Deepinder Goyal ने Temple Device की डिलीवरी पर दी बड़ी अपडेट, Health Tech सेक्टर में मचेगी हलचल
Temple is now less than half the size of what you've seen so far.
— Deepinder Goyal (@deepigoyal) August 21, 2026
Volumetrically, Temple is now the smallest wearable on the market, and the most^10 powerful. Living and training with Temple is going to change your life.
We will start taking pre-orders for our limited launch… pic.twitter.com/L7tCEW588p
Social Media पर नहीं चलेगी मनमानी! नए नियम के तहत सिर्फ 2 घंटे में हटाना होगा आपत्तिजनक कंटेंट
भारत में सोशल मीडिया को जिस तरह से बहुत बार गलत तरीके से इस्तेमाल करने की घटनाएं सामने आती है उसको देखते हुए इसके इस्तेमाल से जुड़े नियम अब पहले से कहीं ज्यादा सख्त होने जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए नए अनुपालन यानी दिशा-निर्देश लागू किए हैं, जिनके बाद Instagram, X (पहले Twitter) और YouTube जैसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को बेहद कम समय के भीतर कार्रवाई करनी होगी।
यहाँ पर कार्रवाई करने का मतलब किसी आपत्तिजनक सामग्री को इन्टरनेट से हटाना है। नए नियमों के मुताबिक, अगर किसी प्लेटफॉर्म पर संवेदनशील या गंभीर नुकसान पहुंचाने वाला कंटेंट सामने आता है, तो उसे हटाने के लिए अब 24 घंटे नहीं, बल्कि सिर्फ 120 मिनट यानी 2 घंटे का समय मिलेगा। सरकार का मानना है कि डिजिटल दुनिया में तेजी से फैलने वाले गलत और नुकसानदायक कंटेंट को रोकने के लिए इतनी ही तेज कार्रवाई जरूरी है।
अब सिर्फ 2 घंटे में होगा एक्शन
अब तक सोशल मीडिया कंपनियों को यूजर्स की शिकायतों पर कार्रवाई करने के लिए अपेक्षाकृत ज्यादा समय मिलता था। लेकिन नए नियम लागू होने के बाद तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। अगर किसी कंटेंट को संवेदनशील या गंभीर श्रेणी में रखा जाता है, तो संबंधित प्लेटफॉर्म को महज दो घंटे के भीतर उसे हटाना होगा। यानी आपको रिव्यु कर उसे अपने पेज या फिर प्रोफाइल से हटाने के लिए अब सिर्फ दो घंटे का ही समय दिया जायेगा।
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इसका सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को मिलने की उम्मीद है जो ऑनलाइन उत्पीड़न, फर्जी वीडियो या निजी तस्वीरों के गलत इस्तेमाल जैसी समस्याओं का सामना करते हैं। कई बार ऐसे पोस्ट कुछ ही घंटों में लाखों लोगों तक पहुंच जाते हैं और पीड़ित को भारी मानसिक और सामाजिक नुकसान उठाना पड़ता है। सरकार की कोशिश है कि ऐसे मामलों में कंटेंट वायरल होने से पहले ही उसे हटाया जा सके।
किन मामलों में तुरंत हटाना होगा कंटेंट?
नई गाइडलाइन खास तौर पर उन मामलों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है जिनसे किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा, सुरक्षा या निजता पर गंभीर असर पड़ सकता है। ऐसे मामलों में शामिल हैं—
-किसी की निजी फोटो या वीडियो को उसकी अनुमति के बिना इंटरनेट पर साझा करना।
-AI की मदद से तैयार किए गए डीपफेक वीडियो, बदली हुई आवाज या चेहरा, जिनका इस्तेमाल किसी को बदनाम करने, धोखा देने या गलत जानकारी फैलाने के लिए किया जाता है।
-अदालत के आदेश या सरकार की ओर से अवैध घोषित किए गए कंटेंट को भी पहले की तुलना में काफी कम समय में हटाना होगा। जहाँ पहले आपको अदालत से जुड़े किसी भी अवेध कंटेंट को हटाने के लिए 36 घंटे तक का समय मिलता था, लेकिन अब यह सीमा घटाकर 3 घंटे कर दी गई है।
-AI से बने फोटो और वीडियो पर रहेगा साफ-साफ डिस्क्लेमर
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सरकार ने केवल कंटेंट हटाने के नियम ही नहीं बदले हैं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार होने वाले कंटेंट को लेकर भी नई पारदर्शिता अनिवार्य कर दी है।अगर कोई क्रिएटर AI की मदद से फोटो, वीडियो, ऑडियो या किसी अन्य तरह का डिजिटल कंटेंट तैयार करता है, तो उसे अपलोड करते समय स्पष्ट रूप से बताना होगा कि यह सामग्री AI से बनाई गई है। इसके साथ ऐसे कंटेंट में उचित डिस्क्लेमर और जरूरी मेटाडेटा भी शामिल करना होगा ताकि दर्शकों को शुरुआत से ही इसकी वास्तविकता का पता रहे।
अगर कोई क्रिएटर AI के इस्तेमाल की जानकारी छिपाता है, तो संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह जिम्मेदारी होगी कि वह ऐसे कंटेंट की पहचान करे। जरूरत पड़ने पर उस पर वॉटरमार्क लगाए या फिर उसे पूरी तरह हटा दे। हालांकि, स्मार्टफोन कैमरे में होने वाले सामान्य फोटो एन्हांसमेंट, कलर करेक्शन या बेसिक एडिटिंग जैसे फीचर्स इस नियम के दायरे में नहीं आएंगे।
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बड़ी टेक कंपनियों पर बढ़ेगा कानूनी दबाव
सरकार ने इन नियमों को केवल सलाह तक सीमित नहीं रखा है। इनके पालन को सीधे आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत मिलने वाली 'सेफ हार्बर' सुरक्षा से जोड़ दिया गया है। सेफ हार्बर वह कानूनी सुरक्षा है, जिसकी वजह से सोशल मीडिया कंपनियां अपने यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं मानी जातीं। लेकिन अगर कोई प्लेटफॉर्म तय समय के भीतर आपत्तिजनक कंटेंट नहीं हटाता या अवैध AI आधारित सामग्री पर कार्रवाई करने में विफल रहता है, तो उसे यह कानूनी सुरक्षा गंवानी पड़ सकती है।ऐसी स्थिति में संबंधित प्लेटफॉर्म और उसके अधिकारियों पर सिविल और आपराधिक कार्रवाई का रास्ता भी खुल सकता है।
यूजर्स पर क्या होगा असर?
इन नियमों के लागू होने के बाद आम यूजर्स के सोशल मीडिया अनुभव में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। फर्जी खबरें, डीपफेक वीडियो, गलत जानकारी और विवादित पोस्ट पहले की तुलना में कहीं तेजी से हटाई जा सकेंगी। इससे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पहले से ज्यादा नियंत्रित और सुरक्षित नजर आ सकते हैं। हालांकि, इस बदलाव का एक दूसरा पहलू भी है। इतने कम समय में कार्रवाई करने के लिए कंपनियों को बड़े पैमाने पर AI आधारित मॉडरेशन सिस्टम का सहारा लेना पड़ेगा। ऐसे में कई बार व्यंग्य, समाचार रिपोर्टिंग या पूरी तरह वैध पोस्ट भी गलती से नियमों के दायरे में आ सकती हैं और उन्हें अस्थायी रूप से हटा दिया जा सकता है।
यानी आने वाले समय में सोशल मीडिया पर कंटेंट की निगरानी पहले से कहीं ज्यादा तेज और सख्त होगी। इसका उद्देश्य ऑनलाइन सुरक्षा बढ़ाना और AI के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाना है, लेकिन इसके साथ यह चुनौती भी बनी रहेगी कि वैध और अभिव्यक्ति की आजादी से जुड़े कंटेंट पर अनजाने में असर न पड़े।
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