‘विनय उजाला राष्ट्रीय गौरव सम्मान-2026’ से सम्मानित हुए ताहिर अली, जनसंपर्क-मीडिया और सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए मिला गौरव
उज्जैन। जनसंपर्क और मीडिया के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय ताहिर अली को ‘विनय उजाला राष्ट्रीय गौरव सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया है। उज्जैन में आयोजित 13वें राष्ट्रीय गौरव सम्मान समारोह में उन्हें जनसंपर्क, मीडिया और सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया।
समारोह में प्रसिद्ध अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरे ने ताहिर अली को सम्मान एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया। इस दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली प्रतिभाओं को 12 विधाओं में सम्मानित किया गया।
जनसंपर्क विभाग में निभाई लंबी पारी
ताहिर अली जनसंपर्क विभाग में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद संयुक्त संचालक के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने सरकार और मीडिया के बीच समन्वय स्थापित करने के साथ ही शासन की नीतियों, योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों से जुड़ी सूचनाओं को आमजन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जनसंपर्क और मीडिया प्रबंधन के साथ ही शिक्षा, समाजसेवा और अन्य सामाजिक क्षेत्रों में भी वे सक्रिय रहे हैं। सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका यह सफर जारी है। वर्तमान में वे उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के मीडिया सलाहकार के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।
ताहिर अली बोले- जनसंपर्क शासन और समाज के बीच विश्वास का सेतु
सम्मान मिलने पर ताहिर अली ने खुशी जताते हुए इसे अपने लिए गौरव का विषय बताया। उन्होंने कहा कि जनसंपर्क केवल सूचनाओं के आदान-प्रदान का माध्यम नहीं, बल्कि शासन और समाज के बीच विश्वास का सेतु है।
उन्होंने अपने सेवाकाल के दौरान सहयोग और मार्गदर्शन देने वाले सहकर्मियों और शुभचिंतकों के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही आत्मीयता के साथ सम्मानित करने के लिए विनय उजाला की पूरी टीम को धन्यवाद दिया।
अलग-अलग क्षेत्रों की प्रतिभाओं को भी मिला सम्मान
सम्मान समारोह में सांसद अनिल फिरोजिया, प्रेस क्लब अध्यक्ष नंदलाल यादव, नगर निगम उज्जैन की सभापति कलावती यादव, समूह संपादिका शोभना मिश्रा, विनय उजाला के एमडी डॉ. वी.के. मिश्रा और प्रेस क्लब उज्जैन के कार्यकारी अध्यक्ष विशाल हाड़ा सहित कई गणमान्यजन मौजूद रहे।
कार्यक्रम में प्रशासन, समाजसेवा, शिक्षा, उच्च शिक्षा, खेल, पर्यावरण संरक्षण एवं कल्याण, सामाजिक कल्याण और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रतिभाओं को भी सम्मानित किया गया।
चुप्पी नहीं, संवेदनशील बातचीत जरूरी! आत्महत्या रोकथाम पर बदलें अपना नजरिया
नई दिल्ली, 9 सितंबर (आईएएनएस)। कई बार इंसान बाहर से बिल्कुल सामान्य नजर आता है, लेकिन उसके भीतर क्या चल रहा है, यह किसी को पता नहीं होता। उस मुस्कुराते चेहरे के पीछे चिंता, अकेलापन, निराशा या गहरा भावनात्मक दर्द छिपा हो सकता है। ऐसे में किसी की परेशानी को नजरअंदाज करने के बजाय उसकी बात सुनना और उसे समझने की कोशिश करना बेहद जरूरी है। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस का संदेश भी यही है कि चुप्पी नहीं, बातचीत बदलाव की शुरुआत हो सकती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की मानें तो हर साल दुनिया में 7.2 लाख से ज्यादा लोग आत्महत्या के कारण अपनी जान गंवाते हैं। हर एक मौत सिर्फ एक व्यक्ति को नहीं खोती, बल्कि परिवार, दोस्तों, सहकर्मियों और पूरे समुदाय पर गहरा भावनात्मक और सामाजिक असर छोड़ती है। इसका आर्थिक प्रभाव भी पड़ता है। इसलिए आत्महत्या को केवल व्यक्तिगत समस्या मानने के बजाय इसे एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में समझना जरूरी है।
साल 2026 में आत्महत्या के बारे में सोच बदलना थीम का तीसरा और अंतिम वर्ष है। इसका उद्देश्य है कि आत्महत्या को लेकर बने डर, गलत धारणाओं और सामाजिक कलंक को कम किया जाए। किसी व्यक्ति के मानसिक संघर्ष को कमजोरी समझने के बजाय संवेदनशीलता से देखा जाए और उसे मदद लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
अक्सर लोग यह सोचकर चुप रह जाते हैं कि कहीं आत्महत्या जैसे विषय पर बात करने से स्थिति और खराब न हो जाए। लेकिन जरूरत इस बात की है कि ऐसे विषयों पर बिना जज किए, शांत और संवेदनशील तरीके से बातचीत की जाए। अगर कोई व्यक्ति लगातार निराश दिखाई दे, खुद को लोगों से अलग करने लगे, व्यवहार में अचानक बदलाव आए या जीवन को लेकर बहुत नकारात्मक बातें करे, तो उसकी बात को गंभीरता से लेना चाहिए। हर संकेत का मतलब एक जैसा नहीं होता, लेकिन परेशान व्यक्ति तक पहुंचने और उसकी बात सुनने में देर नहीं करनी चाहिए।
यह भी समझना जरूरी है कि आत्महत्या के पीछे केवल मानसिक बीमारी ही जिम्मेदार नहीं होती। कई बार व्यक्तिगत संकट, सामाजिक परिस्थितियां, आर्थिक परेशानी, रिश्तों में तनाव, अकेलापन और दूसरी परिस्थितियां भी किसी व्यक्ति की मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए समाधान भी सिर्फ एक स्तर पर नहीं, बल्कि परिवार, समाज, स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकार- सभी की साझा जिम्मेदारी से संभव है।
विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस की शुरुआत वर्ष 2003 में आत्महत्या रोकथाम के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के साथ मिलकर की थी। हर साल 10 सितंबर को दुनिया भर में इस दिन के जरिए आत्महत्या की रोकथाम के लिए जागरूकता बढ़ाई जाती है और यह संदेश दिया जाता है कि आत्महत्याओं को रोकने के लिए मिलकर प्रयास किए जा सकते हैं।
--आईएएनएस
पीआईएम/एएस
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