इंदौर में अंडरग्राउंड मेट्रो के रूट पर विरोध, रहवासियों की मांग- घरों के नीचे से नहीं गुजरे मेट्रो
इंदौर में मेट्रो का विस्तार शहर के लिए बड़ी सुविधा माना जा रहा है, लेकिन खजराना से पलासिया के बीच बनने वाली अंडरग्राउंड मेट्रो को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को प्रभावित इलाकों के रहवासी अपनी मांग को लेकर सड़क पर उतरे। लोगों ने रैली निकालकर विरोध जताया और कहा कि विकास के काम का वे विरोध नहीं कर रहे, लेकिन मेट्रो की सुरंग उनके घरों के नीचे से नहीं निकाली जानी चाहिए।
खजराना से पलासिया के बीच करीब 1700 मीटर हिस्से में मेट्रो को भूमिगत बनाया जाना है। इस रूट में गोयल नगर, तिलक नगर और साईंनाथ कॉलोनी सहित कई इलाके आते हैं। रहवासियों का कहना है कि अगर मेट्रो लाइन उनके मकानों के नीचे से जाती है तो उन्हें भविष्य में घरों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहेगी। इसी वजह से वे सड़क के नीचे से मेट्रो निकालने की मांग कर रहे हैं।
अंडरग्राउंड मेट्रो को लेकर रहवासियों की चिंता
रहवासियों का कहना है कि उन्होंने करीब दो महीने पहले भी मेट्रो अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बावजूद जब उनकी मांग पर कोई स्पष्ट समाधान नहीं निकला तो मंगलवार को उन्होंने दोबारा अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सामने अपनी बात रखी।
लोगों की मुख्य चिंता उनके मकानों और जमीन को लेकर है। उनका कहना है कि मेट्रो निर्माण के दौरान किसी तरह की समस्या आने पर इसकी जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। रहवासी चाहते हैं कि निर्माण शुरू होने से पहले उन्हें रूट और सुरक्षा से जुड़ी पूरी जानकारी दी जाए।
महापौर से मिले रहवासी
मंगलवार दोपहर करीब एक बजे रहवासी विधायक महेंद्र हार्डिया और क्षेत्रीय पार्षद राजेश उदावत के साथ महापौर पुष्यमित्र भार्गव से मिलने पहुंचे। बैठक में मेट्रो के जीएम रणवीर सिंह राजपूत और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
इस दौरान रहवासियों ने अपनी आपत्ति सामने रखी। मेट्रो अधिकारियों ने उन्हें समझाने की कोशिश की और बताया कि भूमिगत मेट्रो का फैसला कैबिनेट और जनप्रतिनिधियों की सहमति से लिया गया है। अधिकारियों ने संभावित प्रभाव और नुकसान होने की स्थिति में मुआवजे की व्यवस्था के बारे में भी जानकारी दी।
तिलक नगर में निकाली गई विरोध रैली
मंगलवार शाम करीब सात बजे महावीर नगर, संविद नगर और तिलक नगर के रहवासियों ने भी विरोध रैली निकाली। इसके बाद तिलक नगर कम्युनिटी हॉल में बैठक हुई। इसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने हिस्सा लिया और अंडरग्राउंड मेट्रो के रूट को लेकर चर्चा की।
बैठक में मेट्रो अधिकारी भी पहुंचे। अधिकारियों ने रहवासियों को बताया कि भूमिगत मेट्रो से घरों की नींव को नुकसान नहीं होगा। अगर किसी का बोरिंग प्रभावित होता है तो मुआवजा देने के साथ वैकल्पिक बोरिंग की व्यवस्था भी की जाएगी।
पहले एलिवेटेड मेट्रो का भी हुआ था विरोध
खजराना से पलासिया के बीच मेट्रो निर्माण को लेकर पहले भी विवाद हो चुका है। इस हिस्से में पहले एलिवेटेड मेट्रो बनाने की योजना थी। उस समय भी जनप्रतिनिधियों और स्थानीय रहवासियों ने इसका विरोध किया था।
विरोध के बाद मेट्रो प्रबंधन ने इस हिस्से को भूमिगत करने का फैसला लिया। अब भूमिगत मेट्रो को लेकर भी रहवासी विरोध कर रहे हैं। यानी एलिवेटेड से अंडरग्राउंड करने के बाद भी स्थानीय लोगों और परियोजना से जुड़े अधिकारियों के बीच सहमति नहीं बन पाई है।
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