Ladli Behna Yojana : कैसे मिलेगा “मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना” का लाभ, एक क्लिक में जानिए यहां सबकुछ
MP Ladli Behna Yojana 2023 : मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने आज रविवार 5 मार्च को अपने जन्मदिन के मौके पर लाखों महिलाओं को बड़ी सौगात देते हुए मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना का शुभारंभ किया।इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को 1000 रुपए महीना और 12000 सालाना ऱाशि खातों में भेजी जाएगी।
इस योजना के लिए 25 मार्च से 30 अप्रैल तक आवेदन भरे जाएंगे। मई माह में आवेदनों की जाँच होगी और 10 जून को पहली किस्त बहनों के बैंक खातों में जमा कर दी जाएगी। जिन बहनों के बैंक खाते नहीं हैं, उनके खाते खुलवाने में भी मदद की जाएगी।
हर महीने बहनों को एक-एक हजार रूपए उपलब्ध कराने की व्यवस्था योजना में की गई है। जिन परिवारों की वार्षिक आय ढाई लाख रूपए से कम है, जिनके पास 5 एकड़ से कम भूमि है और जिन परिवारों में कोई आयकर दाता नहीं हो, ऐसे परिवारों की 23 से 60 आयु वर्ग की बहनें योजना के लिए पात्र हैं।
बहनों को योजना में आवेदन करने के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं है। हर गाँव और हर वार्ड में शिविर लगाए जाएंगे और आवेदन भरने में मदद करने के लिए कर्मचारियों को जिम्मेदारी दी जाएगी। ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के वार्डों में शिविरों की जानकारी पहले से दी जाएगी।
आवेदन के लिए समग्र आईडी नम्बर और आधार नम्बर आवश्यक है। मूल निवासी और आय प्रमाण-पत्र आदि की आवश्यकता नहीं है। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बहनें योजना का लाभ लेने के लिए किसी भी बिचौलिए और दलाल के झाँसे में न आएँ। कोई भी कठिनाई होने पर फोन नम्बर 181 पर सूचना दी जाए।
‘UP में शूट करते तो सर्टिफिकेट दे देते’, फिल्म ‘सहिया’ पर मचे विवाद के बीच संजय शर्मा का बड़ा दावा, कोर्ट जाने की तैयारी
मुंबई। फिल्म ‘सहिया’ के सर्टिफिकेशन को लेकर निर्माता-निर्देशक संजय शर्मा और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। संजय शर्मा का कहना है कि उनकी फिल्म नक्सलवाद को बढ़ावा देने वाली नहीं, बल्कि नक्सलियों और पुलिस के संघर्ष के बीच फंसे आदिवासी दंपती की प्रेम कहानी है। इसके बावजूद फिल्म के कंटेंट को नक्सलवाद से जोड़कर देखे जाने और सर्टिफिकेट नहीं मिलने पर उन्होंने CBFC की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
इस पूरे विवाद के बीच संजय शर्मा ने एक और बड़ा दावा किया है। उनके मुताबिक, सेंसर बोर्ड से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने उनसे कहा था कि अगर फिल्म की शूटिंग उत्तर प्रदेश में हुई होती तो उसे सर्टिफिकेट दे दिया जाता। शर्मा ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि कहानी और फिल्म वही रहने पर सिर्फ शूटिंग की जगह बदलने से उसका मतलब कैसे बदल सकता है।
जंगल और आदिवासी इलाका दिखाने पर नक्सलवाद कैसे?
संजय शर्मा का कहना है कि उन्होंने फिल्म को वास्तविक रूप देने के लिए जंगल और आदिवासी इलाकों में शूटिंग की। उनका तर्क है कि कहानी में जंगल, नदियां, झरने और आदिवासी जीवन दिखाना था, इसलिए वास्तविक लोकेशन पर शूटिंग की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि केवल जंगल और आदिवासी इलाके की पृष्ठभूमि होने से किसी फिल्म को नक्सलवाद से कैसे जोड़ा जा सकता है।
निर्माता का कहना है कि ‘सहिया’ में नक्सलवाद या हिंसा का समर्थन नहीं किया गया है। उनके मुताबिक फिल्म का केंद्रीय विचार प्रेम और इंसानी रिश्ते हैं और इसमें हिंसा को समस्या का समाधान बताने के बजाय उसके खिलाफ बात की गई है।
सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया में देरी पर भी सवाल
संजय शर्मा ने CBFC की प्रक्रिया को लेकर भी नाराजगी जाहिर की है। उनका आरोप है कि priority category में आवेदन करने के बावजूद फिल्म की स्क्रीनिंग तय समय में नहीं हुई। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि फिल्म के आखिर किस सीन या डायलॉग को नक्सलवाद से प्रेरित माना गया, इसकी स्पष्ट जानकारी उन्हें क्यों नहीं दी गई। ‘सहिया’ की शूटिंग झारखंड के नेतरहाट क्षेत्र में भी हुई है। फिल्म में रिंकू राजगुरु, शांतनु माहेश्वरी और नीरज काबी प्रमुख भूमिकाओं में हैं।
सर्टिफिकेट नहीं मिला तो हाई कोर्ट जाने की तैयारी
संजय शर्मा ने साफ किया है कि अगर सर्टिफिकेशन को लेकर उनके पक्ष में फैसला नहीं आता है तो वह कानूनी रास्ता अपनाएंगे। उन्होंने हाई कोर्ट जाकर पूरे मामले की जांच की मांग करने की बात कही है। फिलहाल उनकी नजर CBFC की प्रक्रिया और अगले फैसले पर है।
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