संभल मस्जिद विवाद: मुस्लिम पक्ष की बहस पूरी, अब हिंदू पक्ष रखेगा अपनी दलील; SC में अहम सुनवाई
Sambhal Dispute: संभल की मस्जिद से जुड़े विवाद में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने मस्जिद परिसर के सर्वे के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किए जाने के आदेश पर गंभीर सवाल उठाए. मुस्लिम पक्ष की ओर से सीनियर एडवोकेट हुजेफा अहमदी ने दलील दी कि निचली अदालत ने कमिश्नर नियुक्त करने से पहले इस बात पर पर्याप्त विचार नहीं किया कि आखिर मौके पर जाकर जांच की जरूरत क्यों है. उन्होंने कहा कि सिर्फ यह मान लेना कि सर्वे से मदद मिल सकती है, कमिश्नर नियुक्त करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है.
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच के सामने हुई सुनवाई में अहमदी ने पूजा स्थल अधिनियम, 1991 और प्राचीन स्मारक एवं पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 से जुड़े कानूनी पहलुओं को भी उठाया. उनका कहना था कि पूजा स्थल अधिनियम की धारा 3 का उद्देश्य धार्मिक स्थलों के स्वरूप में बदलाव को रोकना है. उनके मुताबिक किसी प्राचीन स्मारक को संरक्षित करने का मतलब केवल उसकी इमारत को बचाना नहीं है, बल्कि उसके मौजूदा चरित्र को भी सुरक्षित रखना है. मस्जिद कमेटी की ओर से यह भी कहा गया कि मुकदमे में कुछ धार्मिक गतिविधियों के लिए परिसर में प्रवेश की मांग की गई है. अहमदी ने दलील दी कि इस तरह की मांग पर विचार करते समय उस स्थान के मौजूदा धार्मिक चरित्र को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
जानें सर्वे के मुद्दे को लेकर क्या बोला मुस्लिम पक्ष
सर्वे के मुद्दे पर मुस्लिम पक्ष ने खास तौर पर CPC के Order 26 Rule 9 का हवाला दिया. इस प्रावधान के तहत अदालत किसी विवाद को स्पष्ट करने के लिए स्थानीय जांच का आदेश दे सकती है, लेकिन इसके लिए अदालत को यह देखना होता है कि मौके की जांच वास्तव में जरूरी या उचित है. कमिश्नर अपनी जांच के बाद अदालत को रिपोर्ट देता है. अहमदी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि संभल मामले में ट्रायल कोर्ट के आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कमिश्नर को किस खास मुद्दे की जांच करनी है. उनका कहना था कि आदेश में केवल यह कहा गया कि सर्वे कराया जाना संभव है, लेकिन स्थानीय जांच की वास्तविक जरूरत पर अदालत ने पर्याप्त संतुष्टि दर्ज नहीं की. उन्होंने यह भी दलील दी कि कमिश्नर की नियुक्ति का आदेश एकतरफा तरीके से यानी दूसरे पक्ष को पर्याप्त अवसर दिए बिना पारित किया गया. अहमदी ने सवाल उठाया कि करीब 70 साल बाद मुकदमा दाखिल होने के बावजूद इतनी जल्दबाजी में सर्वे का आदेश क्यों दिया गया.
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सुनवाई के दौरान किया गया हिस्सा का जिक्र
सुनवाई के दौरान अहमदी ने संभल में सर्वे के बाद हुई हिंसा का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि उस दौरान स्थिति तनावपूर्ण हुई और पुलिस फायरिंग में छह लोगों की मौत हुई. उनके मुताबिक अचानक कमिश्नर के पहुंचने से नमाज भी बाधित हुई. हालांकि अदालत के सामने मुख्य कानूनी सवाल यह रहा कि क्या सर्वे का आदेश संबंधित कानूनी प्रावधानों और निर्धारित प्रक्रिया के मुताबिक था. मुस्लिम पक्ष ने यह भी कहा कि पूजा स्थल अधिनियम से जुड़े कुछ अन्य मामले पहले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं और उनमें बड़े बेंच के सामने कानून की व्याख्या का सवाल भी उठाया गया है. ऐसे में संभल मामले को उन मामलों के साथ देखा जाना चाहिए. अहमदी ने कहा कि 1991 के पूजा स्थल कानून और 1958 के प्राचीन स्मारक कानून को अलग-अलग देखने के बजाय उनके बीच के संबंध को भी समझना जरूरी है.
मस्जिद कमेटी ने यह दलील भी दी कि केवल इसलिए कि किसी समझौते में मुतवल्लियों को संरक्षक बताया गया है, इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उन्होंने संपत्ति पर अपना मालिकाना हक छोड़ दिया है. इस मुद्दे पर भी हाईकोर्ट के निष्कर्ष को चुनौती दी गई. अपनी दलीलों के अंत में अहमदी ने सहिष्णुता का जिक्र करते हुए कहा कि देश की परंपरा और संविधान दोनों ही आपसी सम्मान और सह-अस्तित्व की भावना पर जोर देते हैं. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का भी हवाला दिया.
अगली तारीख पर अपना दलीलें रखेगा हिंदू पक्ष
सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट निजाम पाशा ने भी पूजा स्थल अधिनियम और प्राचीन स्मारक कानून को साथ पढ़ने की जरूरत बताई. उनका कहना था कि दोनों कानूनों को अलग-अलग तरीके से पढ़ने पर कई व्यावहारिक और कानूनी मुश्किलें पैदा हो सकती हैं. सुप्रीम कोर्ट में इस चरण पर मुस्लिम पक्ष की ओर से बहस पूरी हो गई है. अब अगली तारीख पर हिंदू पक्ष अपनी दलीलें रखेगा. इसके बाद अदालत के सामने यह महत्वपूर्ण सवाल रहेगा कि मस्जिद परिसर के सर्वे के लिए एडवोकेट कमिश्नर की नियुक्ति का आदेश कानून और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप था या नहीं, साथ ही पूजा स्थल अधिनियम और प्राचीन स्मारक कानून से जुड़े व्यापक सवालों का इस मामले पर क्या असर पड़ता है.
Kal Ka Mausam: यूपी-बिहार समेत 21 राज्यों में मौसम ढाएगा कहर, अगले 20 घंटे में मूसलाधार बारिश का अलर्ट
कल का मौसम, 9 सितंबर: सितंबर के दूसरे सप्ताह में कदम रखते ही बादलों का मिजाज एक बार फिर बदल गया है. मानसून पूरी ताकत के साथ वापस लौट आया है और उसने देश के बड़े भूभाग को अपनी चपेट में ले लिया है. भारत मौसम विज्ञान विभाग ने ताजा आकलन के आधार पर देश के 21 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की गंभीर चेतावनी जारी की है. आने वाले समय में पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में मूसलाधार पानी गिरने की संभावना है. इसके साथ ही दक्षिण भारत के कई इलाकों में बादलों की गड़गड़ाहट, आकाशीय बिजली और तेज आंधी का संकट बना हुआ है. समुद्री इलाकों में हवा की गति पैंसठ किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जिसके कारण मौसम विभाग ने विशेष सावधानी बरतने को कहा है.
मौसम में आए इस बड़े बदलाव के पीछे वायुमंडलीय प्रणालियों का हाथ है. मध्य उत्तर प्रदेश के ऊपर मौजूद कम दबाव का क्षेत्र भले ही कमजोर पड़ चुका हो, लेकिन उससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण अब पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा पर पूरी तरह सक्रिय है. इसके साथ ही पश्चिमी विक्षोभ और आसपास मौजूद अन्य चक्रवाती हवाओं के घेरे मिलकर मौसम को लगातार बिगाड़ रहे हैं. इस वजह से पूरे देश में वर्षा का यह दौर अगले कुछ दिनों तक लगातार जारी रहने की पूरी उम्मीद है.
दिल्ली और आसपास के इलाकों में बादलों का डेरा
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के शहरों में रहने वाले लोगों के लिए मौसम मिलाजुला रहेगा. यहां तेज बारिश की कोई बड़ी चेतावनी नहीं दी गई है, लेकिन आसमान में बादलों की आवाजाही लगातार बनी रहेगी. दिन के समय धूप और बादलों के बीच आंख मिचौली का खेल चलता रहेगा. बीच-बीच में बादल घने हो सकते हैं, जिससे तीखी धूप से थोड़ी राहत मिलेगी. आसपास के राज्यों में चल रही मानसूनी हलचल का असर यहां की हवा और तापमान पर साफ नजर आएगा, जिससे वातावरण में ठंडक और नमी बनी रह सकती है.
उत्तर प्रदेश में चक्रवाती हवाओं का प्रभाव
उत्तर प्रदेश के ऊपर बना निम्न दबाव का क्षेत्र अब कमजोर पड़ चुका है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि खतरा टल गया है. इस सिस्टम से जुड़ा चक्रवाती हवाओं का घेरा अब पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के ऊपर अपनी ताकत दिखा रहा है. इस कारण राज्य के पूर्वी जिलों में मौसम काफी उग्र रह सकता है. कई स्थानों पर तेज बौछारें पड़ने और आकाशीय बिजली चमकने की आशंका है. वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आसपास पश्चिमी विक्षोभ का असर होने की वजह से वहां भी मौसम में अचानक बदलाव आ सकता है.
उत्तराखंड के पहाड़ी रास्तों पर बढ़ सकता है खतरा
पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में मौसम धीरे-धीरे गंभीर रूप ले सकता है. शुरुआती दौर में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की जाएगी, लेकिन असली आफत इसके बाद शुरू होने की आशंका है. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार दस से चौदह सितंबर के बीच राज्य के कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश हो सकती है. पहाड़ों पर तेज पानी गिरने का सीधा मतलब है कि चट्टानें दरक सकती हैं, रास्ते बंद हो सकते हैं और छोटी नदियां अचानक उफान पर आ सकती हैं. ऐसे में स्थानीय निवासियों और वहां घूमने जाने वाले यात्रियों को बेहद सतर्क रहने की सलाह दी गई है. यात्रा शुरू करने से पहले रास्तों की स्थिति और मौसम की जानकारी लेना बहुत जरूरी है.
बिहार और झारखंड में आकाशीय बिजली और आंधी का डर
पूर्वी भारत में बिहार पर मौसमी चक्रवात का सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा. राज्य के अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश का अनुमान लगाया गया है. इसके साथ ही तीस से चालीस किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली गिरने की गंभीर चेतावनी है. खेतों और खुले स्थानों में काम करने वाले लोगों के लिए यह स्थिति खतरनाक हो सकती है. वहीं पड़ोसी राज्य झारखंड में भी मानसून पूरी तरह मेहरबान रहेगा. वहां नौ से ग्यारह सितंबर तक भारी वर्षा का दौर चलेगा, जो चौदह सितंबर तक रुक-रुक कर बना रह सकता है. ऐसे खराब मौसम के दौरान लोगों को सुरक्षित पक्के मकानों में रहने की सलाह दी गई है.
ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी जलभराव की आशंका
ओडिशा के लिए आने वाले कुछ दिन काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं. राज्य में नौ सितंबर से शुरू होने वाली बारिश दस सितंबर को और अधिक विकराल रूप ले सकती है. बंगाल की खाड़ी के पास ग्यारह सितंबर के आसपास एक नया निम्न दबाव का क्षेत्र बनने जा रहा है, जिससे ओडिशा के तटीय इलाकों में भारी से बहुत भारी वर्षा का संकट गहरा जाएगा. दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भी मानसून जमकर बरसेगा. पूर्वोत्तर के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश से जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर सकता है.
दक्षिण भारत और समुद्र तटीय इलाकों में तेज हवाओं का प्रकोप
दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी और तेलंगाना में गरज-चमक के साथ पचास किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं. केरल और तटीय आंध्र में उमस भरा वातावरण लोगों को बेहाल करेगा, हालांकि बीच-बीच में तेज बौछारें राहत देंगी. अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में मौसम बेहद अशांत रहेगा. समुद्र में तूफानी हवाओं के चलने के कारण मछुआरों को गहरे पानी में न जाने की कड़ी हिदायत दी गई है.
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