आज से बदल गए NSE और BSE के प्री-ओपन नियम, निवेशकों पर क्या होगा असर?
NSE-BSE New Rules: इस बदलाव से बाजार में हेराफेरी रुकेगी। पहले कुछ बड़े निवेशक ऑर्डर विंडो के आखिरी समय में नकली बड़े मार्केट ऑर्डर डालकर कीमतें ऊपर-नीचे करते थे और फिर मैचिंग से पहले उन्हें रद्द कर देते थे। अब 9:05 बजे के बाद मार्केट ऑर्डर नहीं डाले जा सकते।
South Delhi के सत्य निकेतन में 5 मंजिला PG इमारत ढहने से 5 की मौत
नयी दिल्ली, छह सितंबर दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के दक्षिणी परिसर के पास सत्य निकेतन की एक संकरी गली में लड़कों के पेइंग गेस्ट (पीजी) के रूप में इस्तेमाल हो रही करीब 30 साल पुरानी पांच मंजिला इमारत रविवार अपराह्न ढह गई। इस हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई जबकि मलबे में फंसे करीब 15-20 और लोगों को निकालने के लिए रात तक कई एजेंसियों का बचाव अभियान जारी रहा। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने एक बयान में कहा कि अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में दस घायल लोगों को लाया गया। एम्स ने बताया, ‘‘चार लोगों को मृत अवस्था में लाया गया जबकि गंभीर हालत में लाए गए एक मरीज ने बाद में दम तोड़ दिया। तीन मरीज भर्ती हैं और उनका इलाज हो रहा है।
एक मरीज की सर्जरी हुई है और एक अन्य मरीज को मामूली चोट आई थी, उसे निगरानी के बाद छुट्टी दे दी गई।’’ पुलिस ने साउथ कैंपस थाने में इमारत के मालिक हरिराम और अन्य लोगों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या, इमारत के रखरखाव में लापरवाही और अन्य लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालने के आरोप में मामला दर्ज किया। पुलिस ने बताया, ‘‘यह इमारत पेइंग गेस्ट (पीजी) के रूप में इस्तेमाल हो रही थी। आरोप है कि भूतल पर मरम्मत का काम हो रहा था जिसके कारण इमारत ढह गई।
आरोपित लोगों की तलाश के लिए कई टीम गठित की गई हैं।’’ जब बचाव दल मलबे को हटाकर राहत एवं बचाव कार्य में जुटे थे तो स्थानीय लोग और प्रत्यक्षदर्शी भी इस मुश्किल प्रयास में उनके साथ शामिल हो गए। उन्होंने अपने हाथों और उपलब्ध औजारों की मदद से मलबे में दबे लोगों की तलाश शुरू की। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की दो टीम (जिसमें 70 कर्मी हैं) और एक श्वान दस्ता मलबे में जीवित बचे लोगों की तलाश में शामिल रहे।
एनडीआरएफ के एक अधिकारी ने बताया कि मलबे में फंसे लोगों को सांस लेने में मदद के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर नीचे पहुंचाए गए। घटनास्थल पर दमकल की गाड़ियां भी तैनात की गई हैं। दिल्ली पुलिस, दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए), दिल्ली नगर निगम, ‘कैट’ और नागरिक सुरक्षा की टीम घटनास्थल पर बचाव अभियान में जुटे रहे।
मलबे में दबे कुछ छात्रों की दिल को दहला देने वाली तस्वीरें सामने आईं जिनमें वे मदद के लिए अपने मोबाइल से लोगों को फोन करते नजर आए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पुलिस आयुक्त और एनडीआरएफ के महानिदेशक से हालात की जानकारी ली। उन्होंने कहा, ‘‘स्थानीय प्रशासन और एनडीआरएफ मिलकर तेजी से बचाव कार्य कर रहे हैं।
घायलों को हर जरूरी चिकित्सीय मदद दी जा रही है। मैं सभी घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करता हूं।’’ गुप्ता ने उस जगह का दौरा किया जहां इमारत गिरी थी और एम्स ट्रॉमा सेंटर में घायलों से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने रविवार को सत्य निकेतन इमारत ढहने की घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए।
दिल्ली मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘घटनास्थल के निरीक्षण और प्रारंभिक आकलन के आधार पर मुख्यमंत्री ने घटना की मजिस्ट्रेट जांच और भवन मालिक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए हैं।’’ मुख्यमंत्री ने दोषियों को कड़ी सजा दिलाने का वादा किया, वहीं उनके कार्यालय ने बताया कि सरकार घायल छात्रों के परिवारों के संपर्क में है और उन्हें जरूरी मदद दे रही है। इमारत अपराह्न करीब 1.30 बजे गिरी जब इसके भूतल पर मरम्मत का काम हो रहा था। स्थानीय लोगों ने दावा किया कि कुछ दिनों से बारिश होने के कारण बेसमेंट में पानी जमा होने लगा था, जिससे इसकी नींव कमजोर हो गई थी, जिसके कारण इमारत ढह गई।
एमसीडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि लड़कों के छात्रावास के रूप में इस्तेमाल हो रही यह पांच मंजिला इमारत करीब 30 साल पुरानी थी। यह पुनर्वास कॉलोनी में 55 वर्ग गज क्षेत्र में बनी भूतल और चार मंजिला (जी प्लस 4) इमारत थी, जबकि इसके निर्माण के लिए पहले केवल भूतल और एक मंजिल (जी प्लस 1) की अनुमति दी गई थी। एमसीडी ने पास की एक अन्य इमारत जिसका इस्तेमाल महिला पीजी के तौर पर किया जा रहा था, उसके किरायेदारों को बाहर निकालकर उसे सील कर दिया है।
संकरी एवं भीड़भाड़ वाली गलियों वाले इस इलाके में कई छात्रावास और भोजनालय हैं। बेहद पास-पास बनी इमारतों और बड़ी संख्या में छात्रों की मौजूदगी के कारण अक्सर आने-जाने के लिए बहुत कम जगह बचती है। स्थानीय लोगों ने कहा कि इलाके में रहने वाले अधिकतर छात्र केरलम, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से हैं और पास में स्थित कॉलेजों में पढ़ते हैं।
स्थानीय निवासियों ने घनी आबादी वाले इस इलाके में इमारतों की हालत और उनके रखरखाव को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में कई मकानों को पेइंग गेस्ट (पीजी) में बदल दिया गया है। पिछले दो दशकों से अधिक समय से इलाके में रह रहीं प्रियंका ने कहा, ‘‘यहां इमारतें पांच-छह मंजिल तक बनाई जा रही हैं।
कई मकानों को लड़कों के पीजी (पेइंग गेस्ट) में तब्दील कर दिया गया है और मालिक कहीं और चले गए हैं। वे बस संपत्ति को पीजी का नाम दे देते हैं, किराया ऑनलाइन लेते हैं और इलाके में वापस आकर यह तक नहीं देखते कि स्थिति क्या है।’’ एंबुलेंस की आवाजाही में रुकावट न आए इसके लिए पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया गया है। पुलिस ने बताया कि इमारत गिरने की घटना के विरोध में यहां नगर निगम मुख्यालय ‘सिविक सेंटर’ पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के करीब 150-200 छात्र जमा हुए।
उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारी गेट नंबर पांच से सिविक सेंटर में दाखिल हुए और मुख्य इमारत के बाहर प्रदर्शन किया। उन्होंने नारे लगाए और दिल्ली नगर निगम की कार्यप्रणाली का विरोध किया। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “प्रदर्शन के दौरान, कुछ प्रदर्शनकारियों ने जबरन सिविक सेंटर की मुख्य इमारत में घुसने की कोशिश की, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की हुई।” उन्होंने कहा कि पुलिस ने लगभग 15 छात्रों को हिरासत में लिया और उन्हें कमला मार्केट पुलिस थाने ले गई, जहां दिल्ली पुलिस अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू की जा रही थी।
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