Viral Video: स्पिति वैली में बौद्ध भिक्षुओं संग फुटबॉल खेलता डॉगी, लोग बोले- ये है असली 'पॉनाल्डो'!
Himachal Pradesh Viral Video: हिमाचल प्रदेश की स्पिति वैली का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें 'माफू' नाम का एक गोल्डन रिट्रीवर डॉग बौद्ध मठ के युवा भिक्षुओं के साथ फुटबॉल खेलता दिख रहा है। इस प्यारे से वीडियो ने इंटरनेट पर लाखों लोगों का दिल जीत लिया है।
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Chinese Robot: चीन की साजिश से दुनिया हमेशा अलर्ट रहती है. इसके बाद भी चीन की कोई न कोई नई चाल सामने आ जाती है. जब मीडिल ईस्ट में पिछले 6 महीनों से जंग चल रही है. तब चीन ने नई प्लानिंग शुरू कर दी है. चीनी रोबोट अक्सर प्राइवेसी को लेकर चर्चा में रहते हैं. अमेरिका भी कई बार चीनी रोबोट कंपनियों पर कई एक्शन ले चुकी हैं. वैसे तो चीन काम को आसान करने के लिए रोबोट बना रहा है. यह केवल दुनिया को दिखाने के लिए है. असल में चीन काम में हाथ बंटाने के साथ साथ युद्ध लड़ने के लिए सक्षम रोबोट तक बना रहा है. इसका खुलासा एक रिपोर्ट में हुआ है.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले महीने चीन में हुए विश्व ह्यूमनॉइड रोबोट गेम्स में रोबोटों ने दौड़ लगाई, मुक्केबाजी की और डांस भी किया. कुछ तेज रोबोटों ने 100 मीटर की दौड़ में उसैन बोल्ट के रिकॉर्ड से भी तेज समय दर्ज किया. दर्शकों ने रोबोटों की बढ़ती क्षमता और उनके मजेदार तरीके से लड़खड़ाने पर खूब तालियां बजाईं.
खेल खत्म होने के दो दिन बाद चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के आधिकारिक अखबार ने इस आयोजन से मिले सबक पर चर्चा की. PLA डेली ने वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं से कहा कि रोबोटिक तकनीक को लैब से निकालकर सैन्य प्रशिक्षण और इस्तेमाल तक पहुंचाने की प्रक्रिया तेज की जाए.
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खुलासा: ह्यूमनॉइड रोबोट का हो रहा सैन्य इस्तेमाल
रॉयटर्स ने चीन के 100 से ज्यादा सैन्य खरीद नोटिस, रिसर्च पेपर, पेटेंट, सरकारी रिकॉर्ड, आधिकारिक प्रकाशन और रक्षा कंपनियों की जानकारी की समीक्षा की है. इससे पता चलता है कि चीन की सेना ह्यूमनॉइड रोबोटों के सैन्य इस्तेमाल पर तेजी से काम कर रही है. भविष्य में इन रोबोटों को युद्ध के दौरान इस्तेमाल करने की योजना भी बनाई जा रही है.
पिछले साल से तेज हुआ काम
रिपोर्ट के अनुसार, पहले सार्वजनिक नहीं किए गए दस्तावेजों से पता चलता है कि चीन के सैन्य संस्थान ऐसे ह्यूमनॉइड रोबोटों का परीक्षण कर रहे हैं, जिन्हें युद्ध के मैदान की जरूरतों के हिसाब से तैयार किया जा सके. इसके साथ ही सेना इन रोबोटों और उनसे जुड़ी तकनीक को हासिल करने की कोशिश कर रही है और यह भी अध्ययन कर रही है कि रोबोट सैनिकों के साथ मिलकर किस तरह काम कर सकते हैं. यह काम 2025 और 2026 में तेजी से आगे बढ़ा है. इसमें खास तौर पर रोबोटों की आसपास की चीजों को समझने, खुद काम करने और उन्हें ट्रेनिंग देने के लिए जरूरी डेटा पर ध्यान दिया जा रहा है.
95% ह्यूमनॉइड रोबोटों पर चीन का कब्जा
बोफा ग्लोबल रिसर्च के मुताबिक, 2025 में दुनिया भर में भेजे गए ह्यूमनॉइड रोबोटों में करीब 95% चीन की कंपनियों ने बनाए थे. इससे चीन की सेना को तेजी से बढ़ते रोबोट उद्योग का फायदा मिल रहा है. साथ ही, चीन अपनी सेना के लिए इन रोबोटों के नए इस्तेमाल पर भी काम कर रहा है.
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रूस-यूक्रेन युद्ध में ड्रोन का बढ़ा इस्तेमाल
चीन में रोबोट से जुड़ा रक्षा अनुसंधान यह दिखाता है कि दुनिया भर में सैन्य तकनीक तेजी से विकसित हो रही है. रूस-यूक्रेन युद्ध में ऐसे ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ा है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से रास्ता खोजने और लक्ष्य पर निशाना लगाने में सक्षम हैं. इन ड्रोन ने जासूसी और हमले के तरीकों में बड़ा बदलाव किया है. वहीं, कुछ रोबोट सामान पहुंचाने और घायल सैनिकों को निकालने जैसे काम भी कर रहे हैं.
चीन ने नहीं दिया जवाब
चीन के रक्षा मंत्रालय और सेना के प्रमुख शोध संस्थान नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी (NUDT) ने ह्यूमनॉइड रोबोटों के सैन्य इस्तेमाल को लेकर पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया. UCLA में मैकेनिकल और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के प्रोफेसर डेनिस हांग ने कहा कि रोबोट बनाने का सबसे बड़ा मकसद यह है कि उन्हें उन जगहों पर भेजा जा सके, जहां इंसानों को भेजना खतरनाक हो सकता है. अगर किसी रोबोट के नष्ट होने से किसी इंसान की जान बचाई जा सकती है, तो रोबोट को खोना भी मंजूर है.
शहरी हमले में रोबोटों के इस्तेमाल की तैयारी
चीन ने शहरी युद्ध में ह्यूमनॉइड रोबोटों को शामिल करने की योजना पर भी काम शुरू कर दिया है. एक योजना के मुताबिक, 6 "लड़ाकू रोबोट" को दो हमलावर टीमों में बांटा जाएगा. इसमें जिनमें ह्यूमनॉइड रोबोट, रोबोट कुत्ते और बिना चालक वाले वाहन शामिल हो सकते हैं. ये रोबोट जमीन पर मौजूद सैनिकों के साथ मिलकर दुश्मन के कब्जे वाली इमारत को खाली कराने में मदद करेंगे. इसमें इमारत की हर मंजिल और हर कमरे की तलाशी शामिल होगी.
अगस्त 2025 में शीआन स्थित नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी (NUDT) के परीक्षण केंद्र के शोधकर्ताओं ने एक रिसर्च पेपर में इस तरह के शहरी हमले की योजना का जिक्र किया था. इसमें ऐसी तकनीक और उपकरणों को ध्यान में रखा गया था, जिनके अगले 5 से 10 साल में उपलब्ध होने की उम्मीद जताई गई थी. हालांकि, इस अध्ययन में यह नहीं बताया गया कि युद्ध के दौरान रोबोट किन नियमों का पालन करेंगे, उनके पास किस तरह के हथियार होंगे या आम नागरिकों के सामने आने पर वे क्या करेंगे.
पहले ही मिल चुके हैं संकेत
चीनी सैन्य विशेषज्ञों ने मानव जैसे रोबोटों के इस्तेमाल को लेकर उनकी भूमिका और बढ़ाने की बात कही है. जुलाई 2025 में पीएलए डेली में प्रकाशित एक लेख में कहा गया कि भविष्य में मानव जैसे रोबोट सिर्फ सैनिकों की मदद करने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि सीधे लड़ाई में भी मुख्य भूमिका निभा सकते हैं. लेख में यह भी चर्चा की गई कि किसी इंसान से पुष्टि किए गए जीवित लक्ष्य पर रोबोटों को गोली चलाने की अनुमति कैसे दी जा सकती है. दिसंबर में, पीएलए ईस्टर्न थिएटर कमांड ने एआई से बनाया गया एक वीडियो जारी किया था. इसमें भविष्य के एक काल्पनिक युद्ध में सैन्य रोबोटों को ताइवान की रक्षा पंक्ति को तोड़ते हुए दिखाया गया था. इन रोबोटों में मानव जैसे रोबोटों के साथ-साथ चार पैरों वाले रोबोट भी शामिल थे.
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