि वह इस मामले की गहराई से समीक्षा करेगा और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी से इस संबंध में आधिकारिक स्पष्टीकरण व जवाब तलब करेगा। बता दें कि इससे पहले 31 अगस्त को दिल्ली पुलिस ने भी आंदोलन से जुड़ी 13 एफआईआर वापस लेने का फैसला किया था।
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