देशभर में प्रशासनिक फेरबदल का सिलसिला जारी है। कर्नाटक में आईपीएस अधिकारियों (IPS Transfer) का तबादला किया गया है। बेंगलुरु सिटी के इंटेलिजेंस डीसीपी बदले गए हैं। इसके अलावा एक आईपीएस अफसर को प्रमोशन भी मिला है। चंडीगढ़ में तीन आईपीएस और एक DANIPS अधिकारी को नया पदभार सौंपा गया है। तबादले और नियुक्ति से संबंधित आदेश 7 सितंबर को जारी किया गया है।
कर्नाटक में बैच 2014 की आईपीएस अधिकारी अनीता भीमाप्पा हड्डान्नवर, डीसीपी साउथवेस्ट बेंगलुरु को स्थानांतरित करके तत्काल प्रभाव से पुलिस अधीक्षक क्रिमिनल इन्वेस्टीगेशन डिपार्टमेंट पद पर नियुक्त किया गया है। बैच 2018 के आईपीएस अधिकारी डॉ राम एल अरसिद्दी जो पोस्टिंग की प्रतीक्षा कर रहे थे, उन्हें डीसीपी इंटेलिजेंस बेंगलुरु सिटी पद पर नियुक्त किया गया है।
कर्नाटक में इन आईपीएस अफसरों का भी तबादला हुआ
लक्ष्मी गणेश के. जो पोस्टिंग के प्रतीक्षा कर रहे थे, उन्हें डीसीपी साउथवेस्ट बेंगलुरु पद की जिम्मेदारी दी गई है। बेंगलुरु सिटी के लॉ एंड ऑर्डर डीसीपी पद पर सैम वर्गीज को नियुक्त किया गया है, जो पहले क्रिमिनल इन्वेस्टीगेशन डिपार्टमेंट बेंगलुरु के एसपी पद पर कार्यरत थे।
सोमवार को जारी आदेश के तहत बैच 1994 की आईपीएस अधिकारी बी. दयानंद अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक प्रशिक्षण बेंगलुरु को आईपीएस वेतन नियम 2016 के वेतन मैट्रिक्स लेवल 6 के वेतनमान वाले पुलिस महानिदेशक के ग्रेड में कार्य करने के लिए 12 सितंबर से प्रमोट किया गया है। उन्हें डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस इंटरनल सिक्योरिटी डिवीजन के पद पर तत्काल प्रभाव से नियुक्त किया गया है।
चंडीगढ़ आईपीएस तबादले
राजेश कुमार शर्मा को जम्मू कश्मीर से ट्रांसफर पर SSP/ ऑपरेशंस, साइबर क्राइम कमांडेंट/आईआरबी और असिस्टेंट कमांडेंट जनरल होमगार्ड पद पर नियुक्त किया गया है। दिल्ली से ट्रांसफर पर विनीत कुमार को SP/ मुख्यालय एवं संचार, सतर्कता पद की जिम्मेदारी दी गयी है। अनुराग दारू, कमांडेंट/आईआरबी, सहायक कमांडेंट जनरल होम गार्ड और एसपी/ सुरक्षा एवं यातायात का अतिरिक्त प्रभार और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सुरक्षा एवं यातायात को एसपी क्राइम, इकोनॉमिक्स ऑफेंस विंग, सिक्योरिटी एंड ट्रैफ़िकपद पर नियुक्त किया गया है।
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इंग्लैंड दौरे पर पाकिस्तान क्रिकेट टीम का प्रदर्शन लगातार निराशाजनक रहने के बाद अब पूरा क्रिकेट ढांचा बदलाव के दौर में पहुंचता दिखाई दे रहा है। तीन टेस्ट मैचों की सीरीज खत्म होने से पहले ही पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने कई बड़े फैसले लिए हैं। इंग्लैंड ने पहले दोनों टेस्ट जीतकर सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली है। हेडिंग्ले में पाकिस्तान को पारी और 103 रन से हार मिली थी, जबकि लॉर्ड्स में इंग्लैंड ने 194 रन से बाजी मारी।
लगातार दो बड़ी हार के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने टीम और उसके सहयोगी दल में बड़े बदलाव किए हैं। सरफराज अहमद और उमर गुल को कोचिंग व्यवस्था से अलग कर दिया गया है। उनकी जगह माइक हेसन को टीम की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज एश्ले नॉफ्के को सहायक की भूमिका सौंपी गई है।
इसके अलावा तीसरे और अंतिम टेस्ट के लिए पाकिस्तान की टीम में भी बड़ा बदलाव किया गया है। सात खिलाड़ियों को टीम से बाहर कर दिया गया है। इनमें अनुभवी विकेटकीपर बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान, इमाम-उल-हक और सलमान अली आगा जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। इस फैसले से संकेत मिल रहा है कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड अब मौजूदा खिलाड़ियों पर निर्भर रहने के बजाय युवा खिलाड़ियों को तैयार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना चाहता है।
गौरतलब है कि पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर ने भी टीम में हो रहे इन बदलावों को लेकर अपनी राय रखी है। एक कार्यक्रम में बातचीत के दौरान अख्तर ने कहा कि उन्हें लगता है कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का मौजूदा खिलाड़ियों के एक बड़े हिस्से पर भरोसा लगभग खत्म हो चुका है। उनके अनुसार, बोर्ड अब इंग्लैंड में मिली हार को केवल एक खराब दौरे के रूप में नहीं देख रहा, बल्कि इसे टीम के व्यापक पुनर्निर्माण के मौके के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है।
शोएब अख्तर के मुताबिक, बोर्ड मौजूदा टीम को हटाकर नए और युवा खिलाड़ियों को आगे लाने की योजना बना रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लिए खेलने की इच्छा रखने वाले नए खिलाड़ियों पर ध्यान दिया जा रहा है और भविष्य के लिए टीम तैयार करने की कोशिश हो रही है।
हालांकि, अख्तर ने इस बदलाव के दौरान कुछ अनुभवी खिलाड़ियों के करियर को बचाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने खास तौर पर शाहीन शाह अफरीदी, नसीम शाह और हारिस रऊफ का नाम लिया। उनका कहना है कि इन तीनों तेज गेंदबाजों के करियर में अभी काफी क्रिकेट बाकी है और बदलाव की प्रक्रिया में उनके भविष्य का ध्यान रखा जाना चाहिए।
अख्तर ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के एक अधिकारी के साथ हुई कथित बातचीत का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने अधिकारी से पूछा कि इंग्लैंड दौरे पर मौजूदा टीम से बोर्ड को क्या उम्मीद है, तो जवाब बेहद सीधा था। अख्तर के अनुसार अधिकारी ने कहा कि मौजूदा टीम से कोई उम्मीद नहीं है और बोर्ड की उम्मीदें अगली पीढ़ी के उन खिलाड़ियों से हैं, जिन्हें बड़े मंच के लिए तैयार किया जा रहा है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, अख्तर ने पाकिस्तान क्रिकेट की मौजूदा स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि इसे पटरी पर लौटने में करीब दो साल लग सकते हैं। उन्होंने लाहौर स्थित राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी का भी जिक्र किया, जहां दूसरे टेस्ट के दौरान वह पहुंचे थे। अख्तर ने कहा कि करीब 26 साल बाद अकादमी में बुनियादी ढांचे से जुड़े काम होते दिखाई दे रहे हैं।
पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज ने टीम के प्रदर्शन पर भी कड़ी टिप्पणी की। उनका कहना था कि इंग्लैंड के खिलाफ दोनों मुकाबलों में पाकिस्तान की टीम में संघर्ष करने का जज्बा नजर नहीं आया। लगातार दो बड़ी हार ने टीम की बल्लेबाजी, गेंदबाजी और दबाव झेलने की क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
बता दें कि अब पाकिस्तान के सामने एजबेस्टन में तीसरे टेस्ट की चुनौती है। इंग्लैंड पहले ही सीरीज अपने नाम कर चुका है और उसकी नजर अब पाकिस्तान का 3-0 से सफाया करने पर होगी। वहीं पाकिस्तान के लिए यह मुकाबला सिर्फ हार से बचने का अवसर नहीं है, बल्कि बदली हुई टीम और नए कोचिंग ढांचे के साथ भविष्य की दिशा तय करने का मौका भी माना जा रहा है।
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के हालिया फैसलों और शोएब अख्तर की टिप्पणियों से साफ है कि टीम की समस्या को अब केवल इंग्लैंड दौरे की हार तक सीमित नहीं माना जा रहा है। युवा खिलाड़ियों को मौका देना, ढांचे में बदलाव करना और लंबे समय के लिए मजबूत टीम तैयार करना पाकिस्तान क्रिकेट की प्राथमिकता बनती दिखाई दे रही है। आने वाले दो साल इस पुनर्निर्माण की सफलता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
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