Mirzapur box office collection: OTT के बाद थिएटर में भी छाया Mirzapur, चार दिनों की कमाई ने मेकर्स को किया मालामाल
Mirzapur box office collection: ओटीटी की लोकप्रिय दुनिया से निकलकर ‘मिर्जापुर द मूवी’ ने सिनेमाघरों में कदम रखा तो इसके सामने सबसे बड़ी चुनौती दर्शकों की उम्मीदों पर खरा उतरना था। फिल्म को लेकर रिलीज से पहले कई सवाल थे, लेकिन शुरुआती बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन ने तस्वीर बदल दी। महज कुछ दिनों में इसकी कमाई ने मेकर्स को बड़ी राहत दी है
Rahul Gandhi को झटका, Bombay High Court ने मानहानि मामले में समन रद्द करने से किया इनकार
(फाइल फोटो के साथ) मुंबई, आठ सितंबर मुंबई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को 2019 में जारी किए गए समन को रद्द करने से इनकार कर दिया। यह समन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ उनकी उस टिप्पणी को लेकर दायर मानहानि की शिकायत के मामले में जारी किया गया था, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री को ‘‘कमांडर-इन-थीफ’’ कहा था। न्यायमूर्ति एन. आर. बोरकर की एकल पीठ ने मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश के खिलाफ गांधी की याचिका खारिज कर दी।
बहरहाल, उच्च न्यायालय ने 2021 के अपने उस आदेश को जारी रखा, जिसमें मजिस्ट्रेट को शिकायत पर सुनवाई छह सप्ताह के लिए टालने का निर्देश दिया गया था, ताकि गांधी इस फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील कर सकें। न्यायमूर्ति बोरकर ने कहा कि अदालत को मजिस्ट्रेट के आदेश में कोई ‘‘त्रुटि और अवैधता’’ नजर नहीं आई और इसलिए उसमें हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है। उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘इस अदालत को आदेश में कोई खामी नहीं मिली।
इसलिए याचिका खारिज की जाती है।’’ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गिरगांव मजिस्ट्रेट के 28 अगस्त, 2019 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ दायर एक शिकायत पर आपराधिक प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया गया था। यह शिकायत एम. एच. श्रीश्रीमल ने दायर की थी, जिन्होंने खुद को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का सदस्य बताया था। कांग्रेस नेता के खिलाफ मानहानि की शिकायत 2018 में राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ उनकी ‘‘कमांडर-इन-थीफ’’ वाली टिप्पणी को लेकर दायर की गई थी।
नवंबर 2021 में उच्च न्यायालय ने मजिस्ट्रेट को मानहानि की शिकायत पर सुनवाई टालने का निर्देश दिया था। इसका मतलब था कि कांग्रेस नेता को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होने की जरूरत नहीं होगी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि राहुल गांधी ने सितंबर 2018 में राजस्थान में एक जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को लेकर यह टिप्पणी कर उन्हें बदनाम किया था।
गांधी की ओर से पेश अधिवक्ता सुदीप पसबोला और अधिवक्ता कुशल मोर ने दलील दी कि शिकायत निराधार है तथा शिकायतकर्ता को इसे दायर करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था। उन्होंने कहा था कि शिकायतकर्ता इस मामले में पीड़ित पक्ष नहीं है और इसलिए वह ऐसी शिकायत दायर नहीं कर सकता। श्रीश्रीमल ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ रैली के दौरान की गई टिप्पणी के अलावा गांधी ने अपने निजी ‘एक्स’ खाते पर एक वीडियो भी पोस्ट किया था, जिसमें प्रधानमंत्री को ‘‘कमांडर-इन-थीफ’’ कहा गया था।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, इन बयानों में भाजपा के सभी सदस्यों और प्रधानमंत्री मोदी से जुड़े भारतीय नागरिकों पर सीधे तौर पर चोरी के आरोप लगाए गए थे। श्रीश्रीमल ने उच्च न्यायालय में गांधी की याचिका का विरोध किया था।
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