IND vs AFG : टीम इंडिया को आज लग सकता बड़ा झटका, क्या स्क्वाड से ये अनुभवी खिलाड़ी हो जाएगा बाहर?
IND vs AFG : भारतीय क्रिकेट टीम 13 सितंबर से अफगानिस्तान के साथ टी20 सीरीज खेलने वाली है. तीन टी20 मैचों की इस सीरीज से पहले आज यानी 9 सितंबर (बुधवार) का दिन इंडियन क्रिकेट फैंस के लिए काफी अहम साबित होने वाला है. क्योंकि आज भारतीय क्रिकेट टीम के एक अनुभवी खिलाड़ियों पर अहम फैसला होने वाला है. इस फैसले के साथ ही तय हो कि ये खिलाड़ी अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाली तीन मैचों की टी20 का हिस्सा होगा या नहीं? ये खिलाड़ी कोई और नहीं बल्कि अनुभवी तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह हैं.
आज जसप्रीत बुमराह के अफगानिस्तान के खिलाफ टी20 सीरीज में खेलने पर फैसला लिया जाएगा. बुमराह उन चार खिलाड़ियों में शामिल थे, जिनको पूरी तरह फिट नहीं होने के बावजूद स्क्वाड में चुना गया था. इसमें जसप्रीत बुमराह, वाशिंगटन सुंदर, हर्षित राणा और नीतीश कुमार रेड्डी शामिल हैं. ये खिलाड़ी अनफिट थे, ऐसे में इनको चुनते समय इनके नाम के आगे * लगाया गया था.
इनमें से वाशिंगटन सुंदर पूरी तरह से फिट हो चुके हैं. रिपोर्ट्स की मानें तो, भारतीय क्रिकेट टीम के ऑफ स्पिन ऑलराउंडर वाशिंगटन सुंदर पूरी तरह से फिट हो गए हैं. सुंदर को बेंगलुरु स्थिति सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) के द्वारा क्लीन चिट मिल गई है. उनके अनुसार सुंदर ने सफलात पूर्वक अपनी फिटनेस हासिल कर ली है.
???? GOOD NEWS FOR INDIA ????????
— Johns. (@CricCrazyJohns) September 8, 2026
- Washington Sundar has been declared fit for the T20I series vs Afghanistan. [Sports Today] pic.twitter.com/cF1mBeozzP
आज होगा जसप्रीत बुमराह का असली टेस्ट
सामने आ रही तमाम मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो, आज जसप्रीत बुमराह का टेस्ट हो सकता है. अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाली टी20 सीरीज से पहले आज जसप्रीत बुमराह का मैच सिमुलेशन टेस्ट होने की उम्मीद है. इसके बाद ही सीरीज में उनके खेलने पर आखिरी फैसला लिया जाएगा. तो आज भारतीय फैंस की नजरें बुमराह के टेस्ट की अपडेट पर होंगी, क्योंकि इसके आधार पर ही वो उन्हें खेलते देखेंगे या नहीं इसका फैसला होगा.
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— IndiaTeamhub (@vivek23mishra) September 9, 2026
JASPRIT BUMRAH KO LEKAR BIG
UPDATE.????
Bumrah is expected to undergo a match simulation test today ahead of the Afghanistan T20I series. Only after this will a final decision be made on his participation in the series.
(According to an India Today report) pic.twitter.com/Hz3zmqMJqx
मैच सिमुलेशन टेस्ट देंगे जसप्रीत बुमराह
आज संभवत: जसप्रीत बुमराह अफगानिस्तान सीरीज के लिए फिटनेस पाने और पूरी तरह से मैच फिट होने के लिए क्लीन चिट पाने के लिए उतरेंगे. वो बेंगलुरु स्थिति सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में मैच सिमुलेशन देंगे. इस टेस्ट में वो नेट प्रैक्टिस से अलग, मैदान पर लाइव मैच जैसी परिस्थितियां बनाकर खिलाड़ियों के साथ खेलेंगे, जिमसें उनकी फिटनेस और फॉर्म का आंकलन किया जाएगा.
जसप्रीत बुमराह का अंतरराष्ट्रीय करियर
| फॉर्मेट | अवधि | मैच | पारी | मेडन | रन दिए | विकेट | सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी | इकॉनमी | औसत | स्ट्राइक रेट | 4 विकेट | 5 विकेट |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| टेस्ट | 2018– | 52 | 99 | 396 | 4,631 | 234 | 6/27 | 2.77 | 19.8 | 42.9 | 7 | 16 |
| वनडे | 2016– | 91 | 90 | 57 | 3,585 | 151 | 6/19 | 4.58 | 23.7 | 31.1 | 6 | 2 |
| टी20 अंतरराष्ट्रीय | 2016– | 95 | 92 | 12 | 2,188 | 121 | 4/15 | 6.52 | 18.1 | 16.6 | 1 | 0 |
India’s squad for Afghanistan T20I series announced. #TeamIndia will play three T20Is against Afghanistan at New Delhi, beginning September 13.#AFGvIND pic.twitter.com/UqTUeZyHz8
— BCCI (@BCCI) September 1, 2026
अफगानिस्तान सीरीज के लिए भारत का स्क्वाड
श्रेयस अय्यर (कप्तान), अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, संजू सैमसन (विकेट कीप), ईशान किशन (विकेट कीपर), तिलक वर्मा (उपकप्तान), शिवम दुबे, नीतीश कुमार रेड्डी*, अक्षर पटेल, वाशिंगटन सुंदर, वरुण चक्रवर्ती, रवि बिश्नोई, जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह, हर्षित राणा*
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BRICS क्यों भारत के लिए है अहम, दुनियाभर के देशों के लिए क्या है संदेश
BRICS 2026 Explainer: भारत इस सप्ताह राजधानी दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है. 12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में होने वाली इस बैठक में BRICS के सदस्य देशों के शीर्ष नेता वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, तकनीक, ऊर्जा, विकास, बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति जैसे मुद्दों पर चर्चा करेंगे.
भारत के लिए यह सम्मेलन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2026 में वह BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और समूह की स्थापना के 20 वर्ष पूरे हो रहे हैं. लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर भारत के लिए BRICS कितना महत्वपूर्ण है.
यही नहीं दुनियाभर के देश इसे किस नजर से देख रहे हैं. खास तौर पर अमेरिका, चीन औऱ यूरोपियन देशों जैसे बड़ी ताकतों के लिए ये क्या मायने रखता है. इससे पहले जान लेते हैं कि आखिर ब्रिक्स में कौन-कौन से देश शामिल हैं और किन्हें साझेदार का दर्जा मिला है.
BRICS में कौन-कौन शामिल
BRICS का विस्तार होने के बाद अब यह पहले के मुकाबले कहीं बड़ा और ज्यादा विविध समूह बन चुका है. वर्तमान में इसमें 11 सदस्य देश हैं ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और इंडोनेशिया. इसके अलावा कई देशों को पार्टनर यानी साझेदार का दर्जा भी दिया गया है.
BRICS आखिर है क्या और इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
ये सवाल सबसे ज्यादा जहन में आने वाला सवाल है. दरअसल BRICS की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत और चीन के साथ हुई थी. बाद में दक्षिण अफ्रीका इसके साथ जुड़ा और समूह का नाम BRICS रखा गया. इसके बाद 2009 में पहला शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया.
यहां से इस समूह की कहानी आगे बढ़ी और बाद में इसका एजेंडा लगातार बढ़ता गया और अब यह केवल आर्थिक सहयोग का मंच नहीं रहा, बल्कि वैश्विक शासन, सुरक्षा, जलवायु, तकनीक, स्वास्थ्य और विकास जैसे मुद्दों पर भी चर्चा का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है.
ग्लोबल साउथ की आवाज बना BRICS
यानी ब्रिक्स साझेदार देशों के लिए न सिर्फ आर्थिक बल्कि जीने और विकास के लिए जरूरी हर मुद्दे पर मिलकर काम करने का संदेश देता है. 2023 के बाद BRICS के विस्तार ने इसकी राजनीतिक और आर्थिक हैसियत को और बढ़ाया. 11 सदस्य देशों और पार्टनर देशों के साथ यह समूह ग्लोबल साउथ की बड़ी आवाज के रूप में खुद को पेश कर रहा है.
#WATCH | Delhi: City decorated with posters and lighting ahead of the BRICS Summit 2026.
— ANI (@ANI) September 8, 2026
(Visuals from Dhaula Kuan) pic.twitter.com/j4ZybxdAzw
भारत के लिए BRICS क्यों है बेहद अहम?
अब सबसे जरूरी बात भारत के लिए BRICS का महत्व सबसे पहले उसकी रणनीतिक स्वायत्तता से जुड़ा है. एक तरफ भारत अमेरिका, यूरोप, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ BRICS के जरिए चीन, रूस, ईरान और पश्चिम एशिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ भी संवाद बनाए रखता है.
यही भारत की विदेश नीति की खासियत है किसी एक खेमे में पूरी तरह शामिल होने के बजाय अलग-अलग शक्ति केंद्रों के साथ अपने हितों के मुताबिक संबंध बनाए रखना.
BRICS भारत को चीन के साथ बातचीत का भी एक महत्वपूर्ण मंच देता है. दोनों देशों के बीच सीमा और रणनीतिक मुद्दों पर मतभेद रहे हैं, लेकिन बहुपक्षीय मंचों पर संवाद जारी रखना भारत के लिए महत्वपूर्ण है.
चीन के साथ संबंधों के लिए भी बड़ा मौका
दिल्ली में होने वाले सम्मेलन पर चीन की भागीदारी को लेकर विशेष ध्यान रहेगा. BRICS के मंच पर भारत और चीन एक साथ बैठते हैं और वैश्विक आर्थिक तथा राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा करते हैं.
यह मंच दोनों देशों के बीच मतभेदों को खत्म करने का सीधा माध्यम भले न हो, लेकिन संवाद की गुंजाइश जरूर पैदा करता है. भारत के लिए चुनौती यह होगी कि वह चीन के साथ सहयोग और प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन बनाए रखे.
BRICS के भीतर चीन की आर्थिक ताकत काफी बड़ी है, इसलिए भारत के लिए समूह के भीतर अपनी प्राथमिकताओं को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाना भी महत्वपूर्ण होगा.
भारत लंबे समय से विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने की बात करता रहा है. BRICS इस लक्ष्य को आगे बढ़ाने का एक बड़ा मंच है.
अफ्रीका, एशिया, पश्चिम एशिया और लैटिन अमेरिका की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ BRICS भारत को व्यापक साझेदारी का अवसर देता है. यही कारण है कि BRICS का विस्तार भारत के लिए सिर्फ सदस्य देशों की संख्या बढ़ना नहीं, बल्कि नए बाजारों और नए कूटनीतिक साझेदारों तक पहुंच का विस्तार भी है.
भारत के आर्थिक हित भी जुड़े हैं
BRICS भारत के लिए कूटनीतिक मंच होने के साथ-साथ आर्थिक अवसर भी पैदा कर सकता है. सदस्य देशों के बीच व्यापार बढ़ाना, निवेश आसान करना, भुगतान व्यवस्था को बेहतर बनाना और स्थानीय मुद्राओं में कारोबार जैसे मुद्दे भारत की प्राथमिकताओं में रह सकते हैं.
भारत के लिए यह इसलिए अहम है क्योंकि अगर BRICS देशों के बीच व्यापारिक प्रक्रियाएं आसान होती हैं तो भारतीय कंपनियों को बड़े बाजारों तक पहुंच मिल सकती है.
इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा, डिजिटल टेक्नोलॉजी, फिनटेक, स्वास्थ्य और हरित तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग की संभावनाएं काफी बड़ी हैं.
डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिश?
BRICS को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला मुद्दा वित्तीय व्यवस्था भी है. कुछ सदस्य देश अंतरराष्ट्रीय व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात करते रहे हैं.BRICS के न्यू डेवलपमेंट बैंक ने भी स्थानीय मुद्राओं में वित्तपोषण और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर जोर दिया है. ऐसे में भारत की कोशिश भी होगी कि डॉलर की निर्भरता ब्रिक्स के जरिए कम हो.
दुनिया BRICS को किस नजर से देख रही है?
BRICS को लेकर दुनिया में दो तरह की प्रमुख धारणा दिखाई देती है. एक नजरिए के मुताबिक यह तेजी से बदलती वैश्विक व्यवस्था में ग्लोबल साउथ की बढ़ती ताकत का संकेत है.
दूसरे नजरिए में इसे अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रभाव को संतुलित करने वाले समूह के तौर पर देखा जाता है. हालांकि BRICS के सदस्य देशों के हित हर मुद्दे पर एक जैसे नहीं हैं. यही इसकी सबसे बड़ी चुनौती भी है.
भारत, चीन और रूस जैसे बड़े देशों की अपनी-अपनी रणनीतिक प्राथमिकताएं हैं. पश्चिम एशिया के सदस्य देशों के भी अलग हित हैं. इसलिए BRICS को NATO जैसी सैन्य या पूरी तरह एकजुट राजनीतिक संस्था समझना सही नहीं होगा.
BRICS के आधिकारिक दस्तावेजों में भी इसे टकराव वाले गठबंधन के बजाय सहयोग और संवाद के मंच के रूप में पेश किया गया है.
अमेरिका और यूरोप की नजर क्यों रहेगी?
BRICS के विस्तार ने पश्चिमी देशों का ध्यान भी इस समूह की ओर बढ़ाया है. इसकी वजह सिर्फ चीन या रूस नहीं, बल्कि समूह में शामिल ऊर्जा उत्पादक देशों और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं का महत्व भी है.
अगर BRICS के भीतर व्यापार, निवेश और वित्तीय सहयोग मजबूत होता है तो वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में इसका प्रभाव बढ़ सकता है.
हालांकि भारत के लिए यहां संतुलन बेहद जरूरी है. भारत BRICS में रहते हुए अमेरिका और यूरोप के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को कमजोर नहीं करना चाहता. इसलिए दिल्ली समिट में भारत की कूटनीति का एक बड़ा संदेश यही हो सकता है कि BRICS किसी एक देश या समूह के खिलाफ नहीं, बल्कि बहुध्रुवीय और अधिक प्रतिनिधित्व वाली वैश्विक व्यवस्था के पक्ष में है.
भारत की अध्यक्षता में क्या बदल सकता है?
भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती BRICS के बढ़े हुए आकार को प्रभावी तरीके से संचालित करना है. पांच देशों वाले पुराने BRICS की तुलना में 11 सदस्य देशों वाला समूह ज्यादा जटिल है.
2025 की BRICS चर्चाओं में भी नए विस्तार के बाद संस्थागत ढांचे और कामकाज के तरीकों को अपडेट करने की जरूरत पर जोर दिया गया था.
भारत की अध्यक्षता इस बदलाव को आगे बढ़ाने का अवसर देती है. नई दिल्ली डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीक, व्यापार सुविधा, ऊर्जा सुरक्षा, सतत विकास और ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दे सकती है.
भारत के लिए सबसे बड़ा फायदा क्या होगा?
भारत के लिए BRICS का सबसे बड़ा फायदा किसी एक आर्थिक समझौते से ज्यादा रणनीतिक पहुंच है. एक ही मंच पर चीन, रूस, खाड़ी देश, अफ्रीकी देश और लैटिन अमेरिकी अर्थव्यवस्था को जोड़ने की क्षमता भारत को व्यापक कूटनीतिक स्पेस देती है.
यदि भारत अपनी अध्यक्षता के दौरान व्यापार और निवेश को बढ़ाने, भुगतान व्यवस्था को आसान बनाने, विकास परियोजनाओं के लिए वित्त जुटाने और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की दिशा में ठोस प्रगति करा पाता है, तो यह उसकी वैश्विक भूमिका को और मजबूत करेगा.
समिट से क्या संदेश?
दरअसल 18वां BRICS सम्मेलन भारत के लिए महज दो दिन का कूटनीतिक आयोजन नहीं है. यह ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा संकट, व्यापारिक प्रतिस्पर्धा और वैश्विक संस्थाओं में प्रतिनिधित्व के सवालों से गुजर रही है.
ऐसे दौर में भारत के पास BRICS के जरिए अपनी प्राथमिकताओं को सामने रखने और अलग-अलग शक्ति केंद्रों के बीच संवाद की भूमिका निभाने का अवसर है.
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