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जर्मनी की दक्षिणपंथी पार्टी का चेहरा एलिस वीडल कैसे बनीं:खुद लेस्बियन, पार्टनर श्रीलंका में जन्मी; फिर भी समलैंगिक शादी और प्रवासियों के खिलाफ

जर्मनी के सैक्सोनी-आनहाल्ट में सितंबर 2026 के चुनाव में अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (AfD) ने बड़ी जीत हासिल की है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है, जब जर्मनी में कोई दक्षिणपंथी पार्टी किसी राज्य में इतनी बड़ी जीत के साथ सत्ता के करीब पहुंची है। AfD दूसरे देशों से आकर जर्मनी में बसे लोगों और समलैंगिक शादी के खिलाफ अपने सख्त रुख के लिए जानी जाती है। लेकिन इस पार्टी की कहानी में एक बात सबसे ज्यादा चौंकाती है। AfD की चीफ एलिस वीडल खुद लेस्बियन हैं। उनकी पार्टनर श्रीलंका में जन्मी हैं। यानी जिस पार्टी की नीतियां समलैंगिक शादी और प्रवासियों के खिलाफ हैं, उसी पार्टी की सबसे ताकतवर नेता की अपनी निजी जिंदगी इससे बिल्कुल अलग है। जर्मनी में AfD के बढ़ते प्रभाव के पीछे वीडल का बड़ा हाथ माना जाता है। लेकिन उनकी राजनीति को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि आखिर एलिस वीडल कौन हैं और वह ऐसी पार्टी का चेहरा कैसे बनीं, जिसकी सोच उनकी अपनी जिंदगी से बिल्कुल अलग है? बचपन: दादा हिटलर समर्थक थे, घर छोड़कर भागना पड़ा जर्मन अखबार डाय वेल्ट के मुताबिक वीडल का बचपन ऐसे माहौल में बीता, जहां राजनीति को लेकर काफी चर्चा होती थी। हालांकि, उनके माता-पिता किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े नहीं थे। वीडल के दादा हंस वीडल हिटलर की नाजी पार्टी से जुड़े हुए थे। इस दौरान उनकी काफी तरक्की हुई। हिटलर ने उन्हें 1941 में नाजी कब्जे वाले वारसॉ में सैन्य न्यायधीश बनाया था। वीडल परिवार तब सिलेसिया में रहता था। यह अब पोलैंड का इलाका है। द्वितीय विश्व युद्ध में जब हिटलर की हार हुई तो वे भागकर पश्चिमी जर्मनी पहुंचे। यहां वीडल परिवार ने फर्नीचर का काम शुरू किया। 1979 में एलिस वीडल का जन्म हुआ। वह सिर्फ 6 साल की थीं, जब उनके दादा की मौत हो गई। एलिस के मुताबिक, नाजी शासन के दौरान उनके दादा ने क्या काम किए थे, इस बारे में परिवार में कभी बातचीत नहीं हुई। टीचर को चिढ़ाने के लिए मर्सिडीज से स्कूल जाती थीं अपने स्कूली दिनों को लेकर वीडल ने बताया कि उनके स्कूल के ज्यादातर शिक्षक वामपंथी विचारधारा से प्रभावित थे। वह कहती हैं, वे मुझे पसंद नहीं करते थे और मैं भी उन्हें पसंद नहीं करती थी। उनको चिढ़ाने के लिए मैं अपने पिता की मर्सिडीज से स्कूल जाती थी स्कूली दिनों में वीडल डॉक्टर बनना चाहती थीं। लेकिन उनके पिता इसके खिलाफ थे। उनका कहना था कि डॉक्टर की पूरी जिंदगी बीमार लोगों के बीच गुजरती है। ऐसे पेशे में जाने का कोई मतलब नहीं है। पिता की सलाह पर वीडल ने इकोनॉमिक्स और बिजनेस की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने बैंकिंग और बिजनेस में करियर शुरू किया। कुछ समय उन्होंने अमेरिकी इनवेस्टमेंट कंपनी गोल्डमैन सैक्स में काम किया। इसके बाद वह चीन चली गईं। मंदारिन सीखी, चीन की अर्थव्यवस्था समझी चीन में वीडल ने बैंक ऑफ चाइना में काम किया और 5 साल तक वहां रहीं। इसी दौरान उन्होंने मंदारिन यानी चीनी भाषा सीखी और बिजनेस कंसल्टेंट के तौर पर भी काम किया। चीन में रहते हुए उनकी दिलचस्पी वहां की अर्थव्यवस्था में बढ़ी और उन्होंने चीन की पेंशन व्यवस्था के भविष्य पर रिसर्च शुरू की। 2011 में उन्होंने इसी विषय पर डॉक्टरेट पूरी की और फिर जर्मनी लौट आईं। वीडल अर्थशास्त्र पढ़ चुकी थीं, बैंक में काम कर चुकी थीं और चीन में कई साल बिता चुकी थीं। यानी राजनीति में आने से पहले ही उन्हें पैसे, कारोबार और दुनियादारी की अच्छी समझ हो गई थी। प्यार-परिवार: पार्टनर के ताना मारने पर राजनीति में एंट्री साल 2007 में वीडल की मुलाकात सारा बॉसार्ड से हुई। सारा स्विट्जरलैंड की फिल्म निर्माता हैं। सारा का जन्म श्रीलंका में हुआ था। जब वह सिर्फ तीन महीने की थीं, तब स्विट्जरलैंड के एक पादरी दंपती ने उन्हें गोद ले लिया था। वीडल और सारा की दोस्ती धीरे-धीरे रिश्ते में बदल गई। दोनों 2009 से साथ हैं। वे स्विट्जरलैंड में अपने दो बेटों के साथ रहती हैं और मिलकर उनकी परवरिश करती हैं। सारा बोसार्ड ने दोनों बच्चों को स्पर्म डोनेशन की मदद से जन्म दिया। दोनों बच्चों के जैविक पिता अलग-अलग पुरुष हैं। यह कोई गुमनाम स्पर्म बैंक का मामला नहीं था। वीडल और सारा दोनों बच्चों के जैविक पिताओं को जानती हैं और बच्चों को भी अपने जैविक पिता की पहचान पता है। हालांकि, इन दोनों पुरुषों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। वीडल के मुताबिक, AfD में शामिल होने का आइडिया उन्हें उनकी पार्टनर सारा से ही मिला था। एक पार्टी में वीडल लगातार यूरोपीय संघ की राजनीति पर बातें किए जा रही थीं। उनकी लंबी-लंबी बातें सुनकर सारा परेशान हो गईं। उन्होंने वीडल से कहा, अगर राजनीति पर इतनी ही बातें करनी हैं तो खुद राजनीति में क्यों नहीं चली जातीं? सारा की यह बात वीडल के मन में बैठ गई… राजनीति: देखते ही देखते AfD का सबसे बड़ा चेहरा बन गईं 2013 में वीडल नई-नई बनी AfD पार्टी से जुड़ गईं। उस समय पार्टी का मुख्य मुद्दा प्रवासी या समलैंगिक विवाह नहीं, बल्कि यूरो और यूरोजोन संकट था। AfD इस बात के खिलाफ थी कि जर्मनी आर्थिक संकट से जूझ रहे दूसरे यूरोपीय देशों को लगातार पैसे दे। वीडल भी यूरो को लेकर जर्मनी की नीतियों की आलोचना करती थीं। यही वजह थी कि वह इस नई पार्टी के साथ जुड़ीं। AfD में शामिल होने के बाद वीडल का कद तेजी से बढ़ने लगा। कुछ ही समय में वह पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व में पहुंच गईं। उनकी पहचान ऐसी नेता के तौर पर बनने लगी, जो आर्थिक मामलों को अच्छी तरह समझती थीं और पार्टी की बात को मीडिया के सामने मजबूती से रख सकती थीं। 2015 में बदली AfD की सियासत, शरणार्थी को सबसे बड़ा मुद्दा बनाया फिर आया 2015, वह साल जिसने जर्मनी की राजनीति की दिशा बदल दी। सीरिया में 2011 से चल रहा गृहयुद्ध और ज्यादा हिंसक हो चुका था। अपनी जान बचाने के लिए लाखों लोग घर छोड़कर सुरक्षित ठिकाने की तलाश में निकल पड़े। सिर्फ सीरिया ही नहीं, अफगानिस्तान, इराक और कुछ दूसरे देशों में युद्ध और हिंसा से परेशान लोग भी यूरोप की ओर बढ़ने लगे। कुछ ही महीनों में यूरोप पहुंचने वाले शरणार्थियों की संख्या तेजी से बढ़ गई और बड़ी संख्या में लोग जर्मनी पहुंचने लगे। शरणार्थी संकट AfD के लिए बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया। यानी जो पार्टी शुरुआत में यूरो और आर्थिक मुद्दों को लेकर बनी थी, वह धीरे-धीरे प्रवासियों और शरणार्थियों के विरोध के लिए पहचानी जाने लगी। एक साल बाद 2016 में AfD ने अपना पहला घोषणापत्र जारी किया। इसमें समलैंगिता का विरोध भी जुड़ गया। पार्टी ने स्कूलों में सेक्स और यौन विविधता से जुड़ी शिक्षा का विरोध किया। विरोधाभास: लेस्बियन होकर भी समलैंगिक शादी के खिलाफ यहीं एलिस वीडल और AfD को लेकर विरोधाभाष दिखता है। जो पार्टी प्रवासियों और समलैंगिक विवाह के खिलाफ है, उसी पार्टी की सबसे बड़ी नेता खुद एक समलैंगिक महिला हैं और एक अप्रवासी महिला के साथ परिवार चला रही हैं। जब वीडल से पूछा गया कि वह खुद लेस्बियन होने के बावजूद ऐसी पार्टी की नेता क्यों हैं, जो समलैंगिक अधिकारों का विरोध करती है, तो उनका जवाब था कि उनका लेस्बियन होना और AfD की नेता होना ही एक बड़ा राजनीतिक संदेश है। वीडल का कहना है कि समलैंगिक लोगों के लिए सबसे बड़ा खतरा कुछ मुस्लिम गिरोहों से है। उनका तर्क है कि अगर जर्मनी दूसरे देशों से आने वाले लोगों की संख्या पर रोक लगाए और आव्रजन को सख्त करे, तो समलैंगिक लोगों की सुरक्षा बढ़ेगी। यानी वीडल अपनी लेस्बियन पहचान को AfD से अलग नहीं देखतीं। वह इसी पहचान का हवाला देकर पार्टी की प्रवासियों को लेकर सख्त नीति का बचाव करती हैं। यही विरोधाभास उन्हें AfD का एक अलग तरह का चेहरा बनाता है। 2017 में वीडल ने खुद कहा था कि उनकी निजी जिंदगी और पार्टी की पारिवारिक नीति में पूरी तरह समानता नहीं है। उन्होंने यह भी माना था कि वह परिवार नीति के मामले में पार्टी लाइन से ज्यादा उदार हैं। वीडल समलैंगिक शादी को कानूनी मान्यता देने के खिलाफ रही हैं। हालांकि, वह समलैंगिक जोड़ों को कानूनी पार्टनरशिप देने के पक्ष में हैं। कानूनी पार्टनरशिप का मतलब है शादी किए बिना भी दो लोगों के रिश्ते को कानून की मान्यता मिल जाए और उन्हें संपत्ति, मेडिकल फैसलों और कुछ आर्थिक या पारिवारिक मामलों में कानूनी अधिकार मिल सकें। जर्मनी की अगली चांसलर की रेस में 2013 में बनी AfD को उसी साल के चुनाव में 4.7% वोट मिले थे। अब हाल के सर्वे में पार्टी को करीब 27-28% वोट मिल रहे हैं। यानी करीब एक दशक में AfD का समर्थन कई गुना बढ़ गया है। पूर्वी जर्मनी में मजबूत पकड़: सैक्सोनी और थुरिंगिया जैसे राज्यों में AfD का मजबूत आधार है। हाल ही में सैक्सोनी-अनहाल्ट में पार्टी को करीब 44% वोट मिले, जो उसका अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन है। अब AfD सबसे बड़ी चुनौती सरकार बनाने की होगी। जर्मनी की दूसरी बड़ी पार्टियां अब तक AfD के साथ गठबंधन करने से इनकार करती रही हैं। इसलिए सिर्फ सबसे ज्यादा वोट मिल जाना वीडल के चांसलर बनने के लिए काफी नहीं होगा। उन्हें सरकार बनाने के लिए दूसरी पार्टियों का समर्थन भी हासिल करना होगा। यही तय करेगा कि AfD की बढ़ती ताकत 2029 में एलिस वीडल को जर्मनी की चांसलर की कुर्सी तक पहुंचा पाती है या नहीं। -------------------------- यह खबर भी पढ़ें… जर्मनी में पहली बार कट्टरपंथी AfD पार्टी ने चुनाव जीता:यूरोप में दक्षिणपंथी पार्टियों का दबदबा बढ़ा, फ्रांस में ले-पेन, ब्रिटेन में नाइजल फराज मजबूत पूर्वी जर्मनी के छोटे से राज्य सैक्सोनी-अनहाल्ट में रविवार को दक्षिणपंथी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (AfD) ने बड़ी जीत हासिल की। यूरोप में शायद पहली बार हुआ है जब किसी राज्य चुनाव के नतीजे को लोकतंत्र के भविष्य से इतना जोड़कर देखा गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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मेटा का पर्सनल AI एजेंट लॉन्च, अभी केवल अमेरिका में:खुद ईमेल भेजेगा, पेमेंट करेगा म्यूज; यूजर्स को खरीदारी-बिजनेस प्लानिंग में भी मदद मिलेगी

मेटा ने मंगलवार को 18 साल और उससे ज्यादा उम्र के लोगों के लिए पर्सनल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एजेंट ‘म्यूज’ लॉन्च किया। यह रोजमर्रा के कामों जैसे शेड्यूल बनाने और खरीदारी में मदद करेगा। मेटा के मुताबिक, यह लंबे समय के टारगेट को एक्शन प्लान में बदलने में भी मदद कर सकता है। म्यूज अभी सिर्फ US में उपलब्ध है। मेट का कहना है कि इसके सेफ्टी-प्राइवेसी फीचर्स को खास हैं। एजेंट सुरक्षित वर्चुअल मशीन पर चलता है, जिसमें एजेंट और यूजर का डेटा दोनों सुरक्षित रहते हैं। यूजर म्यूज के अलग ऐप पर या वॉट्सऐप के जरिए उससे बात कर सकते हैं। यह ईमेल भेजने और यात्रा बुक करने जैसे छोटे काम कर सकता है। साथ ही, सालभर का एक्सरसाइज प्लान बनाने या नया बिजनेस शुरू करने जैसे लंबे समय के टारगेट पर भी काम कर सकता है। ऐसी रहेगी म्यूज की वर्किंग यूजर जब म्यूज के साथ अपना टारगेट शेयर करेगा, तो यह उसके लिए पर्सनलाइज्ड प्लान बनाने में मदद करेगा। इसके बाद यह यूजर के समय और संसाधनों को व्यवस्थित कर काम को आगे बढ़ाएगा। म्यूज ब्राउजर खोल सकता है, फॉर्म भर सकता है। यूजर की ओर से बातचीत यानी नेगोशिएशन भी कर सकता है। टेक कंपनियां AI एजेंट्स को चैटबॉट्स के बाद की अगली तकनीक बता रही हैं। चैटबॉट सवालों के जवाब दे सकते हैं और जानकारी खोज सकते हैं, लेकिन वे यूजर की ओर से काम नहीं करते। चैटबॉट से कैसे अलग है AI एजेंट अपने सबसे सामान्य रूप में AI एजेंट एक ट्रेडीशनल कंप्यूटर प्रोग्राम की तरह काम करता है। ऐसा प्रोग्राम किसी काम को पूरा करने के लिए बनाया जाता है, जैसे कोई ऐप खोलना। जब इसे AI के लार्ज लैंग्वेज मॉडल के साथ जोड़ा जाता है, तो यह बिना हर कदम का निर्देश दिए काम पूरा करने के लिए जरूरी जानकारी खोज सकता है। मसलन, यह सिर्फ ईमेल का ड्राफ्ट तैयार करने में मदद नहीं करेगा। यह मैसेज पढ़कर यह समझने की कोशिश कर सकता है कि यूजर क्या जवाब देना चाहता है और फिर अपने आप जवाब भेज सकता है। मार्क जुकरबर्ग का AI विजन मेटा के लिए यह एजेंट CEO मार्क जुकरबर्ग के उस विजन का हिस्सा है, जिसमें AI सुपरइंटेलिजेंस हर व्यक्ति के लिए उपलब्ध हो। उन्होंने पिछले महीने ऑनलाइन प्रकाशित 6,500 शब्दों के एक निबंध में अपना विजन बताया था। आलोचकों ने इस दस्तावेज को कल्पनाओं से भरा हुआ बताया। जुकरबर्ग ने इसमें लिखा कि मेटा ऐसे दौर की ओर बढ़ रही है, जहां हर व्यक्ति के पास नए बिजनेस बनाने, Ph.D लेवल की पढ़ाई में मदद लेने और अपनी जरूरत के मुताबिक लाइफस्टाइल सलाह पाने के टूल होंगे। जुकरबर्ग ने लिखा, “हर व्यक्ति के पास एक बेहद सक्षम पर्सनल एजेंट होगा, जो आपको, आपके लक्ष्यों और आपकी हर अहम चीज को समझेगा। आपका एजेंट आपके रिश्तों, सेहत, करियर, वित्त, घर के काम, शौक और दूसरी चीजों को बेहतर बनाने के लिए 24 घंटे, सातों दिन आपकी ओर से काम करेगा।” यह एजेंट उन चीजों के लिए समय बचाएगा, जिन्हें लोग पसंद करते हैं और उन्हें वह हासिल करने में मदद करेगा, जो वे इसके बिना नहीं कर पाते। ----------------- ये खबर भी पढ़ें… मस्क बोले- अगले साल इंसानों से ज्यादा समझदार हो जाएगा AI, डिजिटल काम चुटकियों में करेगा, इंटरनेट और हैकिंग के लिए बनेगा बड़ा खतरा दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी इलॉन मस्क का कहना है कि AI बहुत तेजी से इंसानों जैसी समझ हासिल कर रहा है। अगले साल के अंत तक यह कंप्यूटर और इंटरनेट से जुड़े कामों में इंसानों से भी आगे निकल जाएगा। मस्क ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट का जवाब देते हुए यह बात कही। पढ़ें पूरी खबर…

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वनडे में सबसे ज्यादा ओवर मेडन फेंकने वाले 7 स्पिन गेंदबाज, एक ने 198 ओवर में नहीं दिए 1 भी रन

7 spin bowlers most maiden over in ODI: वनडे क्रिकेट में रन रोकना और 'मेडन ओवर' फेंकना किसी भी गेंदबाज के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है. जहां छोटे मैदान और पावरप्ले के नियमों के बीच अमूमन तेज गेंदबाज ही कंजूस गेंदबाजी के लिए जाने जाते हैं, वहीं दुनिया के सात महान स्पिनरों ने अपनी सटीक लाइन-लेंथ और फिरकी के जाल से बल्लेबाजों को तरसा कर रख दिया. मुथैया मुरलीधरन ने बतौर स्पिनर वनडे में सर्वाधिक मेडन ओवर डाले हैं. उनके बाद शेन वॉर्न, अनिल कुंबले, शाकिब अल हसन, डेनियल विटोरी, हरभजन सिंह और शाहिद अफरीदी का नंबर आता है. Wed, 9 Sep 2026 19:00:10 +0530

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रात में मिलने पहुंचा प्रेमी, लोगों ने... | #viral #shorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-09T13:37:06+00:00

Iran America war : टैकरों में लगी आग,ईरान-अमेरिका की जंग हुई और तेज!| Tankers Attacked in Hormuz | #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-09T13:41:25+00:00
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