देशभर में 26 लाख छात्र स्कूल से बाहर हुए:कहीं स्कूल का मर्जर कहीं दूरी बन रही समस्या, मप्र में 51% स्कूल बंद
देशभर में एक और जहां स्कूल को बेहतर करने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं आए दिन स्कूलों की अव्यवस्थाओं की तस्वीरें सामने आ रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में बीते 10 सालों में 94 हजार से ज्यादा स्कूल बंद हुए हैं और इनमें सबसे ज्यादा स्कूल मध्य प्रदेश के शामिल हैं। लगभग 26 लाख बच्चे ड्रॉप आउट हुए ये स्कूल कम एनरोलमेंट की वजह से मर्ज कर दिए गए हैं या अस्थाई तौरपर बंद कर दिए गए हैं। UDISE की रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में पिछले 5 सालों में सरकारी स्कूल में छात्रों का ड्रॉप आउट रेट लगातार बढ़ रहा है। 2024-25 में छात्रों का एनरोलमेंट 12.15 था जो सेशन 2025-26 में घटकर 11.89% पर आ गया है। इसके साथ ही प्राइवेट स्कूल का एनरोलमेंट पिछले 5 सालों में बढ़ा है। इसी दौरान सरकारी स्कूलों में एनरोलमेंट 26 लाख से ज्यादा घटा है, 2024-25 के करीब 12.15 करोड़ था, जो घटकर 2025-26 में 11.89 करोड़ हो गया है। ड्रॉप आउट रेट भी बढ़ा मप्र में 15.25 लाख छात्र ड्रॉपबॉक्स हुए रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल प्रदेश के स्कूलों से 15.25 लाख छात्र गायब रहे और इस साल फिर 11.12 लाख छात्र स्कूल से ड्रॉपबॉक्स यानी बाहर हो सकते हैं। ऐसे बच्चे जो किन्हीं कारणों से पिछले स्कूल से तो निकल चुके हैं लेकिन नए स्कूल में एडमिशन नहीं लिया है। ऐसे बच्चों को ट्रैक करना मुश्किल है। छात्रों के रजिस्ट्रेशन में 17 लाख का अंतर सत्र 2025-26 में राज्य के शिक्षा पोर्टल पर रजिस्टर्ड छात्र 1.35 करोड़ थे, जबकि यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (UDISE) रिपोर्ट में ये डेटा 1.52 करोड़ था। वहीं इस डेटा पर अधिकारियों का तर्क है कि ये अंतर इसलिए है, क्योंकि इस डेटा में 17 लाख का प्री-प्राइमरी डेटा भी फीड होता है। इसलिए ये अंतर आता है। UDISE के मुताबिक राज्य में क्लास 1 से 12वीं तक का रिटेंशन रेट 37.3% पर है, जो नेशनल एवरेज 51.9% से काफी पीछे है। इस डेटा के मुताबिक 12वीं तक पहुंचते-पहुंचते 62.7% बच्चे स्कूल की मुख्यधारा से दूर हो चुके हैं। देशभर के 50% स्कूल सिर्फ मध्य प्रदेश में बंद या मर्ज मध्य प्रदेश में 2025-26 के दौरान 2,426 सरकारी स्कूल बंद हुए हैं या किसी दूसरे स्कूलों में मर्ज (विलय) कर दिए गए हैं। यह आंकड़ा UDISE+ 2025-26 से संबंधित रिपोर्टों में सामने आया है। अब तक मध्य प्रदेश में 2,426 स्कूल या तो बंद हुए हैं या मर्ज कर दिए गए हैं। वहीं देशभर में स्कूल का ये आंकड़ा 4,791 हैं यानी, 50.6% स्कूल सिर्फ मध्य प्रदेश में बंद हुए हैं। स्कूलों की दूसरी 1-5 किमी तक बढ़ी वहीं स्कूलों को बंद करने की बड़ी वजह कम नामांकन बताकर प्राथमिक स्कूलों को बंद कर दिया जाना है। स्कूल बंद होने से बच्चों के लिए स्कूल की दूरी 1 से 5 किमी तक बढ़ गई है। वहीं ट्रांसपोर्ट की कोई सुविधान नहीं होने से इन बच्चों को 1-5 किमी तक पैदल स्कूल जाना पड़ रहा है। वहीं स्कूल बंद होने की वजह से पेरेंट्स के ऊपर बच्चों के लिए स्कूल की दूरी और सुरक्षा का भी बोझ बढ् गया है। इसी आर्थिक बोझ के चलते गरीब परिवार बच्चों की पढ़ाई छुड़वाने को मजबूर हैं या उन्हें अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में भेजना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा ड्रॉपबॉक्स इंदौर में वहीं यदि बच्चों की बात की जाए तो सबसे ज्यादा बच्चे 45,233 इंदौर में ड्रॉपबॉक्स हुए हैं। इसके बाद सबसे ज्यादा मुरैना में 44,466, ग्वालियर में 40,663, भोपाल में 38,072 और सागर में 35,953 ड्रॉपबॉक्स हुए हैं। हाल ही में स्कूल मर्ज को लेकर प्रदर्शन भी हुए हाल ही में उज्जैन में सराफा कन्या विद्यालय को दाऊदखेड़ी शिफ्ट करने का फैसला लिया गया था, जिसके विरोध में छात्राओं ने प्रदर्शन किया था। इस विरोध प्रदर्शन में छात्राओं का कहना था कि स्कूल मर्ज होने से वे 10 किमी दूर हो जाएंगी, जिससे उनके लिए स्कूल जाना मुश्किल होगा। स्कूल मर्जर के बाद छात्राओं की संख्या घटी हाल ही में उज्जैन में सराफा कन्या विद्यालय को दाऊदखेड़ी शिफ्ट करने का आदेश दिया गया था।स्कूल के दूर शिफ्ट किये जाने के आदेश के बाद स्कूल में छात्राओं की संख्या में बड़ी गिरावट आई थी। पहले स्कूल में करीब 580 छात्राएं थीं, जो घटकर 415 रह गईं, यानी 165 छात्राओं की संख्या कम हुई। कक्षा 9वीं में भी छात्राओं की संख्या 180 से घटकर करीब 120 रह गई। प्रशासन ने कहा- 3.16 लाख बच्चे जोड़े गए शिक्षा केंद्र के अपर संचालक के मुताबिक, 2025-26 के मुकाबले 2026-27 में नामांकन बड़े हैं। चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम से 3.16 लाख बाहर हुए बच्चों को दोबारा जोड़ा गया है। इस बार ट्रेकिंग के लिए शिक्षकों को समय पोर्टल के जरिए 6 साल के बच्चों को जोड़ा गया है। ---------------------------- ये खबर भी पढ़ें.. 4 सितंबर के करेंट अफेयर्स:तमिलनाडु में ओलिंपिक सिटी डेवलप की जाएगी, तेलंगाना का गोल्लाला गुड़ी मंदिर राष्ट्रीय स्मारक घोषित आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं-पूरी खबर पढ़ें..
100 कंटेस्टेंट, बिना दर्शकों का एरिना और दिमागी खेल:ऐसा है अनिल कपूर के ‘इंडिया के टॉप 1%’ का सेट
मुंबई में ‘इंडिया के टॉप 1%’ का सेट किसी सामान्य क्विज शो के सेट जैसा नहीं है। यहां न दर्शकों के लिए अलग सीटिंग है और न ही एक कंटेस्टेंट हॉट सीट पर बैठकर सवालों का जवाब देता है। इसके बजाय पूरे एरिना में देशभर से आए 100 प्रतिभागी एक साथ खेलते हैं। सेट के बीचों-बीच अनिल कपूर के लिए कोई पारंपरिक हॉट सीट भी नहीं है। वे इन 100 कंटेस्टेंट्स के बीच घूमते हुए सवाल पूछेंगे। करीब एक महीने में तैयार किए गए इस विशाल सेट पर 100 से ज्यादा लोगों ने काम किया। सेट डिजाइनर वर्षा जैन के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी चुनौती एक साथ 100 प्रतिभागियों के लिए तकनीकी व्यवस्था तैयार करना था। आंखों देखा हाल: 100 लोगों के लिए तैयार किया गया विशाल एरिना सेट में कदम रखते ही सबसे पहले इसका विशाल आकार ध्यान खींचता है। पूरा एरिना इस तरह डिजाइन किया गया है कि एक साथ 100 प्रतिभागी बैठकर गेम खेल सकें। यहां पारंपरिक क्विज शो की तरह दर्शकों की भीड़ नहीं है। जो लोग दिखाई देंगे, वे सभी खेल का हिस्सा होंगे। सेट का पूरा डिजाइन प्रतिभागियों और होस्ट अनिल कपूर के बीच सीधा कनेक्शन बनाने के हिसाब से तैयार किया गया है। अनिल कपूर किसी एक कंटेस्टेंट के सामने बैठकर सवाल नहीं पूछेंगे, बल्कि 100 लोगों के बीच मौजूद रहकर उनसे सवाल करेंगे। अनिल कपूर के लिए नहीं है पारंपरिक ‘हॉट सीट’ सेट के बीच में एक खास सीट नजर आती है, जिसे देखकर पहली नजर में इसे हॉट सीट समझा जा सकता है। हालांकि, यह पारंपरिक हॉट सीट नहीं है। अनिल कपूर इस सीट पर बैठकर गेम होस्ट नहीं करेंगे। वे इसके आसपास घूमते हुए पूरे एरिना में मौजूद 100 प्रतिभागियों से सवाल करेंगे। यानी होस्ट और कंटेस्टेंट के बीच की दूरी को सेट डिजाइन के स्तर पर ही कम रखा गया है। छत पर लगी हैं 100 खास लाइट्स इस सेट की सबसे दिलचस्प चीजों में से एक इसकी लाइटिंग है। वर्षा जैन के मुताबिक सेट की छत पर 100 लाइट पॉइंट लगाए गए हैं। हर लाइट एक प्रतिभागी के लिए है। गेम के दौरान किसी सवाल के जवाब के हिसाब से इन लाइट्स को प्रोग्राम किया जाएगा। सही और गलत जवाब के साथ लाइटिंग में बदलाव होगा, जिससे पूरे एरिना में गेम का असर दिखाई देगा। वर्षा जैन ने बताया कि 100 लोगों के लिए एक साथ कैमरा और लाइटिंग को प्रोग्राम करना तकनीकी तौर पर काफी चुनौतीपूर्ण था। यही वजह है कि सेट तैयार होने के बाद भी करीब 10 दिन तक तकनीकी जांच और रिहर्सल चलती रही। एक महीने में तैयार हुआ सेट इस विशाल सेट को तैयार करने में करीब एक महीने का समय लगा। हालांकि, इसकी प्लानिंग इससे पहले ही शुरू हो गई थी और डिजाइन तैयार करने में करीब दो महीने लगे। वर्षा जैन के मुताबिक सेट पर काम करने के दौरान रोजाना 100 से ज्यादा लोग जुटे रहे। सेट तैयार होने के बाद कैमरों, लाइट्स और तकनीकी सिस्टम की लगातार जांच की गई, ताकि शूटिंग के दौरान 100 प्रतिभागियों के साथ गेम को आसानी से संचालित किया जा सके। वर्षा जैन ने बताया कि इंटरनेशनल फॉर्मेट होने के कारण सेट डिजाइन में तय गाइडलाइन का भी पालन करना था। इसके साथ भारतीय दर्शकों और शो की जरूरत के मुताबिक अपनी क्रिएटिव व्याख्या भी जोड़ी गई। ‘केबीसी’ जैसा दिखता है, लेकिन गेम बिल्कुल अलग पहली नजर में ‘इंडिया के टॉप 1%’ का सेट देखने पर इसे अमिताभ बच्चन के ‘कौन बनेगा करोड़पति’ से जोड़ा जा सकता है, लेकिन दोनों के फॉर्मेट में बड़ा अंतर है। वर्षा जैन के मुताबिक ‘केबीसी’ में होस्ट एक समय में एक कंटेस्टेंट के साथ खेलते हैं और आसपास दर्शक मौजूद रहते हैं। ‘इंडिया के टॉप 1%’ में ऐसा नहीं है। यहां अनिल कपूर एक साथ पूरे 100 प्रतिभागियों के साथ खेलते हैं और सेट पर अलग से दर्शकों की मौजूदगी नहीं है। उनके मुताबिक शो की वाइब, होस्ट की एनर्जी, सवालों का अंदाज और सेट का लुक- सब कुछ ‘केबीसी’ से अलग रखा गया है। क्या है ‘इंडिया के टॉप 1%’ का कॉन्सेप्ट? ‘इंडिया के टॉप 1%’ लोकप्रिय ब्रिटिश गेम शो ‘द 1% क्लब’ का भारतीय संस्करण है। शो में देशभर से अलग-अलग पेशों और बैकग्राउंड के 100 लोग एक साथ गेम खेलते हैं। इसकी खासियत यह है कि इसमें इतिहास, भूगोल या किताबों से जुड़े सामान्य ज्ञान के सवालों पर ज्यादा जोर नहीं है। यहां कंटेस्टेंट की रीजनिंग, लॉजिक, ऑब्जर्वेशन, पैटर्न पहचानने की क्षमता, कॉमन सेंस और प्रेजेंस ऑफ माइंड को परखा जाता है। शो के कंसल्टेंट सिद्धार्थ बसु के मुताबिक इसका मकसद सिर्फ यह देखना नहीं है कि किसी व्यक्ति ने कितना किताबी ज्ञान हासिल किया है, बल्कि यह देखना है कि वह अपने सामने मौजूद चीजों को किस तरह समझता और उसका लॉजिक पकड़ता है। 90% से शुरू होकर 1% तक पहुंचता है खेल इस गेम का तरीका भी दूसरे क्विज शो से अलग है। शुरुआत में सवाल ऐसा होता है, जिसका जवाब देश के करीब 90% लोग दे सकते हैं। इसके बाद सवालों का स्तर धीरे-धीरे कठिन होता जाता है। इसके बाद 80%, 70%, 60% और आगे बढ़ते हुए सवालों का स्तर उस मुकाम तक पहुंचता है, जहां सिर्फ 1% लोग ही उसका सही जवाब दे पाते हैं। यही इस शो का मूल कॉन्सेप्ट है- देखना कि कौन-सा प्रतिभागी अपनी सोच और समझ के दम पर भारत के उस 1% लोगों में शामिल हो सकता है, जो सबसे मुश्किल सवाल का जवाब दे पाए। हर एपिसोड में 100 नए खिलाड़ी शो में हर एपिसोड 100 लोग गेम खेलते हैं। खास बात यह है कि इसमें प्राइज मनी का सफर भी इसी गेम के साथ आगे बढ़ता है। शो में प्रतिभागियों को पहले से एक लाख रुपए की राशि दी जाती है और गेम के दौरान वे आगे बढ़ते हुए बड़ी रकम जीत सकते हैं। शो में अधिकतम प्राइज मनी 1 करोड़ रुपए तक है। सिद्धार्थ बसु के मुताबिक हर एपिसोड में यह देखा जाएगा कि 100 में से कौन प्रतिभागी गेम में सबसे आगे तक पहुंच पाता है। इसमें किसी एक एपिसोड की रकम को अगले एपिसोड में ले जाने वाला रोलओवर सिस्टम नहीं है। ‘1%’ तक पहुंचने के लिए नहीं चाहिए बड़ी डिग्री इस गेम की एक खास बात यह भी है कि इसमें किसी खास शैक्षणिक डिग्री या प्रोफेशनल बैकग्राउंड की जरूरत नहीं है। सिद्धार्थ बसु ने अनिल कपूर को इसका उदाहरण बताते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को सफल होने के लिए जरूरी नहीं कि उसने इंजीनियरिंग या मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई की हो या यूपीएससी जैसी परीक्षा की तैयारी की हो। उनके मुताबिक शो इस बात पर केंद्रित है कि किसी व्यक्ति के भीतर मौजूद समझ, तर्क और सोचने की क्षमता उसे कितना आगे ले जा सकती है। अनिल कपूर को क्यों चुना गया होस्ट? ‘इंडिया के टॉप 1%’ को अनिल कपूर होस्ट कर रहे हैं। सिद्धार्थ बसु के मुताबिक जब उन्हें बताया गया कि अनिल कपूर जैसे अभिनेता और परफॉर्मर को शो से जोड़ा जा रहा है, तो उन्हें लगा कि वे इस कॉन्सेप्ट के लिए बिल्कुल सही उदाहरण हैं। उनका कहना है कि अनिल कपूर ने अपने करियर में लंबे समय तक मेहनत, लगन और अपने काम के प्रति समर्पण के दम पर अपनी पहचान बनाई है। इसलिए वे शो के उस विचार से भी मेल खाते हैं कि किसी व्यक्ति की सफलता सिर्फ उसकी डिग्री या किताबी ज्ञान से तय नहीं होती। सिद्धार्थ बसु ने यह भी बताया कि वे इस शो के निर्माता या निर्देशक नहीं हैं, बल्कि कंसल्टेंट के तौर पर इससे जुड़े हैं। अनिल कपूर के साथ पहले भी काम कर चुके हैं सिद्धार्थ बसु सिद्धार्थ बसु और अनिल कपूर का इससे पहले भी काम का अनुभव रहा है। उन्होंने बताया कि ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ के दौरान भी अनिल कपूर से जुड़े ट्रेनिंग और शूटिंग के हिस्से में उनकी कंपनी और उन्होंने काम किया था। इसी अनुभव के कारण वे अनिल कपूर की तैयारी और काम के प्रति लगन से परिचित हैं। उनके मुताबिक अनिल कपूर जिस मेहनत और समर्पण के साथ किसी प्रोजेक्ट के लिए तैयारी करते हैं, वही इस शो के लिए भी दिखाई दे रहा है। शो में कैसे ले सकते हैं हिस्सा? ‘इंडिया के टॉप 1%’ में हिस्सा लेने के लिए शो की ओर से ओपन कॉल फॉर एंट्री का प्रोसेस रखा गया है। इच्छुक प्रतिभागी बताए गए माध्यम से रजिस्टर कर सकते हैं। इसके बाद उनसे कुछ सवाल पूछे जाते हैं। सही जवाब देने वाले प्रतिभागियों को अगले चरण के लिए चुना जाता है। इसके बाद स्टेज-बाय-स्टेज सिलेक्शन प्रोसेस के जरिए प्रतिभागी शो तक पहुंचते हैं। शो से जुड़े नियम और सिलेक्शन की जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाती है। 19 सितंबर से शुरू होगा शो ‘इंडिया के टॉप 1%’ का प्रीमियर 19 सितंबर 2026 से रात 8 बजे स्टार प्लस पर होगा। शो को जियोहॉटस्टार पर भी देखा जा सकेगा। कुल मिलाकर यह शो सामान्य क्विज शो से अलग इस सवाल पर केंद्रित है कि 100 लोगों में से कौन अपनी सोच, लॉजिक और ऑब्जर्वेशन के दम पर उस 1% तक पहुंच सकता है। वहीं इसका विशाल एरिना, 100 प्रतिभागियों के लिए तैयार की गई लाइटिंग और उनके बीच घूमते हुए गेम होस्ट करने वाले अनिल कपूर इसे टीवी के दूसरे क्विज शो से अलग लुक देते हैं।
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