Delhi के Satya Niketan में इमारत ढहने से MP के 2 छात्रों समेत 7 की मौत
कटनी/देवास (मध्यप्रदेश), सात सितंबर मध्यप्रदेश के छात्र अक्षत यादव जब भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) का अधिकारी बनने के लक्ष्य से नयी दिल्ली के लिए रवाना हुए थे तो उनके परिवार को नहीं पता था कि एक दिन उनका सपना हमेशा के लिए एक इमारत के मलबे में दब जाएगा। कटनी जिले के निवासी यादव उन सात लोगों में शामिल हैं, जिनकी रविवार को दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत के ढहने से मौत हो गई। दिल्ली विश्वविद्यालय के 19 वर्षीय छात्र यादव आईएएस बनने का सपना लेकर राष्ट्रीय राजधानी गए थे।
यादव के अलावा, मध्यप्रदेश के देवास के निवासी, अर्पित जाज (21) भी इस हादसे के शिकार हो गए और इसके साथ ही उनका और उनके परिवार का सपना भी इमारत के ढहने के साथ जमींदोज हो गया। कटनी के तुलसी नगर इलाके के दुबे कॉलोनी के रहने वाले अक्षत हाल में रक्षा बंधन में घर आए थे और अपनी छोटी बहन से राखी बंधवाने के दो दिन बाद वापस दिल्ली लौट गए थे। पड़ोसियों ने बताया कि जानकारी मिलते ही उसके माता-पिता, छोटी बहन और परिवार के अन्य सदस्य सोमवार को दिल्ली पहुंचे और शव की शिनाख्त करने के बाद उसे एम्बुलेंस में लेकर सड़क मार्ग से कटनी के लिए निकल चुके हैं और उनके देर रात या मंगलवार तड़के यहां पहुंचने की संभावना है।
बचपन के मित्र और नर्सरी से 12वीं तक साथ-साथ पढा़ई करने वाले कृष्णा रजक ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से बातचीत में कहा कि अक्षत ने पिछले ही साल कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूइटी) की परीक्षा पास की थी और दिल्ली में रहकर दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीकॉम की पढ़ाई कर रहे थे। उन्होंने कहा, अक्षत पढ़ने में बहुत अच्छा था। उसे आईएएस की तैयारी करनी थी।
जब भी बात होती तो वह हमेशा इसकी तैयारियों के बारे में ही चर्चा करता रहता था। रजक ने बताया कि अभी हाल में अक्षत रक्षा बंधन पर कटनी आया था लेकिन किसी कारणवश उनसे उससे मुलाकात नहीं हो पाई थी। उन्होंने कहा, जब से जानकारी आई है तभी से अक्षत के मम्मी-पापा का रो-रो कर बुरा हाल है।
सबसे अधिक हालत खराब तो छोटी बहन का है, जिसे वह बहुत प्यार करता था। दिल्ली की जिस इमारत में अक्षत किरायेदार के रूप में रहकर पढ़ाई कर रहा था, वह रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे मरम्मत कार्य के दौरान ढह गई। इसमें लड़कों का पेइंग गेस्ट (पीजी) आवास था।
इमारत के मलबे से अब तक 12 लोगों को निकाला जा चुका है जिनमें से अक्षत और जाए सहित सात लोगों की मौत हो गई है। घटना की खबर मिलते ही कटनी स्थित अक्षत के निवास स्थान पर स्थानीय लोगों और पड़ोसियों की भीड़ जमा हो गई। संदीप त्रिपाठी नामक एक पड़ोसी ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से बातचीत में कहा कि रविवार शाम सूचना मिली थी कि दिल्ली में जो इमारत गिरी है, अक्षत उसी में रहता था।
उन्होंने कहा कि घटना की जानकारी जब आई तब उसके पिता राजस्थान में थे, जहां से वह कुछ रिश्तेदारों के साथ दिल्ली निकल गए जबकि स्थानीय पार्षद और परिवार के कुछ करीबी लोग अक्षत की मां और बहन को लेकर दिल्ली रवाना हुए। त्रिपाठी ने कहा कि अक्षत के परिजन उसे तलाशते रहे लेकिन अंत में एक परामर्श केंद्र में उन्हें सही जानकारी मिली। उन्होंने कहा कि अक्षत के माता-पिता ने उसके शरीर पर एक निशान देखकर उसकी पहचान की।
उन्होंने बताया कि अक्षत के पिता भवन निर्माण का काम करते हैं जबकि मां गृहिणी हैं। उन्होंने बताया कि उनकी अक्षत के पिता से बात हुई है और रात दो-तीन बजे तक उनके कटनी पहुंचने की संभावना है। रक्षाबंधन पर परिवार के साथ खुशियां मनाकर दिल्ली लौटे देवास के अर्पित जाज (21) के घर में अगले ही दिन मातम पसर गया।
बी.कॉम द्वितीय वर्ष का छात्र हादसे के दिन रविवार को ही दिल्ली पहुंचा था, लेकिन कुछ ही घंटों बाद परिवार से उसका संपर्क टूट गया और सोमवार को उसकी मौत की पुष्टि हुई। जिलाधिकारी ऋतुराज सिंह ने देवास में संवाददाताओं को बताया, दिल्ली के इमारत हादसे में जाज की मौत की जानकारी मिलने के बाद हमने दिल्ली प्रशासन से समन्वय किया। पोस्टमार्टम के बाद शव को एम्बुलेंस के माध्यम से दिल्ली सरकार के सहयोग से देवास भेजा गया है।’’ परिजनों के अनुसार जाज ने देवास के एक विद्यालय से 12वीं तक पढ़ाई की थी और वह दिल्ली के एक महाविद्यालय में बी.कॉम द्वितीय वर्ष में पढ़ रहा था।
जाज के परिवार से निकट संबंध रखने वाले विजय शर्मा ने बताया,‘‘जाज रक्षाबंधन के मौके पर अपने देवास स्थित घर आया था। हम जन्माष्टमी पर देर रात तक साथ थे। मेरे दोनों बच्चों और जाज व उसकी बहन ने मिलकर कई रील बनाई थीं।’’ उन्होंने बताया कि जाज का दिल्ली वापसी का रेल टिकट आरक्षित था और वह शनिवार को देवास से रवाना होकर रविवार सुबह दिल्ली पहुंच गया था।
शर्मा ने बताया, दिल्ली पहुंचने के बाद जाज के माता-पिता की उससे फोन पर बात हुई थी। छात्र ने उन्हें बताया था कि उसने भोजन कर लिया है और यात्रा की थकान मिटाने के लिए वह कुछ देर आराम करेगा। इसके करीब डेढ़ घंटे बाद ही हादसा हो गया और उससे फोन पर दोबारा संपर्क नहीं हो सका।’’ उन्होंने बताया कि हादसे की जानकारी मिलने पर जाज के माता-पिता दिल्ली पहुंचे और अलग-अलग स्थानों पर उसकी तलाश शुरू की।
शर्मा ने बताया कि सोमवार को जाज का शव मिलने की पुष्टि हुई जिसके बाद से होनहार छात्र के परिवार में मातम का माहौल है।
Satya Niketan हादसे के बाद MCD के 28 लाख इमारतों वाले सर्वे पर उठे सवाल
नयी दिल्ली, सात सितंबर दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत ढहने से कम से कम सात लोगों की मौत के बाद एक बार फिर शहर में अवैध निर्माण का मुद्दा चर्चा में आ गया है। जून में हुए एमसीडी के सर्वे में करीब 28 लाख इमारतों की जांच के बाद केवल 19 इमारतों को खतरनाक पाया गया था। इस बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता विजय गोयल ने दिल्ली में अवैध निर्माण और जर्जर इमारतों को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो अनधिकृत बहुमंजिला इमारतें और पुरानी जर्जर संपत्तियां और अधिक हादसों का कारण बन सकती हैं।
एमसीडी के एक बयान के अनुसार, रविवार को ढही इमारत का निर्माण 1990 के दशक में पुनर्वास कॉलोनी में करीब 55 वर्ग गज के प्लॉट पर किया गया था। हालांकि, कुछ स्थानीय निवासियों का दावा है कि यह इमारत करीब 50 साल पुरानी थी और इसे 1970 के दशक में बनाया गया था। अधिकारियों ने बताया कि इन पुनर्वास कॉलोनियों में शुरुआत में केवल भूतल और एक मंजिल (ग्राउंड प्लस वन) के निर्माण की अनुमति दी गई थी।
अधिकारियों के अनुसार, दशकों पुरानी यह पांच मंजिला इमारत लड़कों के पीजी के रूप में इस्तेमाल की जा रही थी। एमसीडी ने कहा कि इस इमारत का कोई स्वीकृत नक्शा नहीं था और इसके खिलाफ कोई शिकायत भी नहीं मिली थी। अधिकारियों ने बताया कि यह इलाका 1970 के दशक में पुनर्वास कॉलोनी के रूप में विकसित किया गया था, जहां लोगों को छोटे-छोटे भूखंड दिए गए थे।
एमसीडी आयुक्त संजीव खिरवार ने कहा कि मजिस्ट्रेट जांच के बाद इमारत ढहने के तात्कालिक कारणों के बारे में अधिक जानकारी मिलेगी। खिरवार ने कहा, “बेसमेंट में कोई काम हो रहा था या नहीं, यह मजिस्ट्रेट जांच के बाद पता चलेगा।” स्थानीय निवासियों ने इमारत ढहने के लिए मरम्मत कार्य और बेसमेंट में जमा पानी को जिम्मेदार ठहराया है। नगर निकाय ने पास की इमारत खाली कराकर सील कर दी है, जिसमें लड़कियों का पीजी था।
अधिकारियों के अनुसार, आसपास की कम से कम चार इमारतों को दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 की धारा 349 के तहत खाली करने के नोटिस जारी किए गए हैं। धारा 349 और धारा 491 के तहत, नगर निगम (एमसीडी) किसी भी ऐसी इमारत को, जिसे खतरनाक या जोखिमपूर्ण माना जाता है, खाली कराने और उसे खतरनाक घोषित करने संबंधी नोटिस जारी कर सकता है। अधिकारियों ने बताया कि एमसीडी के दस्तावेजों के अनुसार, इमारत के मालिक ने पिछले साल संपत्ति कर और 2007 में कन्वर्जन शुल्क जमा किया था।
जून से सितंबर के बीच नगर निकाय ने करीब 980 संपत्तियों पर तोड़फोड़ की कार्रवाई की, 460 संपत्तियां सील कीं, अवैध निर्माण के लिए 1,500 से अधिक कारण बताओ नोटिस और 708 सीलिंग संबंधी कारण बताओ नोटिस जारी किए। अधिकारियों ने बताया कि 720 से अधिक तोड़फोड़ आदेश जारी किए। इस घटना ने एमसीडी के हर साल मानसून से पहले किए जाने वाले कमजोर इमारतों के सर्वे की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े किए हैं।
अधिकारियों के अनुसार, इस साल की शुरुआत में किए गए सर्वे में एमसीडी ने 27,84,286 इमारतों की जांच की थी, जिनमें से केवल 19 को खतरनाक पाया गया। उन्होंने बताया कि इमारतों के सर्वेक्षण के दौरान एमसीडी की टीम दरारें, झुकी हुई दीवारें और इमारत की कमजोरी के अन्य दिखाई देने वाले संकेतों को देखती हैं। अधिकारी आमतौर पर इमारतों की बाहर से जांच करते हैं और विस्तृत संरचनात्मक जांच नहीं करते।
इस साल शहर में खासकर दक्षिण क्षेत्र में इमारत ढहने और आग लगने की कई घटनाएं हुई हैं। 30 मई को सैदुल अजायब में इमारत ढहने की घटना में छह लोगों की मौत हुई थी। वहीं, तीन जून को हौज रानी इलाके में एक ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ में आग लगने से 23 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 11 विदेशी नागरिक शामिल थे।
जून में मलका गंज सब्जी मंडी इलाके में एक मकान ढह गया था और इसी महीने करावल नगर में चार मंजिला इमारत भी ढह गई थी। एमसीडी ने सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना के बाद सोमवार को दक्षिण क्षेत्र के उपायुक्त राकेश कुमार और चार इंजीनियरों को अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित रहने तक निलंबित कर दिया। भाजपा नेता गोयल ने कहा कि उन्होंने शहर में अवैध निर्माण के मुद्दे को कई बार उठाया, लेकिन इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, आज भी पुरानी दिल्ली और चांदनी चौक में खुलेआम छह मंजिल तक के अवैध निर्माण हो रहे हैं। वहीं, कई पुरानी इमारतें पहले से ही जर्जर और खतरनाक स्थिति में हैं। गोयल ने कहा कि यह स्थिति किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली नगर निगम वर्षों से चली आ रही इस समस्या से निपटने में विफल रहा है।
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