गुजरात के हर जिले और शहर में बनेगी एंटी-नारकोटिक्स विंग, 7 दिन में शुरू होगा काम
गुजरात में ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई को और मजबूत करने के लिए पुलिस ने बड़ा फैसला लिया है. राज्य के हर जिले और पुलिस कमिश्नरेट में अब अलग से एंटी-नारकोटिक्स विंग (ANW) बनाई जाएगी. इन विशेष टीमों को केवल नशीले पदार्थों से जुड़े अपराधों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी दी जाएगी. पुलिस को सभी यूनिट्स को अगले 7 दिनों के भीतर ऑपरेशनल करने का निर्देश दिया गया है.
यह कदम मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में ड्रग नेटवर्क के खिलाफ अपनाई गई 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत उठाया गया है. गुजरात पुलिस के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में NDPS एक्ट के तहत 3,700 से अधिक मामले दर्ज किए गए और 5,346 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. इसी अवधि में करीब 1.36 लाख किलोग्राम से ज्यादा नशीले पदार्थ, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 13,600 करोड़ रुपये है, जब्त किए गए.
हर यूनिट में होंगे 8 पुलिसकर्मी
एंटी-नारकोटिक्स विंग में कुल आठ पुलिसकर्मी होंगे. टीम में एक पुलिस इंस्पेक्टर, एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर, दो ASI/हेड कांस्टेबल और चार पुलिस कांस्टेबल शामिल होंगे. प्रत्येक यूनिट को अलग वाहन और ड्राइवर भी उपलब्ध कराया जाएगा. जिला स्तर पर ANW सीधे संबंधित पुलिस अधीक्षक (SP) की निगरानी में काम करेगी. वहीं अहमदाबाद और सूरत में दो-दो यूनिट, जबकि वडोदरा और राजकोट में एक-एक यूनिट काम करेगी. इन शहरों में यूनिट्स की निगरानी जॉइंट या एडिशनल पुलिस कमिश्नर स्तर के अधिकारी करेंगे.
ड्रग तस्करों और हॉटस्पॉट पर रहेगी नजर
ANW को एक विशेष टास्क फोर्स के तौर पर काम करना होगा और उसे NDPS से जुड़े मामलों के अलावा कोई दूसरी ड्यूटी नहीं दी जाएगी. ये टीमें एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) द्वारा चिन्हित ड्रग तस्करों और हॉटस्पॉट पर लगातार निगरानी रखेंगी. आदतन ड्रग अपराधियों के खिलाफ PIT-NDPS के तहत निवारक कार्रवाई के लिए ANW, CID Crime को प्रस्ताव भी भेज सकेगी. हालांकि, नई यूनिट बनने के बाद भी स्थानीय पुलिस थानों की NDPS मामलों की जांच और कार्रवाई की जिम्मेदारी बनी रहेगी. जांच के दौरान स्थानीय पुलिस की लापरवाही सामने आने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
ड्रग नेटवर्क पकड़ने के लिए AI तकनीक का इस्तेमाल
गुजरात पुलिस ने ड्रग नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई में तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ाया है. डार्क वेब की गतिविधियों, वित्तीय लेन-देन और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन का पता लगाने के लिए AI आधारित सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है. इसके साथ ही मामलों में वैज्ञानिक जांच को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि अदालतों में दोषसिद्धि दर बेहतर हो सके.
पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ नशे की लत से प्रभावित युवाओं के लिए राज्य के नशा मुक्ति केंद्रों को भी आधुनिक बनाया जा रहा है. इनमें काउंसलिंग और इलाज की सुविधाओं को बेहतर करने पर जोर दिया जा रहा है. इस तरह गुजरात सरकार ड्रग तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई के साथ नशे से प्रभावित लोगों के पुनर्वास पर भी ध्यान दे रही है.
Uttarakhand Elections 2027: चमोली की तीनों सीटों पर सियासी उठा-पटक तेज, जानें हर सीट का हाल
Uttarakhand Elections 2027: उत्तर प्रदेश के साथ-साथ देवभूमि उत्तराखंड में भी अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. बीजेपी और कांग्रेस जैसे राष्ट्रीय दलों के साथ क्षेत्रीय पार्टियों ने भी अभी से चुनावी तैयारियां शुरू कर दी है. राज्य के चमोली जनपद को देवभूमि उत्तराखंड का हृदय, सनातन आस्था का सर्वोच्च शिखर और अलकनंदा-मंदाकिनी की पावन घाटी का केंद्र माना जाता है.
इसके साथ ही भौगोलिक विस्तार के लिहाज से भी यह जिला राज्य के सबसे बड़े जनपदों में शामिल हैं. चमोली धार्मिक, सांस्कृतिक, पर्यावरणीय और सामरिक दृष्टि से देश के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण जिलों में गिना जाता है. अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए जिले की घाटियों से लेकर कस्बों तक सियासी सरगर्मियां तेज होने लगी हैं. ऐसे में सभी राजनीतिक दलों ने अपनी चुनावी गोटियां बिछाना भी शुरू कर दिया है.
धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है चमोली
उत्तराखंड का चमोली जिला विश्व प्रसिद्ध भू-वैकुंठ श्री बद्रीनाथ धाम, सिखों के पवित्र तीर्थ हेमकुंड साहिब, प्रथम ज्योतिर्लिंग ज्योतिर्मठ (जोशीमठ), फूलों की घाटी और यूनेस्को विश्व धरोहर नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व के लिए दुनियाभर में मशहूर है. ऐसे में यहां की राजनीति में जोशीमठ भू-धंसाव व विस्थापन, चारधाम यात्रा प्रबंधन, आपदा राहत-पुनर्वास, स्थानीय युवाओं का पलायन व रोजगार, सीमांत गांवों का विकास और स्वास्थ्य-सड़क जैसे बुनियादी मुद्दे हमेशा केंद्र में रहते हैं.
चमोली की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सामरिक पहचान
ऐतिहासिक और पौराणिक ग्रंथों में चमोली का वर्णन 'बद्रिकाश्रम' और 'तपोभूमि' के रूप में देखने को मिलता है. यह वही पावन धरा है जहां आदि गुरु शंकराचार्य ने अपने पहले मठ (ज्योतिर्मठ) की स्थापना की थी.
पर्यावरण और जनआंदोलनों की जननी: चमोली केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि जनचेतना का भी प्रमुख केंद्र रहा है. 1970 के दशक में जंगलों को कटने से बचाने के लिए गौरा देवी के नेतृत्व में शुरू हुआ ऐतिहासिक 'चिपको आंदोलन' रेणी गांव (चमोली) से ही उपजा था, जिसने पूरी दुनिया को पर्यावरण संरक्षण का पाठ पढ़ाया.
सांस्कृतिक वैभव: इसके साथ ही चमोली की पहचान हर 12 साल में आयोजित होने वाली एशिया की सबसे लंबी पैदल धार्मिक यात्रा 'श्री नंदा देवी राजजात', पाषाण और काष्ठ कला के बेजोड़ नमूनों, मुखौटा नृत्य शैली और औली के विख्यात स्नो-स्कीइंग स्लोप्स से भी है.
चमोली जिले की कुल आबादी और साक्षरता दर
| श्रेणी | आंकड़ा |
|---|---|
| कुल आबादी | 3,91,605 |
| पुरुष | 1,93,991 |
| महिलाएं | 1,97,614 |
| लिंगानुपात | 1,019 |
| औसत साक्षरता दर | 82.65% |
| पुरुष साक्षरता | 93.40% |
| महिला साक्षरता | 72.32% |
चमोली जिले की धार्मिक आबादी
| धर्म | जनसंख्या | प्रतिशत |
|---|---|---|
| हिंदू | 3,85,818 | 98.52% |
| मुस्लिम | 4,395 | 1.12% |
| ईसाई | 428 | 0.11% |
| सिख | 323 | 0.08% |
| बौद्ध | 190 | 0.05% |
| जैन | 11 | 0.003% |
| अन्य धर्म | 23 | 0.01% |
| धर्म उल्लिखित नहीं | 417 | 0.11% |
| कुल | 3,91,605 | 100% |
चमोली जिले में विधानसभा की कुल सीटें
बद्रीनाथ विधानसभा सीट
बता दें कि चमोली जिले में विधानसभा की कुल तीन सीटें हैं. इनमें बद्रीनाथ, थराली और कर्णप्रयाग सीट शामिल हैं. जिनमें दो सीटों पर बीजेपी उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी जबकि कांग्रेस ने सिर्फ एक सीट पर जीत दर्ज की. बद्रीनाथ विधानसभा सीट के भौगोलिक और सांस्कृतिक विस्तार की बात करें तो भू-वैकुंठ बद्रीनाथ धाम, हेमकुंड साहिब, ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) और जिला मुख्यालय गोपेश्वर भी इस सीट के दायरे में आते हैं.
2022 विधानसभा चुनाव में सभी सीटों पर कैसे रहे नतीजे
| विधानसभा सीट | विजेता प्रत्याशी (पार्टी) | प्राप्त वोट | निकटतम प्रतिद्वंद्वी (पार्टी) | प्राप्त वोट | जीत का अंतर |
|---|---|---|---|---|---|
| बद्रीनाथ (04) | राजेंद्र सिंह भंडारी (कांग्रेस) | 32,661 | महेंद्र भट्ट (बीजेपी) | 30,595 | 2,066 वोट |
| थराली (05-SC) | भूपाल राम टम्टा (बीजेपी) | 32,852 | डॉ. जीत राम (कांग्रेस) | 24,550 | 8,302 वोट |
| कर्णप्रयाग (06) | अनिल नौटियाल (बीजेपी) | 28,911 | मुकेश नेगी (कांग्रेस) | 22,196 | 6,715 वोट |
बद्रीनाथ विधानसभा सीट की बात करें तो यहां हमेशा कड़ा मुकाबला देखने को मिलता रहा है. 2022 के विधानसभा चुनाव इस सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र सिंह भंडारी ने बीजेपी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को 2,066 वोटों से मात दी थी. जबकि 2024 में राजेंद्र सिंह भंडारी के बीजेपी में शामिल होने के बाद हुए उपचुनाव में कांग्रेस के लखपत सिंह बुटोला ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी. इस सीट पर अगर मुद्दों की बात करें तो यहां जोशीमठ भू-धंसाव व प्रभावितों का स्थायी पुनर्वास, चारधाम यात्रा प्रबंधन, सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा और सड़क कनेक्टिविटी के साथ-साथ स्थानीय होटल-पर्यटन व्यवसायियों की समस्याएं हमेशा मुद्दा रही हैं.
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