‘लव लॉटरी’ का ट्रेलर रिलीज़, रिश्तों के धोखे और पुरुष अधिकारों के सवालों के बीच छिपे रहस्य की दिखी झलक
Love Lottery Trailer Released:आगामी हिंदी ‘लव लॉटरी’ का ट्रेलर दिल्ली में आयोजित एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस में लॉन्च किया गया. ट्रेलर लॉन्च के दौरान फिल्म के प्रमुख कलाकार अक्षय ओबेरॉय, विजयंत कोहली और अग्नि अग्यारी, निर्देशक अरविंद पांडे तथा निर्माता कुलदीप भार्गव ‘तुषार’ मौजूद रहे. इस खास अवसर पर ऐसे कई परिवारों को भी शामिल किया गया, जो अपने अनुभवों के अनुसार महिला-केंद्रित कानूनों के कथित दुरुपयोग से प्रभावित रहे हैं. सिनेमा गंज फिल्म्स के बैनर तले बनी ‘लव लॉटरी’ प्यार, शादी, रिश्तों में बढ़ती दूरी, धोखे और पुरुष अधिकारों से जुड़े सवालों को एक सस्पेंसफुल और सामाजिक कहानी के रूप में सामने लाती है.
ट्रेलर शुरुआत से ही कई रहस्यमय सवाल खड़े करता है
2 मिनट 10 सेकंड का ट्रेलर शुरुआत से ही कई रहस्यमय सवाल खड़े करता है. ट्रेलर में आधुनिक दौर के रिश्तों की चमक के पीछे छिपे बनावटीपन, प्यार में धोखे और रिश्तों के खोखलेपन को दिखाने की कोशिश की गई है. कहानी में प्यार और आपसी रिश्तों के बीच बढ़ते तनाव के साथ शादी, तलाक, धोखा और पैसों के लिए शादी जैसे पहलू भी नजर आते हैं, जो फिल्म की कहानी को और रहस्यमय बनाते हैं.
ट्रेलर में कुछ संवाद भी खासे संवेदनशील और तीखे हैं. इनमें एक संवाद, “एक औरत सिर्फ़ दो लोगों की सगी हो सकती है, एक अपनी औलाद की और एक खुद की”, रिश्तों और व्यक्तिगत अधिकारों को लेकर फिल्म के दृष्टिकोण की झलक देता है. यह संवाद ट्रेलर में मौजूद भावनात्मक और आक्रामक टकराव को भी सामने लाता है.
फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे अक्षय ओबेरॉय
फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे अक्षय ओबेरॉय के किरदार के माध्यम से रिश्तों, विश्वास और पुरुष अधिकारों से जुड़े सवालों को कहानी का हिस्सा बनाया गया है. वहीं हेली दारूवाला सहित कलाकारों के किरदार कहानी में अलग-अलग परतें जोड़ते नजर आते हैं. ट्रेलर कई सवाल छोड़ता है—रिश्तों में सच क्या है, धोखा किसने दिया, किसका पक्ष सही है और आखिर इस ‘लव लॉटरी’ का असली खेल क्या है?
निर्देशक अरविंद पांडे कहते हैं, “लव लॉटरी सिर्फ रिश्तों की कहानी नहीं है, बल्कि उन सवालों को सामने रखने की कोशिश है जिनसे आज के समय में कई लोग जूझ रहे हैं. हमने कहानी में सस्पेंस और इमोशन के साथ रिश्तों और कानूनी विवादों के अलग-अलग पहलुओं को दिखाने की कोशिश की है.”
फिल्म के प्रोड्यूसर क्या बोले?
निर्माता कुलदीप भार्गव ‘तुषार’ कहते हैं, “रिश्तों की जटिलता, कानूनी विवाद, भावनात्मक टकराव और पुरुष अधिकारों से जुड़े सवालों को सस्पेंस के साथ सामने रखने वाला ‘लव लॉटरी’ मनोरजन के साथ बड़े सवाल उठता है असली कहानी क्या है, कौन सही है और कौन गलत—इन सवालों के जवाब फिल्म के बड़े पर्दे पर ही सामने आएंगे.” सिनेमा गंज फिल्म्स के बैनर तले कुलदीप भार्गव ‘तुषार’ द्वारा निर्मित ‘लव लॉटरी’ का निर्देशन अरविंद पांडे ने किया है. फिल्म की कहानी और पटकथा अंकुर खत्री ने लिखी है.
18 सितंबर 2026 को रिलीज होगी फिल्म
फिल्म में अक्षय ओबेरॉय और हेली दारूवाला मुख्य भूमिकाओं में हैं. इनके अलावा कबीर दुहान सिंह, विजयंत कोहली, हेमंत पांडे, इंदिरा कृष्णन, संतोष शुक्ला, विक्रम शर्मा, अग्नि अग्यारी, कुमार सौरभ, अश्वंत लोधी और अर्शदीप संधू महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएंगे. फिल्म की सिनेमैटोग्राफी नवीन वी. मिश्रा ने की है. संगीत वरुण मिश्रा और अरविंद पांडे का है, जबकि फिल्म का संपादन प्रकाश झा ने किया है. ‘लव लॉटरी’ 18 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी.
उत्तराखंड में वोटर लिस्ट पर जरूरी अपडेट, 3 अक्टूबर को फाइनल प्रकाशन, फर्जी नाम हटाने के लिए नया नियम लागू
Uttarakhand News: उत्तराखंड में आगामी चुनावों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की दिशा में निर्वाचन आयोग ने एक बड़ा कदम उठाया है. राज्य में मतदाता सूची को पूरी तरह त्रुटिरहित और पारदर्शी बनाने की कवायद अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. इसी सिलसिले में मंगलवार को राजधानी में मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई. इस बैठक की अध्यक्षता मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने की. बैठक का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम की प्रगति साझा करना और आगामी कदमों पर सभी दलों से विचार विमर्श करना था. इस दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी दलों को आश्वस्त किया कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम सूची से बाहर नहीं रहेगा और किसी भी अपात्र या फर्जी मतदाता को सूची में जगह नहीं मिलेगी.
मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन की नई तारीख तय
बैठक के दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि भारत निर्वाचन आयोग ने उत्तराखंड में मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन की समय सीमा को आगे बढ़ा दिया है. आयोग के नए दिशा निर्देशों के अनुसार अब राज्य में संशोधित और अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 3 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा. पहले यह कार्य तय समय सीमा के भीतर होना था, लेकिन पुनरीक्षण कार्य की गंभीरता और हर एक दावे की गहराई से पड़ताल करने के लिए समय सीमा को बढ़ाया गया है. इससे चुनावी तंत्र को हर शिकायत और आपत्तियों का निस्तारण करने का पर्याप्त समय मिल सकेगा. सभी राजनैतिक दलों ने आयोग के इस फैसले का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि अतिरिक्त समय मिलने से सूची पूरी तरह साफ सुथरी बन सकेगी.
लाखों नोटिसों पर त्वरित सुनवाई का रिकॉर्ड
पुनरीक्षण अभियान के दौरान सामने आई विसंगतियों को लेकर भी बैठक में विस्तार से आंकड़े रखे गए. अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश भर में कुल 24 लाख 30 हजार मतदाताओं को अलग अलग कारणों से नोटिस जारी किए गए थे. प्रशासन की मुस्तैदी का नतीजा यह रहा कि इनमें से 24 लाख 29 हजार से अधिक नोटिसों पर विधिवत सुनवाई पूरी कर ली गई है. शेष बचे बेहद कम मामलों का निस्तारण भी बहुत जल्द पूरा कर लिया जाएगा. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नोटिस भेजने का मकसद किसी का नाम काटना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना था कि संबंधित व्यक्ति वास्तव में उसी पते पर रह रहा है या नहीं. इस प्रक्रिया में मतदाताओं के पक्ष को पूरी गंभीरता के साथ सुना गया है ताकि किसी भी वास्तविक नागरिक का वोटिंग अधिकार प्रभावित न हो.
दावे और आपत्तियों के निस्तारण में तेजी
मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए निर्वाचन कार्यालय को प्राप्त होने वाले विभिन्न प्रपत्रों पर भी तेजी से काम चल रहा है. बैठक में प्रतिनिधियों को जानकारी दी गई कि नए नाम जोड़ने के लिए फार्म 6, नाम हटाने के लिए फार्म 7 और किसी प्रविष्टि में संशोधन के लिए फार्म 8 भरे जाते हैं. इन तीनों फार्मों के माध्यम से प्राप्त कुल दावों और आपत्तियों में से 40 प्रतिशत से अधिक मामलों की सुनवाई पूरी की जा चुकी है. शेष आवेदनों पर भी संबंधित निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी तेजी से काम कर रहे हैं. मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राजनैतिक दलों से अपील की कि वे अपने बूथ लेवल एजेंटों के जरिए भी यह सुनिश्चित करवाएं कि कोई भी नया युवा मतदाता सूची में शामिल होने से न छूटे.
फर्जी और दोहरे वोटों पर रोक के लिए आधुनिक तकनीक
मतदाता सूची में कई बार एक ही व्यक्ति का नाम दो अलग अलग जगहों पर दर्ज होने की शिकायतें मिलती हैं. इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रदेश में आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है. बैठक में बताया गया कि निर्वाचन आयोग बहुत जल्द डेमोग्राफिक सिमिलर एंट्री और फोटो सिमिलर एंट्री मॉड्यूल को राज्य में पूरी शक्ति से लागू करने जा रहा है. इस आधुनिक सॉफ्टवेयर सिस्टम की मदद से उन नामों और तस्वीरों की फौरन पहचान हो जाएगी जो एक से अधिक मतदान केंद्रों पर दर्ज हैं. यदि किसी मतदाता का नाम या चेहरा एक से अधिक प्रविष्टियों में मेल खाता है, तो सिस्टम तुरंत उसकी पहचान कर लेगा. ऐसे मतदाताओं को विभाग की ओर से नोटिस जारी किया जाएगा. नोटिस मिलने के बाद मतदाता को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और जवाब दाखिल करने के लिए 15 दिन का पर्याप्त समय दिया जाएगा. यदि तय समय में कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तभी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
बैठक में तमाम दलों के प्रतिनिधियों ने दिए सुझाव
इस महत्वपूर्ण बैठक में निर्वाचन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ साथ सभी प्रमुख राजनैतिक दलों के अधिकृत प्रतिनिधि उपस्थित रहे. बैठक में अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे, उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी और सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास मुख्य रूप से मौजूद रहे. वहीं राजनैतिक दलों की ओर से भारतीय जनता पार्टी से राजकुमार पुरोहित और एडवोकेट सतेंद्र जैन शामिल हुए. इंडियन नेशनल कांग्रेस की ओर से मनोज रावत ने अपनी बात रखी. बहुजन समाज पार्टी की तरफ से सतेंद्र, सतेंद्र चोपड़ा और भीमराव ने प्रतिनिधित्व किया. आम आदमी पार्टी से श्याम बाबू पांडेय और सीपीआई एम से अनंत आकाश बैठक में शामिल हुए. सभी दल के नेताओं ने मतदाता सूची को पारदर्शी बनाने के लिए अपने जरूरी सुझाव दिए, जिस पर निर्वाचन अधिकारियों ने गंभीरता से अमल करने का भरोसा दिलाया.
यह भी पढ़ें: हिमालय दिवस पर CM धामी का संदेश, विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण में संतुलन जरूरी
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation





