कांग्रेस विधायक बोले-सुंदर महिला की डेडबॉडी से होता है रेप:रीवा के अस्पताल पर आरोप; बोले- पोस्टमॉर्टम के नाम पर परिजनों से वसूली भी
मध्यप्रदेश के रीवा में कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने संजय गांधी अस्पताल को लेकर बेहद गंभीर आरोप लगाया है। मंगलवार को जयस्तंभ चौराहे पर कांग्रेस के धरना-प्रदर्शन के दौरान उन्होंने कहा कि अगर किसी सुंदर महिला की डेड बॉडी पोस्टमॉर्टम के लिए संजय गांधी अस्पताल लाई जाती है तो उसके साथ रेप होता है। विधायक ने पोस्टमॉर्टम के नाम पर मृतकों के परिजनों से रुपए वसूले जाने का आरोप भी लगाया। हालांकि, विधायक के इस गंभीर आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अस्पताल में पोस्टमॉर्टम के दौरान ऐसी किसी घटना की पुष्टि करने वाला कोई आधिकारिक तथ्य भी सामने नहीं आया है। अस्पताल में रोज 3 से 10 शवों का पोस्टमॉर्टम संजय गांधी अस्पताल में रोजाना कम से कम 3 और अधिकतम 7 से 10 शवों का पोस्टमॉर्टम किया जाता है। इनमें महिला और पुरुष दोनों के शव शामिल होते हैं। मृतकों में अलग-अलग उम्र के लोग होते हैं। अभय मिश्रा ने ये आरोप ऐसे समय लगाए हैं, जब संजय गांधी अस्पताल में प्रसूता कल्पना मिश्रा और उसके नवजात बच्चे की मौत को लेकर कांग्रेस का धरना चल रहा है। कांग्रेस इस मामले समेत अस्पताल की व्यवस्थाओं पर लगातार सवाल उठा रही है। कल्पना और नवजात की हो गई थी मौत कल्पना मिश्रा को प्रसव के लिए संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सी-सेक्शन के बाद उसकी और नवजात बच्चे की मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया। मामले में अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर कार्रवाई की गई है और जांच के आदेश भी दिए गए हैं। कांग्रेस ने अस्पताल से जुड़े इन मामलों पर सवाल उठाए 1. कल्पना-नवजात की मौत: पहली डिलीवरी के लिए भर्ती 25 वर्षीय कल्पना मिश्रा की इलाज के दौरान मौत हो गई। नवजात भी नहीं बच सका। परिजन ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया। अस्पताल अधीक्षक ने लापरवाही से इनकार किया था। मामले में **दो डॉक्टर और दो नर्सिंग स्टाफ को सस्पेंड किया गया, बाद में अस्पताल अधीक्षक को भी हटा दिया गया।** इसके बाद कल्पना के पिता ने जिम्मेदारों पर FIR और कार्रवाई की मांग को लेकर धरना शुरू किया। 2. जिंदा मरीज को मृत बताया: 5 सितंबर को संजय गांधी अस्पताल में इलाज करा रहे 66 वर्षीय गिरिजा प्रसाद गुप्ता को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। परिजन उन्हें शव वाहन तक ले गए। इसी दौरान मरीज की सांस चलती महसूस हुई और पल्स दोबारा चलने लगी। करीब एक घंटे बाद उन्हें मॉर्च्यूरी से वापस लाकर ICU में भर्ती किया गया। अस्पताल ने मामले की जांच की बात कही। 3. कुत्ते के काटने पर सांप का इंजेक्शन: 6-7 सितंबर को 18 वर्षीय आयुष सिंह ने आरोप लगाया कि कुत्ते के काटने के बाद एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने अस्पताल पहुंचा था। उसकी पर्ची पर ‘H/O U/K Snake Bite’ यानी अज्ञात सांप के काटने का उल्लेख किया गया और आरोप है कि उसे सांप के काटने वाला इंजेक्शन लगा दिया गया। बाद में दोबारा अस्पताल पहुंचने पर एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाया गया। अस्पताल ने जांच के बाद कार्रवाई की बात कही। 4. मरीज के शरीर में कीड़े पड़ने का आरोप: 7 सितंबर** को सतना निवासी अर्चना गुप्ता के परिजनों ने आरोप लगाया कि इलाज और देखरेख में लापरवाही के कारण उनके शरीर में कीड़े पड़ने जैसी स्थिति बन गई। परिजनों ने बेहतर इलाज के लिए रेफर नहीं करने और मरीज का वीडियो बनाने पर मोबाइल जब्त करने का भी आरोप लगाया। अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों को निराधार बताया और कहा कि मरीज का इलाज चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के अनुसार किया जा रहा है। 5.अस्पताल की बिल्डिंग से युवक के कूदने का मामला 31 अगस्त** को संजय गांधी अस्पताल की ऊपरी मंजिल से एक युवक के नीचे कूदने का मामला सामने आया था। युवक के अस्पताल की बिल्डिंग से गिरने के बाद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे थे। दिग्विजय सिंह ने स्वास्थ्य मंत्री का इस्तीफा मांगा पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह रीवा में कांग्रेस के धरने में शामिल हुए। उन्होंने संजय गांधी अस्पताल में जिंदा मरीज को मृत घोषित किए जाने और कल्पना-नवजात की मौत का जिक्र किया। स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल पर निशाना साधते हुए कहा- “स्वास्थ्य मंत्री को जिम्मेदार नहीं माना जाए तो किसे माना जाए?” उन्होंने मंत्री के इस्तीफे की मांग की और प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए। कल्पना के पिता भी एफआईआर की मांग को लेकर धरने पर इधर, कल्पना मिश्रा के पिता बेटी की मौत के मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर की मांग को लेकर अलग से आंदोलन कर रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि ठोस कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रहेगा। ------------------ इस मामले से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… जिस डॉक्टर को हटाया था, उसी से कराया इलाज मध्य प्रदेश शासन ने रीवा में 3 साल पहले जिस डॉ. सोनल अग्रवाल को सेवा से हटाने का फैसला लिया था, उसी से संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल के मरीजों का इलाज कराया जा रहा था। कल्पना मिश्रा और उसके नवजात बच्चे की मौत के मामले में इसी डॉ. अग्रवाल समेत 5 लोगों पर एक्शन लिया गया है। पूरी खबर पढ़ें…
दुनिया के सबसे ज्यादा कमाने वाले नेता की सैलरी बढ़ी:सिंगापुर के प्रधानमंत्री को हर साल ₹27 करोड़ मिलेंगे; यह PM मोदी से 135 गुना ज्यादा
सिंगापुर सरकार ने प्रधानमंत्री, मंत्रियों और दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों की सैलरी बढ़ाने का फैसला किया है। दुनिया के सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले नेताओं में शामिल प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग की सालाना कमाई अब करीब ₹11 करोड़ बढ़ जाएगी। वोंग को फिलहाल सालाना करीब 22 लाख सिंगापुर डॉलर (लगभग ₹16 करोड़) मिलते हैं। बढ़ोतरी के बाद उनका सालाना पैकेज करीब 36 लाख सिंगापुर डॉलर (लगभग ₹27 करोड़) हो जाएगा। यानी उनकी कमाई में 60% से ज्यादा का इजाफा होगा। तुलना करें तो भारत के प्रधानमंत्री मोदी की सालाना सैलरी करीब ₹20 लाख है। इस हिसाब से वोंग की नई सालाना कमाई मोदी की सैलरी से करीब 135 गुना ज्यादा होगी। मंत्रियों की सैलरी भी बढ़ेगी अभी सिंगापुर के मंत्रियों को सालाना करीब 11 लाख सिंगापुर डॉलर (₹8.20 करोड़) मिलते हैं। नई व्यवस्था में यह बढ़कर करीब 12 लाख डॉलर (₹8.95 करोड़) हो जाएगी। वोंग के मुताबिक, मौजूदा सरकार का कार्यकाल खत्म होने तक ज्यादातर मंत्रियों की सालाना कमाई 13.5 लाख डॉलर (करीब ₹10 करोड़) तक पहुंच सकती है। सैलरी का कुछ हिस्सा सरकार के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। रोजगार बढ़ाने, लोगों की आय बढ़ाने और GDP ग्रोथ जैसे लक्ष्यों को हासिल करने पर उनकी कमाई बढ़ सकती है। सरकार का तर्क- ज्यादा सैलरी से भ्रष्टाचार कम होगा सिंगापुर सरकार लंबे समय से मंत्रियों को ज्यादा सैलरी देने के फैसले का बचाव करती रही है। सरकार का कहना है कि मंत्रियों को अच्छी सैलरी मिलनी चाहिए, ताकि योग्य लोग राजनीति में आएं और भ्रष्टाचार से दूर रहें। सिंगापुर दुनिया के सबसे कम भ्रष्ट देशों में शामिल है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के करप्शन परसेप्शन इंडेक्स में भी वह लगातार ऊंची रैंकिंग पर रहा है। सरकार इसे अपनी ऊंची सैलरी वाली व्यवस्था के पक्ष में एक उदाहरण मानती है। आम लोगों में नाराजगी, नौकरी और महंगाई को लेकर चिंता सिंगापुर में मंत्रियों की इतनी ज्यादा सैलरी लंबे समय से विवाद का मुद्दा रही है। आम लोगों की कमाई इसके मुकाबले काफी कम है। देश में औसत सालाना आय 5,775 सिंगापुर डॉलर यानी करीब ₹4.30 लाख है। इस बार भी सैलरी बढ़ाने के फैसले की आलोचना हुई। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने कहा कि सरकार ने आम लोगों की परेशानियों को नजरअंदाज किया है। लोगों को नौकरी जाने, नए ग्रेजुएट्स को नौकरी मिलने और बढ़ती महंगाई की चिंता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछली तिमाही में नौकरी गंवाने वालों की संख्या 5 साल से ज्यादा समय में सबसे ज्यादा रही। हालांकि, कुछ लोगों ने सरकार के फैसले का समर्थन भी किया। उनका कहना था कि देश चलाने के लिए ‘सबसे अच्छे लोगों’ को जिम्मेदारी देना जरूरी है। ---------------------
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