जहरीली शराब के खिलाफ उज्जैन में कांग्रेस का प्रदर्शन, डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा का पुतला जलाया
मध्य प्रदेश के सागर में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के मामले को लेकर उज्जैन में कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। दरअसल मंगलवार शाम करीब 5 बजे बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी शहर कांग्रेस कार्यालय के बाहर क्षीरसागर चौराहे पर पहुंचे। यहां कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा का पुतला जलाया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने आबकारी व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल उठाए और कहा कि व्यवस्था की कमी के कारण जहरीली शराब लोगों तक पहुंच रही है।
दरअसल कांग्रेस के प्रदर्शन में सागर की घटना को लेकर सरकार से जवाब मांगने के साथ ही मामले की जांच की मांग भी उठाई गई। शहर कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश भाटी ने कहा कि सागर में हुई घटना बेहद गंभीर है। उनका आरोप है कि सरकार की ओर से मौतों का आंकड़ा कम बताया गया है और वास्तविक संख्या इससे ज्यादा हो सकती है। कांग्रेस ने पूरे मामले की निष्पक्ष और गंभीर जांच कराने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए आबकारी व्यवस्था को लेकर अपनी नाराजगी जताई।
कांग्रेस ने मांगा डिप्टी सीएम का इस्तीफा
कांग्रेस ने आबकारी मंत्री और डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा से इस मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत इस्तीफा देने की मांग की। दरअसल पार्टी का कहना है कि जहरीली शराब लोगों तक पहुंचने के मामले में सरकार की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसी के साथ कांग्रेस ने सागर में जहरीली शराब से जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के लिए 50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की मांग की है। पार्टी ने यह भी कहा कि प्रत्येक मृतक के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जानी चाहिए। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इन्हीं मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए और कार्रवाई की मांग की।
सरकार से जिम्मेदारी तय करने की मांग की
शहर कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश भाटी ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि जहरीली शराब का मामला केवल सागर तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक उज्जैन में भी पहले इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं। कांग्रेस ने आबकारी व्यवस्था में कमी का आरोप लगाते हुए सरकार से इस मामले में जिम्मेदारी तय करने की मांग की। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जहरीली शराब से होने वाली मौतों के मामले में केवल जांच की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
वहीं मंगलवार को हुए प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी शामिल हुए। कार्यकर्ताओं ने क्षीरसागर चौराहे पर सरकार के खिलाफ नारे लगाए और डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा का पुतला जलाया।
राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट का निर्देश:चेक बाउंस मामले में सरेंडर से छूट के लिए 5 करोड़ रुपए जमा करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक्टर राजपाल यादव को निर्देश दिया कि चेक बाउंस मामले में सरेंडर से छूट पाने की शर्त के तौर पर वे बुधवार तक कोर्ट की रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपए जमा करें। यह मामला फिल्म प्रोड्यूसर-फाइनेंसर मुर्ली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है। कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के 10 जुलाई के फैसले को चुनौती देने वाली यादव की याचिका पर सशर्त नोटिस जारी किया। हाईकोर्ट ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत सात मामलों में उनकी दोषसिद्धि और तीन महीने की सजा बरकरार रखी थी। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। चीफ जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने यादव की याचिका पर मौखिक रूप से सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें सजा काटने के लिए सरेंडर करने का निर्देश दिया था, जिसकी अंतिम तारीख 10 सितंबर थी। यह मामला मुर्ली प्रोजेक्ट्स की ओर से यादव, उनकी पत्नी राधा राजपाल यादव और उनकी फिल्म प्रोडक्शन कंपनी के खिलाफ दायर सात शिकायतों से जुड़ा है। ये शिकायतें फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए जारी सात चेक बाउंस होने के बाद दर्ज की गई थीं। मामले के रिकॉर्ड के मुताबिक, मुर्ली प्रोजेक्ट्स ने 2010 में फिल्म पूरी करने के लिए 5 करोड़ रुपए दिए थे। फिल्म की रिलीज में देरी के बाद पक्षों के बीच कई समझौते हुए और अलग-अलग चरणों में रकम की वापसी की राशि में बदलाव किया गया। यादव की याचिका में कहा गया है कि मूल लेन-देन फिल्म में निवेश था, कर्ज नहीं, और चेक सिक्योरिटी के तौर पर दिए गए थे। अगस्त 2012 के तीसरे सप्लीमेंट्री एग्रीमेंट के तहत आठ पोस्ट-डेटेड चेक जारी किए गए थे और भुगतान की जिम्मेदारी फिल्म की रिलीज से जोड़ी गई थी। 2012 में मुर्ली प्रोजेक्ट्स ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था विवाद बढ़ने के बाद मुर्ली प्रोजेक्ट्स ने 2012 में फिल्म को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को फिल्म के अधिकारों में तीसरे पक्ष का हित बनाने से रोक दिया। इसके बाद सात चेक बाउंस होने पर एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत सात शिकायतें दर्ज की गईं। यादव की ओर से बाद में हुए 21 अप्रैल 2013 के सहमति समझौते पर भी जोर दिया गया है। इसके तहत दोनों पक्षों ने 10.40 करोड़ रुपए के पूर्ण और अंतिम समझौते पर सहमति जताई थी, जिसमें 40 लाख रुपए आरटीजीएस के जरिए पहले ही दिए जा चुके थे। समझौते की सुरक्षा के लिए चार नए पोस्ट-डेटेड चेक जारी किए गए थे। यादव की याचिका के मुताबिक, इस समझौते के तहत पहले जारी किए गए आठ सिक्योरिटी चेक वापस किए जाने थे, लेकिन मुर्ली प्रोजेक्ट्स ने बाउंस हुए चेक के मामलों को आगे बढ़ाया। सुप्रीम कोर्ट में यादव ने कहा कि बाद के समझौते के बाद मूल शिकायतें जारी नहीं रह सकतीं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के ‘जिम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम मनोज गोयल’ फैसले का हवाला देते हुए कहा कि समझौता होने के बाद पुराने चेक के बाउंस से जुड़ी शिकायत खत्म हो जाती है और नए समझौते के तहत जारी चेक बाउंस होने पर ही नया मामला बन सकता है। 2018 में ट्रायल कोर्ट ने राजपाल को दोषी ठहराया था ट्रायल कोर्ट ने अप्रैल 2018 में सातों मामलों में यादव और अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया था। शुरुआत में यादव को हर मामले में छह महीने की जेल और 1.60 करोड़ रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। बाद में सजा कम की गई। 22 मई 2019 को उन्हें सातों मामलों में तीन महीने की साधारण कैद और प्रत्येक मामले में 1.35 करोड़ रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई। सभी सजाएं साथ-साथ चलने का आदेश दिया गया। सेशंस कोर्ट ने 2024 में दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए तीन महीने की सजा और प्रत्येक मामले में 1.35 करोड़ रुपए का जुर्माना कायम रखा। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने 10 जुलाई 2026 के फैसले में सजा में दखल देने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने प्रोबेशन की मांग खारिज की थी हाईकोर्ट ने यादव की प्रोबेशन की मांग भी खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक चली कार्यवाही के दौरान उनके आचरण और विवाद सुलझाने के लिए दिए गए कई मौकों को देखते हुए उन्हें प्रोबेशन का लाभ नहीं दिया जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा था कि यादव ने शिकायतकर्ता को भुगतान करने के लिए कई बार आश्वासन दिए, लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया। कार्यवाही के दौरान करीब 2.25 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया था, लेकिन बाद में यादव ने और भुगतान करने से इनकार कर दिया। हालांकि, हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि पहले जमा कर मुर्ली प्रोजेक्ट्स को दी गई 2.25 करोड़ रुपए की राशि को जुर्माने के तौर पर देय रकम में समायोजित किया जाए। सुप्रीम कोर्ट के मंगलवार के आदेश से राजपाल यादव को फिलहाल सरेंडर से अंतरिम राहत मिली है। यह राहत 9 सितंबर तक रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपए जमा करने की शर्त पर है। …………… यह खबर भी पढ़ें... राजपाल यादव बोले- जिनका पैसा बकाया है, घर पहुंचा दूंगा:कहा- 13 साल में 250 करोड़ का नुकसान हुआ; घर नीलाम कर रहा बैंक बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव ने चेक बाउंस और कर्ज विवाद के बीच दावा किया था कि पिछले 13 साल में उन्हें 200 से 250 करोड़ रुपए का निजी नुकसान हुआ है। न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में 55 साल के एक्टर ने कहा था कि वे एक जिम्मेदार इंसान हैं और जिन लोगों का पैसा बकाया है, वे उसे चुका देंगे या उनके घर तक पहुंचा देंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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