Responsive Scrollable Menu

GIS 2027: सीएम मोहन यादव ने Crescent CEO को दिया न्योता, MP में निवेश पर हुई बड़ी चर्चा

सीएम मोहन यादव ने दुबई में Crescent Group के सीईओ बद्र जाफर से मुलाकात की। ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में मध्यप्रदेश में निवेश को लेकर अहम चर्चा हुई।

Continue reading on the app

Judicial Delay पर खुद की नसीहत भूला सुप्रीम कोर्ट? Sanofi Case के फैसले में लगा 2 साल का लंबा वक्त

न्यायिक देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर ही एक मुश्किल सवाल उठ खड़ा हुआ है। शीर्ष अदालत की एक बेंच को 15 मई, 2024 को सुरक्षित रखे गए फैसले को सुनाने में दो साल से ज़्यादा का समय लग गया, जबकि उसी अदालत ने सिर्फ़ तीन महीने पहले ही दूसरी संवैधानिक अदालतों के लिए सुरक्षित फ़ैसले सुनाने की अधिकतम समय-सीमा तीन महीने तय की थी। जस्टिस जेबी पारदीवाला और मनोज मिश्रा की बेंच ने दवा बनाने वाली बड़ी कंपनी 'सैनोफी इंडिया लिमिटेड' के खिलाफ CBI के भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया। यह मामला मैसूर में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) द्वारा दवाएं खरीदने में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है, जिसमें सरकार को ₹3.53 लाख का कथित नुकसान हुआ था।

इसे भी पढ़ें: Delhi Police ने Swatantra Bhardwaj पर SC ST Act और POCSO की धाराएं लगाईं

99 पन्नों के अपने फ़ैसले में, बेंच ने किसी कॉर्पोरेट संस्था को आपराधिक रूप से ज़िम्मेदार ठहराने के लिए नियम तय किए। बेंच ने कहा कि भले ही कंपनी एक 'कानूनी व्यक्ति' (juristic person) हो, लेकिन उसके कामकाज के लिए ज़िम्मेदार असली व्यक्ति (natural person) की पहचान किए बिना या उसे आरोपी बनाए बिना भी कंपनी पर मुक़दमा चलाया जा सकता है। हालांकि, अदालत ने कहा कि सिर्फ़ यह आरोप लगाना काफ़ी नहीं है कि किसी कॉर्पोरेशन ने अपराध किया है या उसमें ज़रूरी 'मेन्स रिया' (mens rea - यानी आपराधिक ज़िम्मेदारी तय करने के लिए ज़रूरी मानसिक स्थिति) मौजूद थी। आरोपों से पहली नज़र में यह पता चलना चाहिए कि कॉर्पोरेशन की ओर से किसी असली व्यक्ति या लोगों ने काम किया था, वह काम उस अपराध से जुड़ा था, और आस-पास के हालात ऐसे नहीं थे जिनसे 'मेन्स रिया' का होना "साफ़ तौर पर बेतुका या असंभव" लगे।

इसे भी पढ़ें: Nishu के पिता से मारपीट मामले में Chandra Shekhar Azad का बड़ा बयान, 72 घंटे में कार्रवाई की मांग

सैनोफी मामले में फ़ैसला

 सैनोफी मामले में फ़ैसला 15 मई, 2024 को ही सुरक्षित रख लिया गया था। उस समय सैनोफी की ओर से सीनियर वकील सिद्धार्थ लूथरा पेश हुए थे और CBI का पक्ष एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने रखा था। फ़ैसला आखिरकार सोमवार को सुनाया गया, यानी फ़ैसला सुरक्षित रखने और उसे सुनाने के बीच दो साल से ज़्यादा का समय बीत गया। यह मामला सात साल से ज़्यादा समय से सुप्रीम कोर्ट में लंबित था; शीर्ष अदालत के 2019 के आदेश के बाद बेंगलुरु CBI कोर्ट में कार्यवाही उस पूरी अवधि के दौरान रुकी रही थी। इस मामले में फ़ैसला आने का समय इसलिए भी अहम है क्योंकि 29 मई को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने एक फ़ैसला सुनाया था। उस फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट्स के लिए मामले निपटाने और सुरक्षित रखे गए फ़ैसले सुनाने के लिए व्यापक और अनिवार्य समय-सीमा तय की थी।

फ़ैसले में लगने वाले समय को कम करने की सुप्रीम कोर्ट की कोशिशें

ये निर्देश संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत तब जारी किए गए जब सुप्रीम कोर्ट ने देखा कि कई आपराधिक अपीलों (जिनमें उम्रकैद की सज़ा पाए लोगों के मामले भी शामिल थे) में फ़ैसले सालों तक सुरक्षित रखे गए थे। बेंच ने इस बात पर ज़ोर दिया था कि न्यायिक देरी के कारण मुक़दमेबाज़ों के अधिकारों का हनन नहीं होने दिया जा सकता, खासकर तब जब मामला व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा हो। इसलिए, यह ताज़ा फ़ैसला ऐसे माहौल में आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने खुद बार-बार इस बात पर ज़ोर दिया है कि संवैधानिक अदालतों को सुनवाई के बाद मामलों को निपटाने में लगने वाले समय को लेकर अनुशासन बरतना चाहिए। 

Continue reading on the app

  Sports

जिसने खेले सिर्फ 12 मैच, Asian Games में वो तैयार करेगा क्रिकेट मुकाबलों की पिच

जापान में होने वाले एशियन गेम्स में क्रिकेट की पिच तैयार करने का काम गामिनी डि सिल्वा करेंगे. गामिनी 16 साल तक BCB के पिच क्यूरेटर रहे हैं. Tue, 08 Sep 2026 15:05:46 +0530

  Videos
See all

Desh Ki Pathshala PM मोदी का एक धमाका और पैनिक मोड़ में आ गया Pakistan! Sushant Sinha #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-08T10:15:01+00:00

हार गया विज्ञान, नहीं हिले हनुमान | #viralshorts | #shorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-08T10:10:34+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers