Uttarakhand Elections 2027: उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर की सभी 9 सीटों के ये हैं सियासी समीकरण
Uttarakhand Elections 2027: Uttarakhand Elections 2027: उत्तराखंड उत्तर भारत का एक पहाड़ी राज्य है. जहां अगले साल यानी 2027 में विधानसभा चुनाव होने है. राज्य में विधानसभा की कुल 70 सीटें हैं. ऐसे में सरकार बनाने के लिए किसी भी दल को 36 सीटों की जरूरत होती है. इसलिए सभी किसी की जिले की एक सीट भी हर राजनीतिक पार्टी के लिए बेहद अहम मानी जाती है.
आज हम आपको उत्तराखंड के तराई क्षेत्र के ऊधम सिंह नगर के बारे में बताने जा रहे हैं. जहां विधानसभा की कुल 9 सीटें हैं. इनमें जसपुर, काशीपुर, बाजपुर, गदरपुर, रुद्रपुर, किच्छा, सितारगंज, नानकमत्ता, और खटीमा सीट शामिल हैं. बता दें कि ऊधम सिंह नगर सिर्फ उत्तराखंड के तराई क्षेत्र की उपजाऊ धरती और औद्योगिक गलियारे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जनपद पूरे राज्य की आर्थिकी और चुनावी गणित का सबसे बड़ा रणनीतिक केंद्र भी माना जाता है.
- क्योंकि एक तरफ पर्वतीय जिले अपनी विषम भौगोलिक परिस्थितियों, आपदाओं और दुर्गम चुनौतियों के लिए जाने जाते हैं, वहीं दूसरी ओर कुमाऊं मंडल के मैदानी हिस्से में बसा ऊधम सिंह नगर अपने सघन औद्योगिकीकरण, समृद्ध कृषि, प्रमुख शैक्षणिक और शोध संस्थानों के अलावा बेहद बहुरंगी सामाजिक समीकरणों के लिए जाना जाता है.
- आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य की इस आर्थिक धड़कन और प्रभावशाली जिले में बीजेपी और कांग्रेस जैसे प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है.
औद्योगिक और कृषि राजधानी के रूप में पहचान
बता दें कि उत्तराखंड के तराई क्षेत्र में स्थित ऊधम सिंह नगर जिला राज्य का 'अन्न का कटोरा' और प्रमुख औद्योगिक हब माना जाता है. जहां पंतनगर सिडकुल और रुद्रपुर जैसे क्षेत्रों के कारण यह जिला राज्य की आर्थिकी की रीढ़ माना जाता है. जहां चमोली जिला पर्वतीय, धार्मिक और सामरिक रूप से संवेदनशील है, तो वहीं ऊधम सिंह नगर मैदानी, घनी आबादी वाला और बहु-सांस्कृतिक केंद्र वाला जनपद है.
ऊधम सिंह नगर का सांस्कृतिक, भौगौलिक और सियासी समीकरण
ऊधम सिंह नगर जिला न केवल उत्तराखंड का औद्योगिक गलियारा और कृषि की रीढ़ है, बल्कि ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब और द्रोणाचार्य की तपोभूमि काशीपुर जैसी धरोहरें इसकी सांस्कृतिक पहचान हैं.
- जबकि देश के पहले कृषि विश्वविद्यालय (जीबी पंत विवि), सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र और समृद्ध तराई की खेती वाला ये जिला हर राजनीतिक रुझान प्रदेश की सरकार बनाने में सबसे अहम भूमिका निभाता है.
- यहां के चुनावी मुद्दों की बात करें तो इस जिसे में किसानों की फसल खरीद व न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), गन्ने का समय पर भुगतान, सिडकुल की कंपनियों में स्थानीय युवाओं को रोजगार, नजूल भूमि पर मालिकाना हक, बरसात में जलभराव और ड्रेनेज संकट के अलावा यूपी बॉर्डर से सटी कानून-व्यवस्था भी शामिल है.
2022 के चुनाव में कांग्रेस ने ऊधम सिंह नगर में की शानदार वापसी
राजनीतिक दृटि से ये जिला उत्तराखंड के अन्य जिलों से बिल्कुल अलग है. इस जिले को 'मिनी इंडिया' कहा जाता है, जहां कुमाऊंनी, पंजाबी-सिख, बंगाली, थारू-बुक्सा जनजाति और मुस्लिम समुदाय को वोटर किसी की पार्टी के लिए चुनावी नतीजों तय करते हैं.
- 2017 में जहां बीजेपी ने इस जिले में एकतरफा जीत हासिल की थी, तो वहीं 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जबरदस्त वापसी की और 9 में से 5 सीटों पर कब्जा कर लिया. फिलहाल जसपुर, बाजपुर, किच्छा, नानकमत्ता और खटीमा सीट पर कांग्रेस का कब्जा है.
- जिसमें सीएम पुष्कर सिंह धामी सीट खटीमा सीट भी शामिल है. जहां खुद सीएम धामी को हार का सामना करना पड़ा था. वहीं बीजेपी रुद्रपुर, काशीपुर, गदरपुर और सितारगंज जैसी मजबूत सीटों पर काबिज रही. जबकि बहुजन समाज पार्टी (BSP) और निर्दलीय भी यहां के ग्रामीण व तराई समीकरणों में बड़ा उलटफेर करने की ताकत रखते हैं.
ऊधम सिंह नगर की कुल जनसंख्या और साक्षरता दर
ऊधम सिंह नगर जिले की धार्मिक आबादी
2022 में विधानसभा चुनाव में कैसा रहा सभी सीटों का परिणाम
| विधानसभा सीट | विजेता प्रत्याशी | पार्टी | जीत का अंतर (वोट) |
|---|---|---|---|
| जसपुर | आदेश सिंह चौहान | कांग्रेस (INC) | 4,172 |
| काशीपुर | त्रिलोक सिंह चीमा | भाजपा (BJP) | 16,335 |
| बाजपुर (SC) | यशपाल आर्य | कांग्रेस (INC) | 1,611 |
| गदरपुर | अरविंद पांडे | भाजपा (BJP) | 4,571 |
| रुद्रपुर | शिव अरोरा | भाजपा (BJP) | 19,750 |
| किच्छा | तिलक राज बेहड़ | कांग्रेस (INC) | 10,077 |
| सितारगंज | सौरभ बहुगुणा | भाजपा (BJP) | 10,938 |
| नानकमत्ता (ST) | गोपाल सिंह राणा | कांग्रेस (INC) | 13,020 |
| खटीमा | भुवन चंद्र कापड़ी | कांग्रेस (INC) | 6,579 |
अब जानते हैं ऊधम सिंह नगर की सभी सीटों का चुनावी गणित
जसपुर: 2022 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस के आदेश सिंह चौहान ने बीजेपी उम्मीदवार डॉ. शैलेंद्र मोहन सिंघल को 4,172 वोटों से हराया था. इस सीट पर मुस्लिम, किसान और स्थानीय ग्रामीण वोटों के मजबूत ध्रुवीकरण ने कांग्रेस को लगातार दूसरी बार जीत दिलाई.
काशीपुर: इस सीट पर बीजेपी के त्रिलोक सिंह चीमा ने कांग्रेस उम्मीदवार नरेंद्र चंद सिंह को 16,335 वोटों से मात दी थी. बता दें कि चीमा परिवार के पुराने सियासी रसूख और शहरी व्यापारी वर्ग के एकतरफा समर्थन ने भाजपा का गढ़ अभेद्य बनाए रखा.
बाजपुर (SC): कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष यशपाल आर्य ने भाजपा के राजेश कुमार को 1,611 मतों के कड़े मुकाबले में हराया. चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस में लौटे यशपाल आर्य के निजी प्रभाव और दलित-किसान गठजोड़ ने यहाँ जीत की इबारत लिखी.
गदरपुर: भाजपा के कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे ने बेहद कांटे की टक्कर में कांग्रेस के प्रेमानंद महाजन को 4,571 मतों से पराजित किया. बंगाली और पंजाबी बाहुल्य इस सीट पर अरविंद पांडे अपनी लगातार पकड़ बनाए रखने में कामयाब रहे.
रुद्रपुर: भाजपा के शिव अरोरा ने कांग्रेस की मीना शर्मा को 19,750 वोटों के भारी अंतर से शिकस्त दी. बागी निर्दलीय प्रत्याशी राजकुमार ठुकराल की मौजूदगी के बावजूद शहरी और सिडकुल से जुड़े मतदाताओं ने भाजपा के पक्ष में एकतरफा मतदान किया.
किच्छा: कांग्रेस के कद्दावर नेता तिलक राज बेहड़ ने दो बार के भाजपा विधायक राजेश शुक्ला को 10,077 वोटों से हराया. तराई के किसानों, अल्पसंख्यक वर्ग और बेहड़ के निजी सियासी आधार ने भाजपा से यह सीट छीन ली.
सितारगंज: भाजपा के सौरभ बहुगुणा ने कांग्रेस प्रत्याशी नवतेज पाल सिंह को 10,938 वोटों के अंतर से हराया. पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की राजनीतिक विरासत और बंगाली व तराई बेल्ट में मजबूत पकड़ के दम पर सौरभ बहुगुणा ने लगातार दूसरी जीत दर्ज की.
नानकमत्ता (ST): कांग्रेस के गोपाल सिंह राणा ने भाजपा के दो बार के विधायक डॉ. प्रेम सिंह राणा को 13,020 वोटों के अंतर से पराजित किया. थारू जनजाति और सिख बाहुल्य क्षेत्र में सत्ता विरोधी लहर और किसान आंदोलन के असर ने कांग्रेस को बड़ी जीत दिलाई.
खटीमा: कांग्रेस के भुवन चंद्र कापड़ी ने प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को 6,579 मतों से हराकर राज्य का सबसे बड़ा उलटफेर किया. स्थानीय जुड़ाव, बेरोजगारी के मुद्दे और पूर्व सैनिकों व किसानों के समर्थन ने कापड़ी को इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले में ऐतिहासिक जीत दिलाई.
दलीप ट्रॉफी के फाइनल में किस बल्लेबाज ने खेली है सबसे बड़ी पारी, देखिए लिस्ट में किस नंबर पर मौजूद ईशान किशन
Duleep Trophy Final : भारत में इन दिनों घरेलू क्रिकेट खेला जा रहा है. रेड बॉल क्रिकेट में भारत के तमाम खिलाड़ी अपना-अपना जलवा बिखेर रहे हैं. इस समय ईस्ट जोन और साउथ जोन के बीच दलीप ट्रॉफी 2026-27 का फाइनल मैच खेला जा रहा है. इस बार ईस्ट जोन की कप्तानी ईशान किशन कर रहे हैं वहीं, साउथ जोन की कप्तानी तिलक वर्मा के हाथों में है. इस मैच में ईशान किशन ने कमाल की पारी खेली और चारों ओर अपने नाम का डंका बजा दिया.
दलीप ट्रॉफी की शुरुआत भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की ओर से साल 1961-62 में की गई थी. ये एक बड़ा घरेलू टूर्नामेंट है, जिसका नाम कुमार श्री दलीप सिंहजी (नवानगर के राजकुमार) के नाम पर रखा गया था. तब से लेकर अब तक भारत में ये टूर्नामेंट प्रमुख प्रथम श्रेणी (First-Class) क्रिकेट प्रतियोगिता में से एक हैं. दलीप ट्रॉफी का पहला खिताब 1916-62 में वेस्ट जोन के द्वारा जीता गया था.
तब से अब तक दलीप ट्रॉफी के कई चैंपियन बन. कई टीमों के खिलाड़ियों में फाइनल में धमाल मचाया और शानदार प्रदर्शन कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा लेकिन अब एक बार फिर से ईशान किशन ने कमाल कर दिया है. ईशान किशन ईस्ट जोन की ओर से साउथ जोन के खिलाफ तूफानी पारी खेली. उन्होंने दोहरा शतक लगाकर एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया है.
ईशान किशन ने मचाया धमाल
ईशान किशन ने दलीप ट्रॉफी के फाइनल में 270 बॉल में 26 चौके और 2 छ्क्कों के साथ 200 रन पूरे किए. उन्होंने फाइनल में दोहरा शतक लगाकर इतिहास रच डाला. इस मैच में 334 बॉल में 30 चौके और 7 छक्कों के साथ 80.33 की स्ट्राइक रेट के साथ 270 रनों की मैराथन पारी खेली. दूसरे दिन के अंत पर उनकी पारी 270 पर खत्म हुई.
इससे पहले ईशान किशन ने 71 बॉल में 7 चौकों की मदद से अपने 50 रन पूरे किए. इसके बाद ईशान ने 122 बॉल में 13 चौके और 1 छक्के की मदद से अपने 100 रन पूरे कर शतक जड़ दिया. उन्होंने पहले दिन के अंत तक135 बॉल में 14 चौके और 1 छक्के के साथ 111 रनों की पारी खेली.
I.C.Y.M.I
— BCCI Domestic (@BCCIdomestic) September 8, 2026
2️⃣7️⃣0️⃣ runs
3️⃣3️⃣4️⃣ balls
3️⃣0️⃣ fours
7️⃣ sixes
8️⃣0️⃣.8️⃣3️⃣ SR
Watch ???? highlights of Ishan Kishan's marathon knock ????????
Scorecard ▶️ https://t.co/BhTkGWeeoD#DuleepTrophy | #EZvSZ pic.twitter.com/An6sT09tfu
ईशान ने यशस्वी को पछाड़कर रचा इतिहास
इस पारी के साथ ही ईशान दलीप ट्रॉफी के फाइनल में सबसे ज्यादा रनों की पारी खेलने वाले दूसरे बल्लेबाज बन गए. उन्होंने इस मामले में भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल को पीछे छोड़ा, जिन्होंने उनसे पहले दलीप ट्रॉफी 2022 के फाइनल में वेस्ट जोन की ओर से साउथ जोन के खिलाफ 265 रनों की पारी खेली थी.
अब ईशान किशन सिर्फ रामन लांबा से पीछे हैं, जो दलीप ट्रॉफी के फाइनल में सबसे ज्यादा व्यक्तिगत पारी खेलने वाले खिलाड़ियों की सूची में शीर्ष पर मौजूद हैं. उन्होंने 1987 के फाइनल में नॉर्थ जोन की तरफ से वेस्ट जोन के खिलाफ 320 रनों की पारी खेली, जो अब तक दलीप ट्रॉफी के फाइनल में किसी बल्लेबाज द्वारा खेली गई सबसे बड़ी पारी है.
A 522-minute magnificent 2️⃣7️⃣0️⃣-run knock ⏳????
— BCCI Domestic (@BCCIdomestic) September 8, 2026
Big-match player acing the finals yet again ????
Team always comes first ????❤️
Ishan Kishan breaks down his Chepauk heroics ???? - By @jigsactin
#DuleepTrophy | #EZvSZ pic.twitter.com/CJ4HpexveY
दलीप ट्रॉफी फाइनल में सबसे बड़ी पारी खेलने वाले 5 बल्लेबाज
तो इसी मौके पर आज हम आपको, दलीप ट्रॉफी के फाइनल में अब तक सबसे ज्यादा रन बनाने वाले यानी सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी खेलने वाले शीर्ष 5 बल्लेबाजों के बारे में बताने वाले हैं. आइए जानते हैं कि, किस बल्लेबाज ने कितने रनों की पारी खेली है.
1 - रामन लांबा
दलीप ट्रॉफी के फाइनल में सबसे बड़ी पारी खेलने का रिकॉर्ड रामन लांबा के नाम है. उन्होंने दलीप ट्रॉफी 1987 के फाइनल में नॉर्थ जोन की ओर से खेलते हुए वेस्ट जोन के खिलाफ 320 रनों की पारी खेली थी.
2 - ईशान किशन
ईशान किशन दलीप ट्रॉफी के फाइल में सबसे बड़ी पारी खेलने वाले दूसरे बल्लेबाज हैं. ईशान ने दलीप ट्रॉफी 2026 के फाइनल में ईस्ट जोन की ओर से साउथ जोन के खिलाफ 270 रनों की पारी खेली है. ईशान अब टीम इंडिया के लिए भी टेस्ट में धमाल मचा सकते हैं.
3 - यशस्वी जायसवाल
दलीप ट्रॉफी के फाइल में सबसे बड़ी पारी खेलने वाले तीसरे बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल हैं. भारत के सलामी बल्लेबाज जायवसाल ने दलीप ट्रॉफी 2022 के फाइनल में वेस्ट जोन की ओर से साउथ जोन के खिलाफ 265 रनों की पारी खेली. जायसवाल को इंडियन क्रिकेट का भविष्य माना जाता है.
4 - चेतेश्वर पुजारा
भारत के पूर्व बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा दलीप ट्रॉफी के फाइल में सबसे बड़ी पारी खेलने वाले चौथे बल्लेबाज हैं. पुजार ने इंडिया ब्लू की ओर से इंडिया रेड के खिलाफ दलीप ट्रॉफी 2016 के फाइनल में 256 रनों की पारी खेली थी. पुजारा ने भारतीय क्रिकेट में भी अहम योगदान दिया है.
HEARTBREAK FOR CHETESHWAR PUJARA. ????
— Mufaddal Vohra (@mufaddal_vohra) January 31, 2025
- Pujara dismissed for 99 in the Ranji Trophy match, missing out on his 67th First Class century. pic.twitter.com/ghvrgOUwfp
5 - अंशुमान गायकवाड़
अंशुमान गायकवाड़ दलीप ट्रॉफी के फाइल में सबसे बड़ी पारी खेलने वाले पांचवें बल्लेबाज हैं. गायकवाड़ ने वेस्ट जोन की ओर से ईस्ट जोन के खिलाफ 1987-88 में 216 रनों की पारी खेली थी.
इन बल्लेबाजों के लिए बल्ले से भी निकली बड़ी पारी
इनके अलावा अजीत वाडेकर के बल्ले से दलीप ट्रॉफी में 229 रनों की सबसे बड़ी पारी आई. वहीं अंशुमन गायकवाड़ ने 216 रनों की पारी खेली. यूसुफ पठान भी दलीप ट्रॉफी में 210 रनों की पारी खेल चुके हैं. वहीं मंसूर अली खान पटौदी ने भी 200 रनों की पारी खेली थी. यश राठौड़ के नाम 194 रनों की पारी खेली गई है. वहीं आकाश चोपड़ा भी 188 रनों की पारी खेल चुके हैं.
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