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9वां राष्ट्रीय पोषण माह आज से, सीएम डॉ. मोहन यादव ने किया जनभागीदारी का आह्वान

देशभर में 9वां राष्ट्रीय पोषण माह आज 9 सितंबर से शुरू हो रहा है। केंद्र सरकार की पोषण संबंधी पहल के तहत चलने वाला यह अभियान 9 सितंबर से 8 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगा। इस वर्ष इसकी थीम ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ रखी गई है। मध्यप्रदेश में भी महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से पूरे महीने इस अभियान से संबंधित गतिविधियां संचालित की जाएंगी।

राष्ट्रीय पोषण माह का मूल उद्देश्य कुपोषण की समस्या से निपटना, बच्चों और महिलाओं के पोषण स्तर में सुधार करना और पोषण को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। इसके तहत गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, बच्चों और किशोरियों को संतुलित आहार, स्तनपान, स्वास्थ्य देखभाल और पोषण संबंधी जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है। साथ ही कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं से जोड़ने की व्यवस्था की जाती है।

मध्यप्रदेश में आंगनवाड़ी केंद्रों के जरिए होगा क्रियान्वयन

राष्ट्रीय पोषण माह केंद्र सरकार के पोषण अभियान के व्यापक उद्देश्यों से जुड़ा जनभागीदारी आधारित अभियान है। मध्यप्रदेश में इसका क्रियान्वयन आंगनवाड़ी केंद्रों और महिला एवं बाल विकास विभाग के मैदानी अमले के माध्यम से किया जाएगा। अभियान को सिर्फ सरकारी कार्यक्रम न रखते हुए पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, आशा कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय समुदाय की भागीदारी से जनआंदोलन का रूप देने की कोशिश होगी।

मुख्यमंत्री ने किया जनभागीदारी का आह्वान

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 9वें राष्ट्रीय पोषण माह के शुभारंभ पर कहा कि पोषण सिर्फ भोजन तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि स्वस्थ बचपन, बेहतर स्वास्थ्य और सशक्त भविष्य की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि बच्चों के समुचित विकास के लिए उन्हें पौष्टिक और संतुलित आहार उपलब्ध कराने के साथ गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और किशोरियों के पोषण पर भी विशेष ध्यान देना जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि “पोषण की मजबूत नींव, स्वस्थ बचपन की पहचान और सशक्त भविष्य की शुरुआत” है। उन्होंने प्रदेशवासियों से राष्ट्रीय पोषण माह में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान करते हुए कहा कि हर बच्चे के स्वस्थ विकास और हर परिवार के बेहतर पोषण के लिए सरकार के प्रयासों के साथ समाज और समुदाय की सहभागिता भी जरूरी है।

इंदौर से होगा शुभारंभ

मध्यप्रदेश में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह का राज्य स्तरीय शुभारंभ महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया इंदौर से करेंगीं। इसके बाद 8 अक्टूबर तक प्रदेश के जिलों, परियोजनाओं, सेक्टरों और आंगनवाड़ी केंद्रों पर अलग-अलग गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इस बार अभियान में स्थानीय और मौसमी खाद्य पदार्थों, पर्याप्त प्रोटीन, आहार विविधता, बच्चों के पोषण और प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के पात्र हितग्राहियों को शत-प्रतिशत लाभ दिलाने के लिए भी विशेष अभियान चलेगा।

पोषण मेलों में स्थानीय खाद्य पदार्थों से बताएंगे संतुलित आहार का महत्व

पोषण माह के दौरान पंचायत भवनों, स्कूलों और सामुदायिक भवनों में पोषण मेले और रेसिपी प्रदर्शनियां आयोजित होंगी। इनमें स्थानीय दालें, चना, मूंगफली, सोया, दूध और दुग्ध उत्पाद, मिलेट्स तथा मौसमी सब्जियों से तैयार पौष्टिक व्यंजनों का प्रदर्शन किया जाएगा।

‘Know Your Protein—अपने प्रोटीन को पहचानें’ अभियान के जरिए लोगों को प्रोटीन के स्थानीय स्रोतों और संतुलित आहार के महत्व की जानकारी दी जाएगी। आंगनवाड़ी केंद्रों पर 3 से 6 वर्ष के बच्चों को दिए जाने वाले ताजा नाश्ते और गर्म पके भोजन की गुणवत्ता, मात्रा और स्वच्छता पर भी निगरानी रखी जाएगी।

11 सितंबर से बच्चों की पोषण जांच

अभियान के तहत 11 सितंबर से शारीरिक माप दिवस आयोजित होंगे। जन्म से 6 वर्ष तक के बच्चों का वजन, लंबाई और ऊंचाई समेत आवश्यक माप लेकर पोषण ट्रैकर में दर्ज किया जाएगा। इसका उद्देश्य कुपोषित बच्चों की समय पर पहचान करना और उन्हें आवश्यक पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना है। गंभीर तीव्र कुपोषण, मध्यम तीव्र कुपोषण और गंभीर रूप से कम वजन वाले बच्चों की पहचान कर उनका फॉलोअप किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र भेजा जाएगा।

बच्चे के पहले 1000 दिन पर रहेगा विशेष फोकस

राष्ट्रीय पोषण माह में गर्भावस्था से बच्चे के जीवन के पहले 1000 दिनों को विशेष महत्व दिया जाएगा। इस दौरान गर्भवती महिलाओं और परिवारों को पर्याप्त पोषण, स्तनपान, शिशु देखभाल और संवेदनशील पालन-पोषण के बारे में जागरूक किया जाएगा।

0 से 3 वर्ष के बच्चों वाले परिवारों से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता गृह भेंट के जरिए संपर्क करेंगे। बच्चों के शुरुआती विकास, खेल आधारित गतिविधियों और अभिभावकों की भूमिका पर भी जानकारी दी जाएगी। कहानी, गीत, चित्रकला, खेल और पपेट शो जैसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के संज्ञानात्मक, भाषा, मोटर और सामाजिक-भावनात्मक विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।

PMMVY के पात्र हितग्राहियों को शत-प्रतिशत लाभ दिलाने पर जोर

अभियान के दौरान प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत पात्र गर्भवती और धात्री महिलाओं का शत-प्रतिशत पंजीयन और लाभ सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। लंबित भुगतान, सत्यापन, स्वीकृति और डीबीटी से जुड़े मामलों का निराकरण प्राथमिकता से किया जाएगा। पहले बच्चे की दूसरी किश्त के लिए जरूरी टीकाकरण की पोर्टल पर प्रविष्टि और दूसरे प्रसव में बालिका होने पर पात्र महिलाओं को योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन करने के लिए प्रेरित भी किया जाएगा।

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  Sports

BCCI और राज्य संघ Sports Governance Act के तहत क्यों नहीं? Supreme Court का बड़ा सवाल

उच्चतम न्यायालय ने भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (बीसीसीआई) और प्रदेश क्रिकेट संघों से पूछा है कि वे राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम 2025 के दायरे में क्यो नहीं आ सकते। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और वी मोहना ने मंगलवार को बीसीसीआई के मामले में कुछ क्रिकेट ईकाइयों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान यह बात कही। पीठ ने बीसीसीआई और प्रदेश संघों के वकीलों से यह भी कहा कि वे इस बारे में निर्देश लें कि उनके पदाधिकारियों की सेवा की शर्ते 2025 के उस अधिनियम के तहत क्यो नहीं आनी चाहिये जो अब लागू हो चुका है।

न्यायालय 2014 में दायर बीसीसीआई से जुड़ीएक याचिका पर सुनवाई कर रहा है और समय समय पर इस मामले में कई आवेदन दाखिल हो चुके हैं। इससे पहले न्यायालय ने सुधार के उपाय सुझाने के लिए पूर्व सीजेआई जस्टिस आर एम लोढ़ा की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था। समिति को दी गई जिम्मेदारियों में बीसीसीआई के लिए संविधान तैयार करना भी शामिल था।

न्यायालय ने बीसीसीआई के ढांचे, संगठन और कामकाज में सुधार से जुड़ी समिति की अनुशंसाओं को स्वीकार कर लिया था। न्यायालय ने सितंबर 2022 में बीसीसीआई के संविधान में बदलाव की मंजूरी दी थी और कहा था कि कोई पदाधिकारी लगातार 12 साल तक पद पर रह सकता है। इसमें तीन साल के कूलिंग ऑफ पीरियड (अनिवार्य ब्रेक) से पहले राज्य संघ में छह साल और बीसीसीआई में छह साल का कार्यकाल शामिल है।

इसमें कहा गया था कि कोई पदाधिकारी किसी पद पर लगातार दो कार्यकाल पूरे कर सकता है जिसमें बीसीसीआई और प्रदेश संघ स्तर पर कार्यकाल शामिल है। इसके बाद उसे तीन साल का अनिवार्य ब्रेक लेना होगा।

Wed, 09 Sep 2026 14:26:00 +0530

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