Amavasya 2026: सितंबर में दो दिन अमावस्या, 10 या 11 सितंबर किस दिन रखें व्रत? दूर करें कन्फ्यूजन
Bhadrapada Amavasya 2026 Date: सितंबर 2026 में भाद्रपद अमावस्या को लेकर तारीखों का कन्फ्यूजन है। पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 10 सितंबर की सुबह शुरू होकर 11 सितंबर की सुबह समाप्त होगी। ऐसे में सवाल है कि पिठोरी अमावस्या का व्रत कब रखा जाएगा और स्नान-दान व पितरों के लिए तर्पण किस दिन करना उचित माना जाता है। आइए जानते हैं अमावस्या की तिथि और इससे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी।
Bhadrapada Amavasya 2026: 10 या 11 सितंबर, कब है अमावस्या?
हिंदू पंचांग में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। भाद्रपद महीने की अमावस्या को कई जगहों पर पिठोरी अमावस्या और कुशग्रहणी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन व्रत, पूजा, स्नान, दान और पितरों के निमित्त तर्पण करने की परंपरा है।
इस बार अमावस्या तिथि को लेकर इसलिए असमंजस है, क्योंकि इसकी तिथि दो तारीखों को स्पर्श कर रही है। पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 10 सितंबर 2026, गुरुवार को सुबह 10 बजकर 33 मिनट से शुरू होगी और 11 सितंबर को सुबह 8 बजकर 56 मिनट पर समाप्त होगी।
10 सितंबर को रखा जाएगा पिठोरी अमावस्या का व्रत
अमावस्या तिथि के 10 सितंबर को शुरू होने के कारण पिठोरी अमावस्या का व्रत 10 सितंबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। धार्मिक परंपरा के अनुसार, इस दिन महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि और संतान के मंगल की कामना से व्रत रखती हैं। कई क्षेत्रों में पिठोरी अमावस्या के दिन विशेष पूजा की जाती है।
मान्यता के अनुसार, इस अवसर पर माता दुर्गा और 64 योगिनियों की पूजा का विशेष महत्व है। कुछ स्थानों पर महिलाएं आटे से देवी-देवताओं की आकृतियां बनाकर उनकी पूजा करती हैं। इसी परंपरा से इस अमावस्या को पिठोरी अमावस्या कहा जाता है।
11 सितंबर को स्नान-दान और तर्पण करना शुभ माना जाएगा
अमावस्या तिथि 11 सितंबर 2026 को सुबह 8 बजकर 56 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में 11 सितंबर की सुबह अमावस्या तिथि के दौरान स्नान-दान और पितरों के निमित्त तर्पण किया जा सकता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, अमावस्या के दिन पवित्र नदी, तीर्थ या किसी धार्मिक स्थल पर स्नान करने की परंपरा रही है। इसके बाद जरूरतमंदों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करने की मान्यता है।
पितरों के लिए क्यों महत्वपूर्ण मानी जाती है अमावस्या?
सनातन परंपरा में अमावस्या को पितरों के निमित्त किए जाने वाले कर्मों के लिए महत्वपूर्ण तिथि माना गया है। इस दिन लोग अपने पूर्वजों को याद करते हुए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध जैसे कर्म करते हैं।
भाद्रपद अमावस्या पर भी पितरों की शांति और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए जल अर्पित करने तथा जरूरतमंदों को दान देने की परंपरा है। मान्यता है कि श्रद्धा के साथ किए गए ऐसे कर्म पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम हैं।
भाद्रपद अमावस्या पर क्या करें?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस दिन सुबह स्नान के बाद पूजा-पाठ किया जाता है। इसके अलावा अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य और पितरों के निमित्त तर्पण किया जाता है।
ध्यान रखें: पूजा, व्रत, तर्पण और दान की विधि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों की परंपराओं के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग या विद्वान से समय और विधि की पुष्टि करना बेहतर रहेगा।
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