NPS Charge: नेशनल पेंशन स्कीम में अब कितना लगेगा चार्ज? PFRDA ने जारी किया नया फीस स्ट्रक्चर
नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में निवेश करने वाले लोगों के लिए जरूरी खबर है। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने एनपीएस और एनपीएस लाइट के तहत पॉइंट ऑफ प्रजेंस (PoP) के लिए चार्ज स्ट्रक्चर में बदलाव किया है।
नई व्यवस्था 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगी। इसके तहत एनपीएस खाताधारकों से एक बार का ऑनबोर्डिंग चार्ज और सालाना एयूएम आधारित शुल्क लिया जाएगा। पीएफआरडीए ने यह सर्कुलर 28 अगस्त 2026 को जारी किया है।
PRAN पर 200 का ऑनबोर्डिंग चार्ज
नए नियम के तहत एनपीएस में नए खाते यानी PRAN के लिए 200 का वन-टाइम ऑनबोर्डिंग चार्ज तय किया गया। यह रकम सीधे बैंक खाते से अलग से नहीं काटी जाएगी। सीआरए यानी सेंट्रल रिकॉर्डकीपिंग एजेंसी इसे यूनिट्स कैंसिल करके वसूल करेगी।
इसमें हर तिमाही 50 के बराबर राशि काटी जाएगी और ऑनबोर्डिंग पूरी होने वाली तिमाही के अगले महीने में पीओपी को भुगतान किया जाएगा। हालांकि, अगर ग्राहक की ऑनबोर्डिंग पूरी तरह डिजिटल और बिना आमने-सामने की प्रक्रिया के होती है तो 100 का कम ऑनबोर्डिंग चार्ज लागू हो सकता है। यह चार्ज पीएफआरडीए द्वारा PoP के लिए निर्धारित किया जाएगा।
10 लाख के NPS फंड पर करीब 2 हजार सालाना चार्ज
नए स्ट्रक्चर में सबसे अहम बदलाव सालाना शुल्क का है। एनपीएस खाताधारक के एयूएम यानी एसेट अंडर मैनेजमेंट का 0.20% सालाना PoP चार्ज लिया जाएगा। यह रकम एनएवी में एडजस्ट की जाएगी और तिमाही आधार पर PoP को भुगतान किया जाएगा।
उदाहरण के लिए, अगर किसी एनपीएस खाते में 10 लाख का AUM है तो 0.20% के हिसाब से सालाना पीओपी चार्ज करीब 2000 होगा। इस पर लागू GST या अन्य टैक्स अलग से हो सकते हैं। चूंकि यह शुल्क एनएवी के जरिए एडजस्ट होगा, इसलिए निवेशक को बैंक खाते से अलग से 2000 कटने जैसा नजर नहीं आएगा।
निष्क्रिय खाते पर नहीं लगेगा PoP चार्ज
पीएफआरडीए ने निष्क्रिय यानी Dormant Account को इस सालाना चार्ज से बाहर रखा है। किसी खाते में किसी तिमाही में योगदान करने के बाद लगातार चार तिमाहियों तक कोई नया योगदान नहीं होता है तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत डॉरमेंट खाता माना जाएगा। ऐसे खाते पर PoP चार्ज नहीं लिया जाएगा।
e-NPS वालों को मिलेगी राहत
डिजिटल तरीके से NPS में शामिल होने वाले ग्राहकों के लिए भी महत्वपूर्ण प्रावधान है। जो ग्राहक e-NPS के जरिए ऑनबोर्ड हुए हैं और बाद में भी e-NPS या D-Remit के जरिए योगदान करते हैं, उनसे PoP चार्ज नहीं लिया जाएगा। लेकिन अगर किसी व्यक्ति ने शुरुआत में पीओपी के जरिए एनपीएस खाता खोला है, तो बाद में e-NPS या D-Remit से योगदान करने पर भी वह निर्धारित PoP चार्ज से मुक्त नहीं होगा।
पेंशन रेगुलेटरी अथॉरिटी ने सभी PoPs को अपनी वेबसाइट पर नई चार्ज स्ट्रक्चर सार्वजनिक करने और डिजिटल ऑनबोर्डिंग के दौरान ग्राहकों को इसकी स्पष्ट जानकारी देने का निर्देश दिया है। नए चार्ज की कटौती सीआरए द्वारा FY 2026-27 की तीसरी तिमाही (Q3) से शुरू की जाएगी। PFRDA के नए सर्कुलर में यह भी साफ किया गया है कि यह व्यवस्था 10 मार्च 2026 के पिछले पीओपी चार्ज सर्कुलर को 1 अक्टूबर 2026 से सुपरसीड करेगी।
(प्रियंका कुमारी)
India's GDP: रिजर्व बैंक के अनुमान से तेज दौड़ी अर्थव्यवस्था, पहली तिमाही में जीडीपी 7.8%
भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। अप्रैल से जून 2026 के दौरान देश की जीडीपी ग्रोथ 7.8 फीसदी रही। यह आंकड़ा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 7 फीसदी के अनुमान से 0.8 प्रतिशत अंक ज्यादा है।
इससे संकेत मिलता है कि महंगी ऊर्जा और वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक दबाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बनी हुई है। हालांकि, जून तिमाही की ग्रोथ जनवरी-मार्च तिमाही के मुकाबले कम रही है। जनवरी-मार्च में GDP ग्रोथ 8.6 फीसदी रही थी, जिसे पहले 7.8 फीसदी बताया गया था और बाद में संशोधित कर 8.6 फीसदी किया गया।
वहीं, एक साल पहले यानी अप्रैल-जून 2025 में देश की GDP ग्रोथ 6.9 फीसदी रही थी। इस लिहाज से इस साल की पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था ने सालाना आधार पर बेहतर प्रदर्शन किया है।
महंगे तेल के बावजूद मजबूत रही भारतीय अर्थव्यवस्था
GDP का यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दौरान पश्चिम एशिया में युद्ध के चलते ऊर्जा की कीमतों में तेज बढ़ोतरी और सप्लाई से जुड़ी परेशानियां सामने आई थीं। इसके असर से थोक महंगाई बढ़ी, जबकि खुदरा महंगाई में भी तेजी आने लगी थी। ऐसे माहौल में आर्थिक गतिविधियों के कमजोर पड़ने की आशंका थी और RBI ने भी अपेक्षाकृत कम ग्रोथ का अनुमान लगाया था।
लेकिन ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने ऊर्जा कीमतों के इस दबाव को फिलहाल काफी हद तक झेल लिया है। जून तिमाही के बेहतर आंकड़े आने के बाद अर्थशास्त्रियों ने पूरे वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपने GDP अनुमान को बढ़ाना शुरू कर दिया है।
आगे ग्रोथ में नरमी का अनुमान
RBI को आने वाली तिमाहियों में विकास दर में कुछ नरमी की उम्मीद है। 5 अगस्त को जारी अनुमान के मुताबिक जुलाई-सितंबर तिमाही में ग्रोथ 6.4 फीसदी, अक्टूबर-दिसंबर में 6.5 फीसदी और जनवरी-मार्च 2027 में 6.8 फीसदी रहने का अनुमान है। अप्रैल-जून 2027 के लिए RBI ने 7.3 फीसदी ग्रोथ का अनुमान लगाया है।
पूरे वित्त वर्ष 2026-27 के लिए RBI का मौजूदा GDP ग्रोथ अनुमान 6.7 फीसदी है। पहली तिमाही का 7.8 फीसदी आंकड़ा इस अनुमान से ऊपर है, लेकिन आने वाली तिमाहियों में विकास दर कितनी टिकाऊ रहती है, यह घरेलू मांग, महंगाई, ऊर्जा कीमतों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
(प्रियंका कुमारी)
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