Skin Care Tips: चेहरे का ग्लो बढ़ाने में मदद करेंगी किचन की 5 चीजें, हर कोई पूछेगा कैसे आया निखार!
Skin Care Tips: चेहरे पर नेचुरल निखार पाने के लिए हमेशा महंगे कॉस्मेटिक्स की जरूरत नहीं होती। आपकी किचन में मौजूद कई सामान्य चीजें त्वचा की देखभाल में मदद कर सकती हैं। शहद, दही, बेसन, ओट्स और एलोवेरा जैसी चीजों का इस्तेमाल सदियों से घरेलू स्किन केयर में किया जाता रहा है। सही तरीके और सीमित मात्रा में इस्तेमाल करने पर ये त्वचा को साफ, मुलायम और हाइड्रेटेड रखने में मदद कर सकती हैं।
हालांकि, घरेलू नुस्खे हर व्यक्ति की त्वचा पर एक जैसा असर नहीं करते। संवेदनशील त्वचा पर किसी भी चीज को सीधे चेहरे पर लगाने से पहले पैच टेस्ट करना जरूरी है। खासकर नींबू जैसी अम्लीय चीजों को चेहरे पर सीधे लगाने से जलन और धूप के प्रति संवेदनशीलता बढ़ सकती है। ऐसे में सुरक्षित और सौम्य विकल्पों को प्राथमिकता देना बेहतर है।
चेहरे का निखार बढ़ाएंगी किचन की ये चीजें
शहद से पाएं मुलायम त्वचा
शहद में प्राकृतिक ह्यूमेक्टेंट गुण होते हैं, यानी यह त्वचा में नमी बनाए रखने में मदद कर सकता है। एक चम्मच शहद को चेहरे पर हल्की परत के रूप में लगाया जा सकता है। करीब 10 मिनट बाद सामान्य पानी से चेहरा धो लें। इससे त्वचा मुलायम और हाइड्रेटेड महसूस हो सकती है। अगर शहद से एलर्जी है तो इसका इस्तेमाल न करें।
दही करेगा त्वचा को हाइड्रेट
सादा दही त्वचा को नमी देने के साथ उसमें मौजूद लैक्टिक एसिड के कारण हल्की एक्सफोलिएशन में भी मदद कर सकता है। चेहरे पर ताजा और बिना चीनी वाला दही लगाकर कुछ मिनट के लिए छोड़ सकते हैं। इसके बाद पानी से चेहरा धो लें। संवेदनशील त्वचा वालों को पहले थोड़ी मात्रा पर पैच टेस्ट करना चाहिए।
बेसन से करें हल्की क्लीनिंग
बेसन भारतीय घरों में लंबे समय से उबटन के रूप में इस्तेमाल होता रहा है। इसे सादे पानी या दही के साथ मिलाकर हल्का पेस्ट बनाया जा सकता है। चेहरे पर लगाकर सूखने के बाद जोर से रगड़ने के बजाय पानी से धीरे-धीरे साफ करें। इससे त्वचा की सतह पर जमा अतिरिक्त तेल और गंदगी हटाने में मदद मिल सकती है।
ओट्स से त्वचा को मिलेगी राहत
बारीक पिसे ओट्स त्वचा के लिए एक सौम्य विकल्प हो सकते हैं। इनमें ऐसे घटक होते हैं जो त्वचा को शांत करने और नमी बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। ओट्स को पानी या दही के साथ मिलाकर नरम पेस्ट तैयार करें। इसे चेहरे पर लगाएं और कुछ देर बाद बिना रगड़े धो लें। खासकर रूखी या संवेदनशील त्वचा के लिए यह अपेक्षाकृत सौम्य विकल्प है।
एलोवेरा से मिलेगी ठंडक और नमी
एलोवेरा जेल त्वचा को ठंडक और नमी देने के लिए लोकप्रिय है। अगर ताजा एलोवेरा इस्तेमाल कर रहे हैं तो केवल साफ किया हुआ जेल लें और पीले लेटेक्स वाले हिस्से को त्वचा से दूर रखें। थोड़ी मात्रा चेहरे पर लगाकर कुछ देर बाद धो सकते हैं।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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लेखक: (कीर्ति)
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Jamun Seed Benefits: जामुन का खट्टा-मीठा स्वाद तो आपने खूब लिया होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस फल की गुठली को भी पारंपरिक रूप से उपयोग में लाया जाता रहा है? जामुन खाने के बाद अक्सर लोग इसकी गुठली फेंक देते हैं, जबकि इसे सुखाकर पाउडर के रूप में इस्तेमाल करने की परंपरा कई जगहों पर रही है। खासतौर पर पाचन और ब्लड शुगर से जुड़े घरेलू उपायों में जामुन की गुठली का जिक्र मिलता है।
हालांकि, किसी भी घरेलू नुस्खे को इलाज का विकल्प नहीं मानना चाहिए। जामुन की गुठली में कई जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं और इस पर वैज्ञानिक शोध भी हुआ है, लेकिन इसके स्वास्थ्य लाभों को लेकर उपलब्ध प्रमाण हर दावे के लिए समान रूप से मजबूत नहीं हैं। ऐसे में इसे सीमित मात्रा में और विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही इस्तेमाल करना बेहतर है।
जामुन गुठली पाउडर सेवन के लाभ
ब्लड शुगर मैनेजमेंट में मदद
जामुन की गुठली को पारंपरिक रूप से ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसमें मौजूद कुछ यौगिक कार्बोहाइड्रेट के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, जामुन गुठली पाउडर डायबिटीज की दवा का विकल्प नहीं है। खासतौर पर दवा लेने वाले लोगों को इसका इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए, क्योंकि ब्लड शुगर जरूरत से ज्यादा कम होने का जोखिम हो सकता है।
पाचन के लिए हो सकती है उपयोगी
जामुन की गुठली में मौजूद कुछ प्राकृतिक यौगिक पाचन तंत्र के लिए संभावित रूप से फायदेमंद माने जाते हैं। पारंपरिक चिकित्सा में इसके पाउडर का इस्तेमाल पाचन संबंधी परेशानियों में किया जाता रहा है। हालांकि, कब्ज, लगातार पेट दर्द या अन्य गंभीर समस्या होने पर केवल घरेलू नुस्खे पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर
जामुन की गुठली में पॉलीफेनॉल और अन्य जैव सक्रिय घटक पाए जाते हैं, जिनमें एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि देखी गई है। एंटीऑक्सीडेंट शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से निपटने में भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि जामुन की गुठली पर पोषण और स्वास्थ्य से जुड़े शोध में रुचि बनी हुई है।
सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पर शोध
जामुन की गुठली में मौजूद पौधों से प्राप्त यौगिकों में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट प्रभावों की संभावना पर अध्ययन हुए हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि गुठली किसी बीमारी या सूजन का इलाज कर सकती है। फिलहाल इसे संभावित स्वास्थ्य गुणों के रूप में ही देखना बेहतर है।
पारंपरिक स्वास्थ्य उपायों में इस्तेमाल
जामुन की गुठली का पाउडर आयुर्वेदिक और पारंपरिक घरेलू उपयोगों में लंबे समय से चर्चा में रहा है। इसे सुखाकर पीसकर इस्तेमाल करने की परंपरा है। लेकिन मात्रा और सेवन का तरीका व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और दवाओं पर निर्भर कर सकता है। इसलिए नियमित सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह लेना समझदारी है।
कैसे तैयार करें जामुन गुठली पाउडर?
जामुन खाने के बाद गुठलियों को अच्छी तरह धोकर साफ करें और धूप में पूरी तरह सुखा लें। सूखने के बाद इन्हें पीसकर पाउडर बनाया जा सकता है। इसे लंबे समय तक रखने के लिए एयरटाइट कंटेनर में रखें। गर्भवती महिलाओं, बच्चों और डायबिटीज की दवा लेने वाले लोगों को बिना विशेषज्ञ की सलाह के इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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