हॉस्टल में घुसे बाहरी युवक, छात्रों से मारपीट के बाद की तोड़फोड़, 4 आरोपियों पर FIR
दतिया के आदिमजाति कल्याण विभाग के सीनियर बालक छात्रावास में बाहरी युवकों के घुसने और छात्रों से मारपीट का मामला सामने आया है। खाना खाते समय हुए इस विवाद में कई छात्र घायल हुए। लाठी-डंडों से हमला और तोड़फोड़ के बाद छात्र देर रात कोतवाली थाने पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई।
छात्रावास में उस समय हड़कंप मच गया, जब छात्र रोज की तरह खाना खाने के लिए बैठे थे। अचानक कुछ बाहरी युवक अंदर पहुंचे और छात्रों के साथ मारपीट शुरू कर दी। आरोप है कि युवकों ने लाठी-डंडों से छात्रों को पीटा और छात्रावास में तोड़फोड़ भी की। घटना के बाद छात्र डर गए और पूरे हॉस्टल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
सीनियर बालक छात्रावास में बाहरी युवकों की एंट्री से विवाद
जानकारी के अनुसार, छात्रावास में रहने वाला एक छात्र पढ़ाई कर रहा है। बताया जा रहा है कि उसी छात्र के परिचित कुछ युवक हॉस्टल में आए थे। छात्रों के मुताबिक, दोपहर के समय शिवम नाम के एक छात्र से मिलने एक बाहरी युवक छात्रावास पहुंचा था। इसके बाद ही विवाद की स्थिति बनी और मामला मारपीट तक पहुंच गया।
छात्रों का कहना है कि बाहरी युवकों ने छात्रावास के अंदर ही हंगामा शुरू कर दिया। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि छात्रों के साथ मारपीट की गई और सामान में भी तोड़फोड़ की गई। हॉस्टल में रहने वाले छात्रों के लिए यह घटना काफी डराने वाली थी, क्योंकि छात्रावास को पढ़ाई और रहने के लिए सुरक्षित जगह माना जाता है।
लाठी-डंडों से हमले में कई छात्र घायल
हमले के दौरान कई छात्रों को चोट लगने की बात सामने आई है। छात्रों के अनुसार, अचानक हुए हमले के कारण उन्हें संभलने का मौका भी नहीं मिला। कुछ छात्रों ने बचने की कोशिश की, लेकिन हमलावरों ने कथित तौर पर लाठी-डंडों से मारपीट जारी रखी।
घटना के बाद छात्रावास में रहने वाले छात्रों में डर का माहौल है। छात्रों का कहना है कि अगर बाहरी युवक आसानी से हॉस्टल के अंदर पहुंच सकते हैं, तो भविष्य में कोई बड़ी घटना भी हो सकती है। इस वजह से छात्रावास की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
देर रात कोतवाली थाने पहुंचे छात्र
मारपीट और तोड़फोड़ की घटना के बाद छात्र देर रात कोतवाली थाना पहुंचे। डरे हुए छात्रों ने पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। शिकायत के आधार पर पुलिस ने चार नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
पुलिस की कार्रवाई के बाद अब इस मामले में आगे की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि विवाद की शुरुआत किस बात को लेकर हुई और छात्रावास के अंदर बाहरी युवकों के पहुंचने की स्थिति कैसे बनी। साथ ही, मारपीट और तोड़फोड़ में कौन-कौन शामिल था, इसकी भी जांच की जाएगी।
CJP प्रोटेस्ट में शामिल छात्र को नोटिस पर CJI सूर्यकांत नाराज, कहा- मजिस्ट्रेट ने आदेश का उल्लंघन कैसे किया?
कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन (CJP Protest) में शामिल एक छात्र को ग्रेटर नोएडा के मजिस्ट्रेट द्वारा भेजे गए नोटिस का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है, जानकारी सामने आने पर इस पर कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई, CJI सूर्यकांत ने कहा जब हम पहले ही सीजेपी प्रोटेस्ट से जुड़े किसी भी छात्र पर किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई करने पर रोक लगा चुके हैं तो एक मजिस्ट्रेट नोटिस कैसे जारी कर सकता है, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन कैसे कर सकता है?
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ग्रेटर नोएडा के एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट के नोटिस पर कड़ा ऐतराज जताई, ये मामला गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) के छात्र अक्षत त्रिपाठी को दिए गए नोटिस से जुड़ा है वो सीजेपी के प्रदर्शन में शामिल था। वरिष्ठ अधिवक्ता बिश्वजीत भट्टाचार्य ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने ये मामला उठाया। उन्होंने बताया कि छात्र को पांच लाख रुपये के निजी मुचलके का नोटिस दिया गया था। वकील ने कहा कि यह कार्रवाई तब की गई जब सुप्रीम कोर्ट छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी एफआईआर रद्द कर चुका है और छात्रों के खिलाफ भविष्य में किसी भी तरह की जबरन कार्रवाई पर रोक लगा चुका है।
वकील ने कहा सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी नोटिस डराने की कोशिश है
वकील ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ को बताया कि कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने ये नोटिस पुलिस के अनुरोध पर जारी किया , हालाँकि जब मामला मीडिया में आया तो इसे वापस ले लिया गया लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद इस तरह नोटिस का जारी होना सीधे तौर पर प्रदर्शन में शामिल रहे छात्रों को डराने की कोशिश है। ये सुप्रीम कोर्ट के 1 सितम्बर के उस आदेश का उल्लंघन है जिसमें छात्रों पर दर्ज सभी एफआईआर रद्द करने के आदेश और भविष्य में किसी भी तरह एक दंडात्मक कार्रवाई पर रोक के निर्देश थे।
CJI ने पूछा मजिस्ट्रेट कैसे जारी कर सकता है नोटिस
छात्र को नोटिस दिए जाने की बात सामने आने पर सीजेआई सूर्यकांत ने कड़ी नाराजगी जताई , उन्होंने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट आदेश कर चुकी है तो कैसे कोई मजिस्ट्रेट नोटिस जारी कर सकता है? सीजेआई ने कहा मजिस्ट्रेट ने नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे की, हमने साफ कहा था कि किसी छात्र के खिलाफ जबरन कार्रवाई नहीं होगी। कोई मजिस्ट्रेट हमारे आदेश का उल्लंघन नहीं कर सकता। उल्लेखनीय है कि 1 सितम्बर को सुप्रीम कोर्ट ने विशेष शक्तियों वाले अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए छात्रों पर दर्ज सभी एफआईआर को रद्द कर दिया था और भविष्य में प्रोटेस्ट से जुड़े किसी भी छात्र पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं करने के निर्देश दिए थे।
सुप्रीम कोर्ट मांगेगा स्पष्टीकरण
चीफ जस्टिस ने वरिष्ठ अधिवक्ता से अक्षत को दिए गए कार्यकारी मजिस्ट्रेट के नोटिस को याचिका के जरिए रिकॉर्ड पर लाने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि वह संबंधित अधिकारी से इस कार्रवाई को लेकर स्पष्टीकरण मांगेगा। यानी नोटिस वापस लिए जाने के बावजूद मामला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट अब यह देखेगा कि उसके पहले के आदेश के बावजूद छात्र के खिलाफ कार्रवाई किस आधार पर की गई। वकील ने इसे कोर्ट के आदेश की अवहेलना बताया है।
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