मंदसौर पुलिस ने युवक को पकड़ा, बैग में मिली 1 किलो अफीम, NDPS एक्ट में केस दर्ज
मंदसौर में अवैध नशे के कारोबार के खिलाफ पुलिस का एक्शन लगातार जारी है। इसी कड़ी में पिपलिया मंडी पुलिस ने 1 किलो अफीम के साथ एक युवक को गिरफ्तार किया है। पुलिस को देखकर यह भागने की कोशिश में कर रहा था। ऐसे में संदेह के आधार पर जब इसे पकड़ा गया तो इसके पास से नशीला पदार्थ बरामद हुआ।
जानकारी के मुताबिक पिपलियामंडी पुलिस रात के समय गांवों में गश्त दे रही थी। इसी दौरान संपवेल के पास ओवर ब्रिज की तरफ से एक युवक आता हुआ दिखाई दिया। इसके पास काले रंग का पिठ्ठू बैग था। पुलिस को देखकर ये भागने लगा। जब इसे पकड़ा गया तो उसके पास से करीब एक लाख रुपए कीमत की अफीम बरामद की गई।
मौके से भाग रहा था युवक
युवक पुलिस के हत्थे इसलिए चढ़ गया क्योंकि इसने जैसे ही देखा कि सामने पुलिस की गश्त है। यह वापस मुड़कर हाईवे रोड की तरफ भागने की कोशिश करने लगा। पुलिस का ध्यान इसकी तरफ गया और टीम ने घेराबंदी कर इसे पकड़ लिया। इस युवक की पहचान करण भील निवासी धामेड़ी थाना पिपलौदा जिला रतलाम के रूप में की गई है। इसके बैग की तलाशी लेने पर 1 किलो अफीम जब्त हुई। इसके पास से कीपैड मोबाइल फोन भी जब्त किया गया है और ये पुलिस की गिरफ्त में है।
केस किया गया दर्ज
पुलिस ने युवक के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/18 के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस द्वारा युवक को रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई है। ये पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिरकार ये अफीम कहां से लेकर आया और किसे सप्लाई करने जा रहा था। इस पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
राजस्थान निकाय चुनाव में मतदान से पहले ही 77 उम्मीदवार निर्विरोध जीते, BJP ने मारी बड़ी बाजी
राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव को लेकर सियासी तस्वीर मतदान से पहले ही कुछ सीटों पर साफ हो गई है. राज्य में 77 उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन हुआ है. यानी इन वार्डों में मतदाताओं को मतदान करने की जरूरत नहीं होगी. निर्विरोध चुने गए प्रत्याशियों में सबसे बड़ी संख्या भारतीय जनता पार्टी (BJP) की है. भाजपा ने अकेले 44 सीटों पर निर्विरोध जीत दर्ज कर शुरुआती बढ़त बना ली है.
इसके बाद निर्दलीय उम्मीदवारों का नंबर आता है, जबकि कांग्रेस तीसरे स्थान पर है. चुनावी मुकाबले से पहले ही इस तरह का परिणाम राजनीतिक दलों के लिए अहम संकेत माना जा रहा है.
77 निर्विरोध सीटों में किसका कितना हिस्सा?
राज्य में निर्विरोध चुने गए 77 प्रत्याशियों में 44 भाजपा, 16 कांग्रेस और 17 निर्दलीय उम्मीदवार शामिल हैं. आंकड़ों के लिहाज से देखें तो निर्विरोध जीत में भाजपा की हिस्सेदारी करीब 56.4 प्रतिशत है.
वहीं निर्दलीय उम्मीदवारों ने लगभग 23.1 प्रतिशत सीटों पर कब्जा किया है, जबकि कांग्रेस के खाते में करीब 20.5 प्रतिशत निर्विरोध सीटें गई हैं.
इस तरह तीनों प्रमुख श्रेणियों को मिलाकर निर्विरोध निर्वाचन की पूरी तस्वीर सामने आती है. खास बात यह है कि भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीयों के अलावा किसी अन्य क्षेत्रीय या छोटे दल का कोई उम्मीदवार निर्विरोध चुनाव जीतने में सफल नहीं रहा.
भाजपा ने बनाई शुरुआती बढ़त
मतदान से पहले 44 सीटों पर निर्विरोध जीत भाजपा के लिए निश्चित तौर पर राहत और उत्साह का कारण है. पार्टी ने निर्विरोध निर्वाचित प्रत्याशियों की संख्या के मामले में कांग्रेस से काफी बड़ी बढ़त हासिल की है.
राजनीतिक रूप से निर्विरोध चुनाव जीतना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे संबंधित निकाय में पार्टी या उम्मीदवार को बिना मतदान के ही प्रतिनिधित्व मिल जाता है. हालांकि पूरे चुनावी परिणाम का आकलन केवल निर्विरोध सीटों के आधार पर करना जल्दबाजी होगी, क्योंकि बड़ी संख्या में वार्डों में मतदान होना अभी बाकी है.
कांग्रेस के 16 प्रत्याशी निर्विरोध
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भी पूरी तरह खाली हाथ नहीं रहा. पार्टी के 16 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं. कुल निर्विरोध सीटों में कांग्रेस की हिस्सेदारी करीब 20.5 प्रतिशत रही.
हालांकि भाजपा के मुकाबले कांग्रेस के निर्विरोध विजेताओं की संख्या काफी कम है. ऐसे में मतदान वाले वार्डों में कांग्रेस का प्रदर्शन उसके लिए महत्वपूर्ण होगा.
निर्दलीयों ने भी दिखाई ताकत
निर्विरोध जीत के मामले में निर्दलीय प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे हैं. कुल 17 निर्दलीय उम्मीदवार बिना मुकाबले के चुने गए हैं. इनकी हिस्सेदारी करीब 23.1 प्रतिशत है.
यह आंकड़ा इस बात की ओर भी इशारा करता है कि स्थानीय निकाय चुनावों में कई जगह उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पकड़ और स्थानीय समीकरण पार्टी के चुनाव चिन्ह से अलग भूमिका निभा सकते हैं.
डीग में सबसे ज्यादा निर्विरोध चुनाव
निर्विरोध निर्वाचन के मामले में डीग सबसे आगे रहा है. यहां कुल 10 वार्डों में प्रत्याशी निर्विरोध चुने गए हैं. इसके बाद चित्तौड़गढ़ में छह और सीकर में पांच वार्डों में निर्विरोध निर्वाचन हुआ.
वहीं अलवर, झुंझुनूं, जोधपुर और खैरथल-तिजारा में चार-चार वार्ड ऐसे रहे, जहां प्रत्याशियों को मतदान का सामना नहीं करना पड़ा.
जयपुर में तस्वीर बिल्कुल अलग
जहां प्रदेश के कई हिस्सों में उम्मीदवार निर्विरोध जीत गए, वहीं राजधानी जयपुर में तस्वीर इसके बिल्कुल उलट रही. जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में से किसी भी वार्ड में कोई प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित नहीं हुआ.
इससे साफ है कि अलग-अलग शहरों और निकायों में स्थानीय चुनावी समीकरण काफी अलग हैं. कहीं मुकाबला शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया, तो कहीं प्रत्येक वार्ड में मतदाताओं की भूमिका निर्णायक बनी हुई है.
9 और 11 सितंबर को होगा मतदान
राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव के लिए 9 और 11 सितंबर को मतदान प्रस्तावित है. राज्य निर्वाचन आयोग के मुताबिक विभिन्न क्षेत्रों में चुनावी प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ रही है.
77 सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन के बाद अब राजनीतिक दलों का पूरा ध्यान उन वार्डों पर है, जहां मतदाता अपने प्रतिनिधि का फैसला करेंगे. ऐसे में मतदान प्रतिशत, स्थानीय मुद्दे और उम्मीदवारों की व्यक्तिगत लोकप्रियता चुनावी परिणामों पर बड़ा असर डाल सकती है.
राजस्थान निकाय चुनाव में मतदान से पहले ही 77 उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना चुनावी प्रक्रिया की दिलचस्प तस्वीर पेश करता है. भाजपा 44 सीटों के साथ सबसे आगे, जबकि निर्दलीय 17 और कांग्रेस 16 निर्विरोध सीटों के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं. हालांकि असली राजनीतिक परीक्षा अब उन सीटों पर होगी, जहां 9 और 11 सितंबर को मतदाता अपने वोट के जरिए फैसला सुनाएंगे.
निर्विरोध जीत से बदले कई निकायों के समीकरण
नगरीय निकाय चुनाव में निर्विरोध निर्वाचन का सीधा फायदा संबंधित उम्मीदवारों और उनके राजनीतिक दलों को मिलेगा. जिन 77 वार्डों में प्रत्याशी निर्विरोध चुने गए हैं, वहां अब मतदान की जरूरत नहीं होगी. इससे इन वार्डों में चुनावी खर्च और प्रचार की प्रक्रिया भी समाप्त हो गई है. हालांकि, प्रदेश के बाकी वार्डों में उम्मीदवारों के बीच मुकाबला जारी रहेगा.
बीजेपी की बढ़ी उम्मीदें
खास बात यह है कि निर्विरोध जीत का सबसे ज्यादा फायदा भाजपा को मिला है. पार्टी के 44 उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने से स्थानीय निकायों में उसका प्रतिनिधित्व मतदान से पहले ही बढ़ गया है. दूसरी ओर, 17 निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत यह बताती है कि स्थानीय स्तर पर कई प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पकड़ भी मजबूत है.
बुनियादी मुद्दे बदल सकते हैं आने वाले परिणाम
अब राजनीतिक दलों की नजर मतदान वाले वार्डों पर है. दरअसल इन क्षेत्रों में स्थानीय विकास, सड़क, सफाई, पेयजल, जल निकासी, स्ट्रीट लाइट, रोजगार और बुनियादी सुविधाएं जैसे मुद्दे मतदाताओं के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं. इसका सीधा असर आने वाले परिणामों पर भी पड़ सकता है.
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