Satya Niketan PG collapse: दिल्ली पुलिस ने मरम्मत कराने वाले Contractor को कासगंज से पकड़ा
नयी दिल्ली, आठ सितंबर दक्षिण पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी इमारत में मरम्मत कार्य कराने वाले ठेकेदार को उत्तर प्रदेश के कासगंज से गिरफ्तार कर लिया गया है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के दक्षिण परिसर के पास स्थित यह पीजी भवन रविवार दोपहर ढह गया था जिससे सात लोगों की मौत हो गई और पांच अन्य जख्मी हो गए।
पुलिस के मुताबिक, पिछले 8-10 दिनों से बारिश के कारण इमारत के भूमिगत तल में कचरा जमा हो रहा था, इसलिए उसकी सफाई और मरम्मत का काम किया जा रहा था। पुलिस ने बताया कि भूतल पर व्यावसायिक उपयोग के लिए जगह बढ़ाने का काम किया जा रहा था। पुलिस यह काम करा रहे ठेकेदार की तलाश में थी।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि ठेकेदार सनोज को कासगंज में पकड़ लिया गया है और उसे दिल्ली लाया जा रहा है। इस मामले में पुलिस इमारत की मालकिन 75 वर्षीय उर्मिला गुप्ता, वायु सेना से सेवानिवृत्त 81 साल के उनके पति हरिराम गुप्ता और उनके बेटे महेश गुप्ता (52) को गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान, महेश ने कहा कि वह अपने माता-पिता की ओर से इमारत के रखरखाव का प्रबंधन करता था और परिवार ने अगस्त, 2025 में पीजी संचालक ‘हॉस्टल डेज’ को यह इमारत पट्टे पर दी थी।
अधिकारी ने बताया कि रविवार को गुप्ता परिवार को स्थानीय लोगों से इमारत ढहने के बारे में पता चला और इसके बाद वे अपना घर छोड़कर राजस्थान के भिवाड़ी में अपने रिश्तेदार के यहां छुप गए थे। इससे पहले दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार रात को गुप्ता दंपति को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। वहीं, उनके बेटे को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा है।
इस बीच एक सूत्र ने बताया कि मामले में सहायक उप निरीक्षक प्रफुल्ल टोप्पो की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है। प्राथमिकी के मुताबिक, जब पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो पूरी इमारत ढह गई थी और कई लोग मलबे में दबे हुए थे। संरचना में एक भूतल और चार ऊपरी मंजिलें थीं जिनमें कई छात्र और अन्य लोग रहते थे।
इसमें कहा गया है कि स्थानीय स्तर पर पूछताछ से पता चला कि इमारत कई साल पुरानी थी और इसके मालिकों ने कथित तौर पर किराये की आय के लिए मंजिलों का निर्माण किया था। प्राथमिकी में कहा गया है कि नए निर्माण से ढांचे पर दबाव पड़ा। पुलिस ने आरोप लगाया है कि मालिकों को पता था कि मौजूदा इमारत की नींव अतिरिक्त भार सहन नहीं कर सकती है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, दस्तावेज़ में लिखा है कि पीजी संचालक किरायेदारों के साथ होने वाली किसी भी जनहानि या खतरे के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे। इसमें कथित तौर पर यह भी कहा गया है कि छात्रावास सीलिंग, आग, भूकंप, भारी बारिश और अन्य प्राकृतिक आपदाओं सहित उसके नियंत्रण से परे परिस्थितियों के कारण व्यक्तिगत चोट, हानि या सामान की क्षति के लिए मुआवजे का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं होगा। समझौते में कहा गया है कि निर्धारित अवधि से पहले छात्रावास छोड़ने वाले किरायेदार छात्रावास शुल्क या सुरक्षा राशि को वापस पाने के हकदार नहीं होंगे।
इसमें कहा गया है कि पीजी आवास बुक करने के लिए भुगतान की गई पंजीकरण राशि वापस नहीं की जाएगी। समझौते के अनुसार, माता-पिता और अभिभावकों को किरायेदारों के कमरे में प्रवेश करने से प्रतिबंधित किया गया था।
भारत के किसी भी गांव ने 2021 तक नहीं हासिल किए कई SDG लक्ष्य: Lancet Study
नयी दिल्ली, आठ सितंबर भारत के किसी भी गांव ने 2021 तक कई सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को हासिल नहीं किया था, जिनमें बुनियादी सेवाओं तक पहुंच, स्वास्थ्य बीमा कवरेज और महिलाओं के बैंक खाते का स्वामित्व शामिल हैं। द लैंसेट रीजनल हेल्थ साउथईस्ट एशिया नामक इस पत्रिका में प्रकाशित एक शोध में यह जानकारी सामने आई है। हालांकि, अमेरिका के हार्वर्ड विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ और मुंबई के धीरूभाई अंबानी इंटरनेशनल स्कूल के शोधकर्ताओं समेत अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं के एक दल ने पाया कि लगभग सभी गांवों ने 10 से 14 वर्ष आयु वर्ग की किशोरियों में गर्भधारण रोकने के लक्ष्य को हासिल कर लिया था।
संयुक्त राष्ट्र ने 2015 में 17 सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को अपनाया था। इनका उद्देश्य 2030 तक गरीबी समाप्त करना, पृथ्वी की रक्षा करना और सभी लोगों के लिए शांति एवं समृद्धि सुनिश्चित करना है। शोधकर्ताओं ने कहा कि राष्ट्रीय और जिला स्तर पर एसडीजी की निगरानी से गांवों जैसे छोटे भौगोलिक क्षेत्रों में मौजूद असमानताएं छिप सकती हैं।
उन्होंने कहा कि गांव सेवा वितरण और स्थानीय प्रशासन के केंद्र में होते हैं, लेकिन ग्रामीण स्तर पर उपलब्ध आंकड़े सीमित हैं। शोधकर्ताओं के दल ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) 2019-21 और 2011 की जनगणना के आंकड़ों का विश्लेषण किया। शोधकर्ताओं ने कहा, ‘‘2021 तक किसी भी गांव ने स्वास्थ्य बीमा कवरेज, बुनियादी सेवाओं तक पहुंच, महिलाओं के बैंक खाते के स्वामित्व और इंटरनेट उपयोग जैसे कई एसडीजी लक्ष्यों को हासिल नहीं किया था।’’ इसके विपरीत, उन्होंने बताया कि 10 से 14 वर्ष की किशोरियों में गर्भधारण को रोकने के लक्ष्य को 99.9 प्रतिशत गांवों ने हासिल कर लिया था।
शोधकर्ताओं के दल ने कहा कि यह अध्ययन व्यापक स्तर पर किया गया है, जिसमें भारत के करीब छह लाख गांवों में आबादी के स्वास्थ्य और सामाजिक परिस्थितियों के आधार पर एसडीजी संकेतकों का गांव स्तर पर आकलन किया गया है। अध्ययन में पाया गया कि ग्रामीण स्तर पर बहुआयामी गरीबी का अनुमान 0.14 प्रतिशत से 78.82 प्रतिशत तक रहा, जबकि पुरुषों में स्वास्थ्य बीमा कवरेज 1.67 प्रतिशत से 94 प्रतिशत तक और इंटरनेट उपयोग 6.58 प्रतिशत से 92.93 प्रतिशत तक रहा। अध्ययन के अनुसार, लगभग सभी गांवों ने 10 से 14 वर्ष की किशोरियों में गर्भधारण रोकने के लक्ष्य को हासिल कर लिया था (99.9 प्रतिशत)।
वहीं, महिलाओं में तंबाकू सेवन (69.1 प्रतिशत), बहुआयामी गरीबी (33.6 प्रतिशत) और बेहतर जल सुविधा (32.4 प्रतिशत) से जुड़े लक्ष्यों को भी बड़ी संख्या में गांवों ने हासिल किया था। इसके विपरीत स्वास्थ्य बीमा कवरेज, बुनियादी सेवाओं तक पहुंच, मोबाइल फोन स्वामित्व, खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन, पूर्ण टीकाकरण, इंटरनेट उपयोग और साथी द्वारा हिंसा से जुड़े संकेतकों के लक्ष्य किसी भी गांव ने हासिल नहीं किए थे। अध्ययन में पाया गया कि एक ही जिले के भीतर और अलग-अलग गांवों के बीच काफी अंतर है।
शोधकर्ताओं ने कहा कि 2030 तक एसडीजी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए गांवों में तेज गति से सुधार की जरूरत होगी और केवल जिला स्तर की समान रणनीतियां पर्याप्त नहीं हो सकतीं।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi








