Satcom सेवाओं के लिए DCC ने TRAI की सिफारिशों को दी हरी झंडी
नयी दिल्ली, आठ सितंबर दूरसंचार विभाग के निर्णायक निकाय डिजिटल संचार आयोग (डीसीसी) ने उपग्रह संचार सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की अधिकांश सिफारिशों को मंजूरी दे दी है। मामले से जुड़े सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। एक सूत्र ने कहा कि डीसीसी की तीन सितंबर को हुई बैठक में उपग्रह संचार (सैटकॉम) पर ट्राई की सिफारिशों को मंजूरी दी गई।
अब दूरसंचार विभाग सैटकॉम सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम के मूल्य और आवंटन प्रक्रिया को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के पास भेजेगा। एलन मस्क की स्टारलिंक, भारती समूह समर्थित यूटेलसैट वनवेब और रिलायंस इंडस्ट्रीज की जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस को भारत में सैटकॉम सेवाएं शुरू करने की अनुमति मिल चुकी है। हालांकि, स्पेक्ट्रम आवंटन और सुरक्षा एजेंसियों से दूसरे चरण की सुरक्षा मंजूरी के बिना ये सेवाएं शुरू नहीं की जा सकतीं।
ट्राई ने मई, 2025 में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड के लिए स्पेक्ट्रम पांच साल के लिए आवंटित करने की सिफारिश की थी, जिसे दो साल और बढ़ाया जा सकता है। नियामक ने सैटकॉम सेवा प्रदाताओं से सालाना समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) का चार प्रतिशत स्पेक्ट्रम शुल्क लेने की सिफारिश की थी। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक दूरसंचार विभाग पांच प्रतिशत शुल्क लगाने के पक्ष में है।
स्टारलिंक और अमेजन की अनुषंगी कंपनी कुइपर सिस्टम्स ने ट्राई के साथ परामर्श के दौरान स्पेक्ट्रम शुल्क को एजीआर के एक प्रतिशत से कम रखने और कोई अन्य शुल्क नहीं लगाने की मांग की थी। ट्राई की सिफारिश है कि भूस्थिर कक्षा (जीएसओ) और गैर-भूस्थिर कक्षा (एनजीएसओ) दोनों के ऑपरेटर से एजीआर का चार प्रतिशत स्पेक्ट्रम शुल्क लिया जाएगा। इसके लिए न्यूनतम सालाना शुल्क 3,500 रुपये प्रति मेगाहर्ट्ज होगा।
एनजीएसओ में निचली पृथ्वी कक्षा (एलईओ) और मध्यम पृथ्वी कक्षा (एमईओ) में स्थित उपग्रह शामिल हैं। इसके विपरीत, जीएसओ उपग्रह पृथ्वी के सापेक्ष एक निश्चित स्थिति में रहते हैं। शहरी क्षेत्रों में सेवाएं देने वाले ऑपरेटर पर प्रति ग्राहक सालाना 500 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लगाने की भी सिफारिश की गई है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाओं पर ऐसा कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं होगा।
GTA में भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई होगी, दोषियों से वसूला जाएगा धन: Suvendu Adhikari
सिलीगुड़ी/कोलकाता, आठ सितंबर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन (जीटीए) से ‘भ्रष्टाचार’ को जड़ से उखाड़ फेंकने और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का संकल्प लिया। उन्होंने साथ ही नेपाल में हाल ही में आई अचानक बाढ़ के बाद हिमालय के पर्यावरण की नाजुक पारिस्थितिकी की चिंताओं के बीच राज्य के पहाड़ी इलाकों में सर्वांगीण और सतत विकास का वादा किया। शुभेंदु खराब मौसम के कारण पहाड़ी शहर कलिम्पोंग नहीं पहुंच पाए।
लेकिन सिलीगुड़ी से ही एक प्रशासनिक बैठक को ऑनलाइन माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि पहाड़ी इलाकों में विकास की गति बढ़ाने के लिए जीटीए का बजट दोगुना कर दिया गया है। उन्होंने साथ ही भ्रष्ट अधिकारियों को सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीटीए की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया, ‘अमृत’ पेयजल परियोजना और अतीत में 11 विकास बोर्ड के लिए जारी धन में कथित ‘गबन’ की गहन जांच की जाएगी।
उन्होंने सेवानिवृत्त न्यायाधीश बिस्वजीत बसु की अध्यक्षता में गठित जांच समिति का संदर्भ देते हुए कहा, ‘‘जिन लोगों ने सरकारी धन की लूट की है, उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा और पैसे की वसूली की जाएगी। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।’’ शुभेंदु ने कहा कि पहाड़ी इलाकों का विकास उनकी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने गृह और पहाड़ी मामलों के राज्य मंत्री विशाल लामा को इस विभाग की पूरी जिम्मेदारी और इसके कामकाज में पूरी आजादी दी है।’’ मुख्यमंत्री ने कलिमपोंग में नया चिकित्सा महाविद्यालय स्थापित करने की घोषणा करते हुए कहा कि उनके अगले दौरे के दौरान इसकी आधारशिला रखी जाएगी।
उन्होंने बैठक में बताया कि स्वास्थ्य सचिव को प्रस्तावित महाविद्यालय के लिए आवश्यक वित्तीय मंजूरी की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्वतीय प्रशासनिक निकाय के चेयरमैन और कई सदस्यों के इस्तीफे के बाद भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी स्मृतिरंजन मोहंती को इसका प्रशासक नियुक्त किया गया है। उन्होंने जीटीए को निर्देश दिया कि वे विकास परियोजनाओं में तेजी लाते समय स्थानीय सांसदों, विधायकों और जन-प्रतिनिधियों से विचार-विमर्श करें।
शुभेंदु ने बैठक में बताया कि सरकार ने उत्तरी ज़िलों में आपदा प्रबंधन व्यवस्था को मज़बूत करने के लिए 254 करोड़ रुपये मंज़ूर किए हैं। साथ ही, आपदा प्रबंधन और सिंचाई विभागों के प्रधान सचिव राजेश सिन्हा को पहाड़ी इलाकों में तैनात किया गया है ताकि वे तैयारियों की निगरानी और समन्वय कर सकें। उन्होंने कहा, ‘‘खराब मौसम की वजह से इस इलाके में भूस्खलन की घटनाएं हुई हैं।
हाल ही में मिरिक में भूस्खलन की एक बड़ी घटना हुई थी। हमने हाल ही में पड़ोसी देश नेपाल में एक बड़ी आपदा देखी है। हिमालयी इलाके में काम करते समय हमें अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी।
राज्य सरकार इस पर काम कर रही है और राजेश सिन्हा जी को हर तरह का सहयोग देगी। लोगों को इस बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है।
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