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पूजा के बाद दीपक को फूंक मारकर बुझाना चाहिए या नहीं? जानें इसके पीछे की धार्मिक मान्यता

Diya phoonk se bujhana chahiye ya nahi: हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के दौरान दीपक जलाने की परंपरा बहुत पुरानी है। मंदिर हो या घर का पूजा स्थल, भगवान के सामने दीपक जलाना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में दीपक को प्रकाश, ज्ञान और सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है।

सुबह और शाम पूजा के समय कई घरों में दीपक जलाया जाता है। खासतौर पर घी और तेल के दीपक का उपयोग धार्मिक परंपराओं के अनुसार किया जाता है।

दीपक को फूंक मारकर बुझाने से क्यों बचते हैं लोग?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा में जलाए गए दीपक को फूंक मारकर बुझाना उचित नहीं माना जाता। इसके पीछे यह धारणा है कि दीपक को पवित्र अग्नि का प्रतीक माना जाता है और पूजा के दौरान जलाया गया दीपक श्रद्धा से जुड़ा होता है।

कई परिवारों में परंपरा है कि दीपक को अपनी लौ के साथ स्वयं शांत होने दिया जाए। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और पारिवारिक परंपराओं में इस संबंध में अलग मान्यताएं हो सकती हैं।

दीपक बुझ जाए तो क्या करना चाहिए?
कई बार हवा या तेल खत्म होने के कारण दीपक अपने आप बुझ जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इसे लेकर अलग-अलग धारणाएं प्रचलित हैं, लेकिन सामान्य तौर पर इसे अशुभ संकेत मानना जरूरी नहीं है।

यदि पूजा के दौरान दीपक बुझ जाए और जरूरत हो तो श्रद्धा के साथ उसे दोबारा जलाया जा सकता है। यह पूरी तरह व्यक्ति की धार्मिक परंपरा और आस्था पर निर्भर करता है।

घी और तेल के दीपक में क्या है अंतर?
धार्मिक परंपराओं में घी और तेल दोनों के दीपक जलाने का प्रचलन है। अलग-अलग देवी-देवताओं और पूजा अवसरों के अनुसार श्रद्धालु अपनी परंपरा के मुताबिक दीपक जलाते हैं।

कई धार्मिक मान्यताओं में घी के दीपक को विशेष पूजा और शुभ अवसरों से जोड़ा जाता है, जबकि तेल के दीपक का उपयोग भी विभिन्न पूजा-पद्धतियों में किया जाता है।

शाम को दीपक जलाने की क्यों है परंपरा?
संध्या के समय घर में दीपक जलाने की परंपरा भी लंबे समय से चली आ रही है। कई परिवारों में सूर्यास्त के बाद घर के मंदिर या मुख्य द्वार पर दीपक जलाया जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि शाम के समय दीपक जलाने से घर में शुभता और सकारात्मक वातावरण बना रहता है। यही कारण है कि यह परंपरा आज भी कई परिवारों में निभाई जाती है।

दीपक जलाते समय किन बातों का रखें ध्यान?
दीपक को हमेशा सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए और उसके आसपास ज्वलनशील वस्तुएं नहीं होनी चाहिए। पूजा के दौरान बच्चों और पालतू जानवरों से भी जलते दीपक को दूर रखना जरूरी है।

धार्मिक दृष्टि से पूजा करते समय स्वच्छता और श्रद्धा को महत्व दिया जाता है, जबकि व्यावहारिक रूप से आग से जुड़ी सुरक्षा का ध्यान रखना भी आवश्यक है।

आज भी घरों में निभाई जाती है दीपक जलाने की परंपरा
बदलती जीवनशैली के बावजूद दीपक जलाने की परंपरा भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन का अहम हिस्सा बनी हुई है। रोज की पूजा से लेकर दीपावली और अन्य धार्मिक पर्वों तक दीपक का विशेष महत्व माना जाता है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, लोकविश्वासों और पारंपरिक प्रथाओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इन मान्यताओं व परंपराओं में अंतर हो सकता है। इसे केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है।

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