Palghar में अस्पताल कर्मचारियों से मारपीट पर Rahul Gharat गिरफ्तार, शिंदे ने पार्टी से निकाला
पालघर, सात सितंबर पुलिस ने निजी अस्पताल के कर्मचारियों पर एक दिन पहले हुए हमले के सिलसिले में सोमवार को शिवसेना के पालघर शहर प्रमुख राहुल घरात को गिरफ्तार किया। यह हमला कथित तौर पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने किया था। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने घरात को पार्टी से निलंबित करने की घोषणा की।
पालघर थाने के निरीक्षक किशोर महानुभाव ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद घरात को स्थानीय मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जिन्होंने उसे एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। उन्होंने कहा कि मामले की जांच जारी है और पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है। यह मामला पालघर के रिलीफ अस्पताल में घायल दही हांडी प्रतिभागियों (गोविंदाओं) के इलाज के बकाया बिल को लेकर हुए हंगामे से जुड़ा है।
रविवार तड़के 15 से 20 लोगों का एक समूह, जिन्हें शिवसेना के पदाधिकारी और कार्यकर्ता बताया गया है, जबरन अस्पताल के कैजुअल्टी वार्ड और आईसीयू में घुस गया था। आरोप है कि समूह में शामिल घरात ने अस्पताल के एक कर्मचारी को थप्पड़ मारा, जबकि शिवसेना के पालघर जिला प्रमुख कुंदन सांखे और अन्य लोगों ने डॉक्टरों को धमकाया तथा भर्ती एक मरीज को जबरन बाहर ले गए। पुलिस ने सांखे, घरात और स्थानीय विधायक राजेंद्र गावित के बेटे रोहित समेत 17 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
उन पर भारतीय न्याय संहिता और ‘महाराष्ट्र मेडिकेयर सर्विस पर्सन्स एंड मेडिकेयर सर्विस इंस्टीट्यूशंस’ अधिनियम के तहत मारपीट, आपराधिक धमकी, अनधिकृत प्रवेश, गैरकानूनी जमावड़ा और अन्य आरोप लगाए गए हैं। प्राथमिकी अस्पताल के बिलिंग काउंटर संभालने वाले विवेक बाबुलिंगा की शिकायत पर दर्ज की गई। पणजी के पास पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में शामिल होने के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए शिवसेना प्रमुख एवं उपमुख्यमंत्री शिंदे ने घरात को पार्टी से निलंबित करने की घोषणा की।
शिवसेना भाजपा नीत महायुति गठबंधन का घटक है। उन्होंने कहा कि यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और चिकित्सा कर्मचारियों के साथ शारीरिक मारपीट को शिवसेना कभी उचित नहीं ठहरा सकती और न ही उसका समर्थन कर सकती है। शिंदे ने कहा कि चिकित्सा उपचार से संबंधित किसी भी शिकायत का समाधान कानून के तहत किया जाना चाहिए, न कि कानून अपने हाथ में लेकर।
उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा को लेकर कड़ी चेतावनी भी दी। शिवसेना की प्रवक्ता सुसीबेन शाह ने भी कहा कि कोई भी राजनीतिक संबद्धता कानून अपने हाथ में लेने को उचित नहीं ठहरा सकती और जवाबदेही व्यक्तिगत, निष्पक्ष तथा बिना किसी समझौते के तय होनी चाहिए। इस बीच, विपक्षी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) ने सत्तारूढ़ गठबंधन पर तीखा हमला बोला।
राकांपा (शप) के वरिष्ठ नेता महेश तापसे ने अस्पताल कर्मचारियों पर हमले की निंदा करते हुए इसे ‘‘सत्ता के अहंकार से पैदा हुई संगठित गुंडागर्दी’’ बताया। उन्होंने ठाणे जिले के पड़ोसी डोंबिवली में स्वास्थ्यकर्मियों पर हुए पिछले हमले का जिक्र करते हुए प्राथमिकी में नामजद सभी 17 आरोपियों के खिलाफ राजनीतिक संरक्षण के बिना सख्त कार्रवाई की मांग की। शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे पर छह जुलाई को ठाणे के एक अस्पताल में डॉक्टरों के साथ मारपीट करने का आरोप लगा था।
कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (केडीएमसी) के पार्षद और अन्य लोग डोंबिवली स्थित नगर निगम के शास्त्री नगर अस्पताल में एकत्र हुए थे और एक महिला मरीज के इलाज में कथित देरी को लेकर हुए विवाद के बाद डॉक्टरों से कथित तौर पर मारपीट की थी। ठाणे की एक अदालत ने 14 जुलाई को म्हात्रे को जमानत दी थी, जिसे बाद में मुंबई उच्च न्यायालय ने स्थगित कर दिया था। उच्च न्यायालय ने सात अगस्त को म्हात्रे और मामले के कुछ अन्य आरोपियों को जमानत दे दी थी और उन पर कड़ी शर्तें लगाई थीं।
Rajasthan निकाय चुनाव में Congress को जिताने के लिए Ashok Gehlot ने जनता से की अपील
जयपुर, सात सितंबर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को आगामी नगरीय निकाय चुनाव में मतदाताओं से कांग्रेस उम्मीदवारों को जिताने की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के कार्यकाल में राज्य के शहरों की उपेक्षा हुई है और जनता में सरकार के प्रति आक्रोश है। गहलोत ने एक बयान में कहा कि राज्य में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव जनता के लिए महत्वपूर्ण अवसर हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के ढाई साल के कार्यकाल में शहरों में विकास कार्य प्रभावित हुए हैं और आम लोगों में सरकार के प्रति नाराजगी है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “शहरों की सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हैं, गड्ढे तक नहीं भरे जा रहे हैं। बारिश से पहले नालों की सफाई नहीं की गई, जिसके कारण कई शहरों में जलभराव की स्थिति पैदा हुई।” उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के समय शुरू की गई कई जनकल्याणकारी योजनाएं भाजपा सरकार में या तो बंद कर दी गईं या केवल कागजों तक सीमित रह गईं।
इनमें पेंशन योजना, नि:शुल्क दवा योजना, चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना, छात्रवृत्ति, इंदिरा गांधी शहरी रोजगार योजना और इंदिरा रसोई योजना शामिल हैं। गहलोत ने कहा कि शहरों में आवारा पशुओं की समस्या, सफाई व्यवस्था की खराब स्थिति, बढ़ता प्रदूषण और यातायात जाम से आम लोग परेशान हैं, लेकिन सरकार के पास इन समस्याओं के समाधान की कोई ठोस योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी पिछली कांग्रेस सरकार ने शहरी विकास का एक मॉडल तैयार किया था।
कोटा को सिग्नल मुक्त बनाया गया और जयपुर में भी कई प्रमुख चौराहों को सिग्नल मुक्त करने की योजना शुरू की गई। इसके अलावा सैकड़ों फ्लाईओवर और अंडरपास बनाए गए। गहलोत ने आरोप लगाया कि मौजूदा भाजपा सरकार इस दिशा में कोई उल्लेखनीय काम नहीं कर पाई है और कांग्रेस सरकार के समय स्वीकृत कई परियोजनाओं को भी रोक दिया गया है।
कांग्रेस नेता ने मतदाताओं से अपील करते हुए कहा कि वार्ड पार्षद और महापौर का चुनाव केवल राजनीतिक फैसला नहीं है, बल्कि इससे तय होगा कि स्थानीय स्तर पर सड़क, सीवेज, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं की स्थिति कैसी होगी। पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार की स्थिति गंभीर हो गई है और आम जनता की सुनवाई नहीं हो रही है।
उन्होंने दावा किया कि निकाय चुनाव में हार के बाद ही सरकार को जनता की ताकत का एहसास होगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के रोड शो पर निशाना साधते हुए गहलोत ने कहा कि जनता अब सरकार की वास्तविक स्थिति समझ चुकी है और नौ तथा 11 सितंबर को मतदान के जरिए अपना जवाब देगी। उन्होंने कहा कि जब जनता भाजपा को चुनाव में हराएगी, तभी सरकार काम करने के लिए मजबूर होगी और इसका लाभ अंततः प्रदेश के लोगों को मिलेगा।
गहलोत ने प्रदेशवासियों से कांग्रेस प्रत्याशियों को भारी मतों से जिताने की अपील करते हुए कहा कि अधिक से अधिक कांग्रेस बोर्ड बनने से प्रदेश के विकास को फिर गति मिलेगी। गौरतलब है कि राजस्थान के सभी 309 नगरीय निकायों के चुनाव दो चरणों में नौ और 11 सितंबर को होंगे, जबकि मतगणना और परिणाम की घोषणा 14 सितंबर को की जाएगी।
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